डिजिटल विश्व में भारत ने महाबली अमेरिका को भी कई कदम पीछे छोड़ा

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ग्लोबल इंटरनेट विश्व में भारत ने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। विश्व के करीब 3.8 अरब इंटरनेट उपभोक्ताओं में 21 प्रतिशत के साथ चीन नंबर वन और 12 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ भारत दूसरे पायदान पर पहुंच गया है। इस तेज डिजिटलीकरण से ऑनलाइन कारोबार में इजाफा और नए तरह के करोड़ों जॉब पैदा होने जा रहे हैं।


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नरेंद्र मोदी

हमारा देश अब इंटरनेट के इस्तेमाल में चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार बन चुका है। यह अमेरिका से भी चार फीसदी आगे निकल चुका है। इसमें शीर्ष पर नंबर वन चीन के लगभग 21 प्रतिशत इंटरनेट उपभोक्ता हैं। दुनिया भर में करीब 3.8 अरब इंटरनेट उपभोक्ताओं के बीच भारत में नैरोबैंड और ब्रॉडबैंड इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या 56 करोड़ पार कर चुकी है, जिनमें लगभग 36 करोड़ शहरी और 19.4 करोड़ ग्रामीण उपभोक्ता शामिल हैं।


इंटरनेट उपभोक्ताओं के सर्वे पर केंद्रित मैरी मीकर की एक ताज़ा रिपोर्ट से पता चला है कि दुनिया भर में इंटरनेट के कुल यूजर्स में भारत की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत हो चुकी है, यानी यह इंटरनेट इस्तेमाल करने वाली दूसरी सबसे बड़ी आबादी का देश बन चुका है। इसके पीछे एक महत्वपूर्ण भूमिका रिलायंस जियो के सस्ते मोबाइल डेटा की मानी जा रही है। उल्लेखनीय है कि पांच सितंबर 2016 को जियो ने सस्ते इंटरनेट प्लान के साथ भारतीय नेट कारोबार में कदम रखा था। डिजिटलीकरण की इस तेज रफ्तार पर विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले कुछ वर्षों में भारत में लगभग साढ़े छह करोड़ नौकरियां पैदा हो सकती हैं।


भारत में इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या में मार्च 2016 से 2018 तक 65 फीसदी का इजाफा हुआ है। शहरी इलाकों में रिलायंस जियो की एंट्री उपभोक्ता की बढ़ी संख्या का एक बड़ा कारण मानी जा रही है। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश (तेलंगाना सहित), महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु इन पांच राज्यों से कुल इंटरनेट उपभोक्ताओं में से 20 करोड़ यानी 36 फीसदी उपभोक्ता हैं। भारत नेट ने अबतक 1.1 लाख ग्राम पंचायतों ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ा है।


इनमें उत्तर प्रदेश के 27,940, महाराष्ट्र के 15,126 और मध्यप्रदेश के 12,689 शामिल हैं। केंद्र के राष्ट्रीय सूचना इंफ्रास्ट्रक्टर- द्वितीय का हिस्सा रह चुके अंतराष्ट्रीय सूचना और प्राद्यौगिकी संस्थान- बंगलुरु (आईआईटीबी) के प्रोफेसर देवब्रत दास की मानें तो भारत संचार निगम लिमिटेड और केंद्र के भारत नेट योजना के तहत ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ने की परियोजना ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ताओं की संख्या में बढ़ोतरी का मुख्य कारण है।


मैरी मीकर की रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका में दुनियाभर के इंटरनेट यूजर्स के मात्र आठ प्रतिशत उपभोक्ता ही शामिल हैं। भारत में रिलायंस जियो के कुल लगभग 30.7 करोड़ मोबाइल फोन उपभोक्ता हैं। इनमें जियो के प्रमुख मुकेश अंबानी के हवाले से कहा गया है कि वह एक हाइब्रिड ऑनलाइन से ऑफलाइन वाणिज्य मंच तैयार कर रहे हैं। इसमें रिलायंस रिटेल के मार्केटप्लेस को जियो के डिजिटल ढांचे से जोड़ रहे हैं। इस बीच के आर्थिक विशेषज्ञों का आकलन है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के तहत रोजगार के मौके भारत की नयी पीढ़ी की मुट्ठियों में आने का चमकीला परिदृश्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। गौरतलब है कि डिजिटल मार्केटिंग इंटरनेट मार्केटिंग का एक प्रमुख घटक है।





मैकिंजी की रिपोर्ट ‘डिजिटल इंडिया : टेक्नोलॉजी टू ट्रांसफॉर्म ए कनेक्टेड नेशन’ में बताया गया है कि भारत डिजिटलीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज पारंपरिक विपणन माध्यम अपनी चमक खो रहे हैं और बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं तक पहुंचने का डिजिटल (इंटरनेट) मार्केटिंग का सबसे सशक्त माध्यम बन चुका है। भारत में इंटरनेट डेटा की लागत वर्ष 2013 के बाद से 95 फीसदी कम हो चुकी है जबकि फिक्स्ड लाइन पर डाउनलोड की रफ्तार चौगुनी हो गई है। इससे प्रति व्यक्ति मोबाइल डेटा उपभोग सालाना 152 फीसदी बढ़ चुका है।


मैकिंजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था में वर्ष 2025 तक 6.5 करोड़ रोजगार अवसर पैदा होने वाले हैं। इससे लगभग 4.5 करोड़ परम्परागत नौकरियां तो समाप्त हो जाएंगी लेकिन डिजिटलीकरण से करीब 2 करोड़ से अधिक नई नौकरियां निर्मित हो सकती हैं। अब तो भारत के छोटे-छोटे गांवों के बेहद सामान्य लोग भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पैसों का लेनदेन, खरीदारी करने लगे हैं।





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