इस तरह सैमसंग के फ़र्श से अर्श तक पहुंचे बेंगलुरु के इंजीनियर दीपेश शाह

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भारतीय बाजार में लगातार पकड़ मजबूत करती द.कोरिया की कंपनी सैमसंग अगर बेंगलुरु, नोएडा, दिल्ली में अपने तीन शीर्ष रिसर्च सेंटर चला रही है, बेंगलुरु में विश्व का सबसे बड़ा मोबाइल एक्सपीरियंस सेंटर खोला है अथवा चार भारतीय स्टार्टअप में 58 करोड़ का निवेश, 85.9 करोड़ भारतीय उपभोक्ताओं तक अपनी पहुंच टारगेट की है तो उसमें कंपनी के पहले भारतीय इम्पलॉई दीपेश शाह का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

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वर्ष 1996 से बेंगलुरू में कार्यरत भारत में सैमसंग के फर्स्ट इम्पलॉई दीपेश शाह इस समय सैमसंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआरआई-बी) प्रबंध निदेशक हैं। वर्ष 1994 में दक्षिण कोरिया में सैमसंग कंपनी (आर एंड डी इंडिया) को ज्वॉइन करने से पहले विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और आईआईएम बेंगलूरु के छात्र रहे शाह एक युवा इंजीनियर के रूप में बेंगलुरु में ही एक अन्य कंपनी में कार्यरत थे। कंपनी के सोल (दक्षिण कोरिया) मुख्यालय के बाद सैमसंग का बेंगलुरु में सबसे बड़ा शोध एवं विकास केंद्र एसआरआई-बी स्थापित करने में शाह की अहम भूमिका रही।


इस समय वह आधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस एसआरआई-बी बेंगलुरु में वह एमडी के रूप में 5जी नेटवर्क पर कृत्रिम मेधा (एआई), कंप्यूटर विजन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आदि की रिस्पॉंसबिलिटी संभाल रहे हैं। शाह आज सैमसंग के जिस सबसे महत्वपूर्ण रिसर्च फ्रंट पर तैनात हैं, उसी तकनीकी परिक्षेत्र पर विश्व की सबसे बड़ी एक कंपनी ने आने वाले कुछ सालों के भीतर 22 अरब डॉलर निवेश करने जा रही हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कड़ी टक्कर वाले बाजार में शाह सैमसंग का कितना कठिन मोरचा हैंडिल कर रहे हैं।  


दीपेश शाह बताते हैं कि सैमसंग इंडिया में इस समय लगभग 70,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। कंपनी का बेंगलुरु स्थित रिसर्च सेंटर भारत के आईटी क्षेत्र में सबसे ज़्यादा पेटेंट दाखिल करने का रिकॉर्ड बना चुका है। इसी केंद्र ने 'सुपर स्टेडी मोड' विकसित किया है। इस समय इस सेंटर की रिसर्च टीम भारतीय भाषा-बोलियों के अलावा अंग्रेजी, जर्मन, स्पैनिश, कोरियन और चीनी भाषाओं की आवाज पहचानने वाले वॉयस टूल 'बिक्सबी' पर काम कर रही है। अपने एक इंटरव्यू में दिपेश शाह, भारत में सैमसंग का पहला कर्मचारी बनने से लेकर अब तक के कार्यकाल पर बताते हैं कि उन्हे पिछले लगभग ढाई दशकों में किस तरह की स्थितियों से गुजरते हुए कंपनी का चुनौतीपूर्ण एजेंडा सक्सेस करना पड़ा है।




दीपेश शाह बताते हैं कि उन्हे लगातार अलग-अलग टीम्स के साथ, मॉडम, मल्टीमीडिया, इंटेलिजेंस, फ्लैगशिप प्रोडक्ट्स आदि से जुड़े कई तरह के प्रोजेक्ट्स पर रात-दिन एक करना पड़ा है। तब जाकर वह इस शीर्ष मोकाम (एमडी पद) तक पहुंचे हैं। इस समय दक्षिण कोरिया के बाहर सैमसंग की सबसे बड़ी आर एंड डी सुविधा- एसआरआई बेंगलुरु, सैमसंग के 'मेक फॉर इंडिया' पहल में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। 


शाह का कहना है कि 'मेक फॉर इंडिया' भारतीय उपभोक्ताओं के लिए स्थानीय नवाचार प्रदान करता है। एसआरआई के बेंगलुरु नवाचार, सैमसंग की फ्लैगशिप मोबाइल पेमेंट सेवा 'सैमसंग पे' और सैमसंग की ऐप 'माई गैलेक्सी' में सम्मिलित किए गए हैं। इसके अलावा बेंगलुरु सेंटर सैमसंग के अपने लेटेस्ट टेक्नोलॉजी वाले ऑपरेटिंग सिस्टम टाइज़न पर भी रिसर्च वर्क कर रहा है। एसआरआई बेंगलुरु इस समय माइक्रोवेव अवन, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, टीवी को सैमसंग क्लाउड की सहायता से फोन द्वारा नियंत्रित करने की टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है। इसका मकसद भारतीय बाजार के हिसाब से सैमसंग को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस करना है।





इसी साल कंपनी ने भारतीय बैंकों की मदद से 'मैग्नेटिक सीक्योर ट्रॉसमिशन' या एमएसटी तकनीक का उपयोग करते हुए 'सैमसंग पे' सेवा एवं सस्ते मोबाइल सेट्स के लिए 'सैमसंग पे-मिनी फीचर' सेवा शुरू की है। एसआरआई के बेंगलुरु सेंटर के अलावा दिल्ली और नोएडा में भी नौ हजार इंजीनियर कंपनी के इस तरह के रिसर्च फ्रंट पर जुटे हुए हैं।


इस समय भारत सैमसंग के लिए विश्व का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार और वियतनाम के बाद दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माण केंद्र बन चुका है। हाल ही में सैमसंग गैलेक्सी-ए सीरीज के अलग बजट स्मार्टफोन गैलेक्सी-ए20एस को सर्टिफिकेशन वेबसाइट टीईएनएनएए पर स्पॉट किया गया है। आगामी तीन वर्षों में कंपनी भारत में कुल 85.9 करोड़ ग्राहकों तक अपनी पहुंच टारगेट किए हुए है। वह स्टार्टअप क्षेत्र में भी मदद कर रही है। उसने चार भारतीय स्टार्टअप ओएस लैब्स, गनानी डॉट इन, सिल्वनइनोवेशन लैब्स और कंप्यूटर विजन में लगभग 58 करोड़ रुपए का निवेश किया है।


दो माह पहले ही सैमसंग की निवेश ब्रांच सैमसंग वेंचर इंवेस्टमेंट कॉरपोरेशन (एसवीआईसी) ने भारत में अपने पहले निवेश की घोषणा के साथ इनोवेटिव तकनीकों पर काम कर रहे विभिन्न स्टार्टअप्स को अपने साथ जोड़ लिया है। सैमसंग का मानना है कि भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम पिछले कुछ सालों में काफी परिपक्व हो चुका है, जिसमें नई कंपनियां बेस्ट टेक्नोलॉजी और सर्विसेज के साथ काम कर रही हैं। स्टार्टअप्स को इस साझेदारी से अपने सॉल्यूशन्स की वैल्यू बढ़ाने में मदद मिलेगी, वहीं सैमसंग को इससे अपने उपभोक्ताओं को बेहतर उत्पाद पेश करने का मौका मिलेगा।




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