पद्म सम्मानों से नवाजी जाएंगी विश्व में ऊंची उड़ान भरने वाली भारत की बेटियां

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खेलों की दुनिया में ऊंची उड़ान भरने वाली बेटियां लंबे समय तिरंगे का मान बुलंद करती आ रही हैं। इस बार केंद्रीय खेल मंत्रालय ने बॉक्सर एमसी मैरी कॉम के अलावा पीवी सिंधू, सुमा शिरूर, रानी रामपाल, हरमनप्रीत कौर, मनिका बत्रा, विनेश फोगाट, ताशी-नुंग्शी बहनों के नाम पद्म सम्मान के लिए प्रस्तावित किए हैं।  

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केंद्रीय खेल मंत्रालय ने इस बार पद्म पुरस्कारों के लिए 11 खिलाड़ियों के नाम प्रस्तावित किए हैं। मंत्रालय ने स्वत: संज्ञान लेते विश्व चैंपियन बॉक्सर एमसी मैरी कॉम का नाम देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण और हाल ही में विश्व चैंपियन बनीं पीवी सिंधू का नाम पद्म भूषण के लिए हुए गृह मंत्रालय को प्रेषित किया है। मैरी यह सम्मान पाने वाली देश की पहली महिला खिलाड़ी हो सकती हैं।


छह बार की विश्व चैंपियन और राज्य सभा सांसद मैरी को 2006 में पद्म श्री और 2013 में पद्म भूषण मिल चुका है, जबकि सिंधू को 2015 में पद्म श्री सम्मानित किया गया था। उल्लेखनीय है कि भारतीय खेल इतिहास में सचिन तेंदुलकर एक अदद ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्हें पद्म विभूषण से नवाजा जा चुका है। वर्ष 2008 में पहली बार माउंट एवरेस्ट छूने वाले न्यूजीलैंड के पर्वतारोही सर एडमंड हिलेरी के साथ उनको यह सम्मान दिया गया था। तब से आज तक खेल मंत्रालय की ओर से पद्म विभूषण के लिए किसी भी खिलाड़ी के नाम की सिफारिश नहीं हुई है। 


विश्व पटल पर खेलों में ऊंची उड़ान भरने वाली देश की गौरव कई और बेटियां जिनके नाम पद्म सम्मान के लिए खेल मंत्रालय को भेजे गए हैं। जिनमें उल्लेखनीय हैं- ओलंपियन शूटर सुमा शिरूर, पर्वतारोही ताशी और नुंग्शी मलिक, हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल, क्रिकेटर हरमनप्रीत कौर, टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा, पहलवान विनेश फोगाट आदि। खेल मंत्रालय ने इस बार पद्म पुरस्कार के लिए कुल 11 खिलाड़ियों के नाम प्रस्तावित किए हैं। इन महिला खिलाडिय़ों के अलावा एशियाई खेलों में दो बार के पदक विजेता और हाल ही में देश को टोकियो ओलंपिक का कोटा दिलाने वाले तीरंदाज तरुणदीप रॉय के अलावा म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली हॉकी टीम के सदस्य एमपी गणेश का नाम भी पद्म श्री के लिए भेजा गया है।





इस बीच भारतीय ओलम्पिक संघ के पदाधिकारी डा. नरिन्दर ध्रुव बत्रा ने कहा है कि भारत अगर 2032 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी के सपने साकार करना चाहता है तो टोकियो ओलंपिक में उसे दोहरे अंक में पदक जीतने होंगे। भारत की ओर से 2026 में युवा ओलम्पिक, 2030  में एशियाई खेलों और 2032 में ओलम्पिक खेलों की मेजबानी के लिए दावेदारी पेश की जा रही है। ऐसे में अगर भारतीय खिलाड़ी ओलम्पिक में ज्यादा पदक जीतने में सफल नहीं रहे तो मेजबानी हासिल करना मुश्किल होगा। लोग कहेंगे की भारत ने ओलम्पिक में काफी कम पदक जीते हैं। भारत को टोक्यो ओलम्पिक में 10 से 12 और 2024  में 25 पदक तथा 2028 के ओलम्पिक में लगभग 40 पदक जीतने होंगे। 


सिर्फ सपने देखने से न तो कोई पहलवान केडी जाधव बन जाता है, न ही कोई मोटा पैसा कमाने वाला मेडलिस्ट बॉक्सर मनोज कुमार हो जाता है। सक्सेसफुल बनने के लिए समझ, लगन और कठोरताओं से बार-बार टकराने की जरूरत होती है। देश को पहला व्यक्तिगत ओलंपिक पदक दिलाने वाले पहलवान केडी जाधव के लिए उनके बेटे रंजीत जाधव ने इस बार पद्म सम्मान से नवाजने की गुहार लगाई है।


उल्लेखनीय है कि वर्ष 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में कांस्य जीतने वाले केडी ने दुनिया में तिरंगे का मान बढ़ाया था। अब बेटे ने उनके मरणोपरांत पद्म भूषण की सिफारिश की है। उनके साथ ही, पैरा एथलीट सुखबीर सिंह, कॉमनवेल्थ गेम्स मेडलिस्ट बॉक्सर मनोज कुमार, अर्जुन अवार्डी पहलवान कृपाशंकर पटेल ने भी पद्म श्री सम्मान के लिए नामांकन अपने नामांकन कराए हैं।





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