शुरू हुआ भारत का सबसे बड़ा तैरता सोलर पावर प्रोजेक्ट, जानिए क्या है खास बातें?

By रविकांत पारीक
July 01, 2022, Updated on : Fri Jul 01 2022 11:31:21 GMT+0000
शुरू हुआ भारत का सबसे बड़ा तैरता सोलर पावर प्रोजेक्ट, जानिए क्या है खास बातें?
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भारत का सबसे बड़ा तैरती सोलर पावर प्रोजेक्ट (India’s largest floating solar power project) अब पूरी तरह से चालू हो गया है. NTPC ने रामागुंडम, तेलंगाना में 100 मेगावाट रामागुंडम तैरते सोलर पीवी प्रोजेक्ट में से 20 मेगावाट की अंतिम भाग क्षमता के वाणिज्यिक संचालन की घोषणा की.


रामागुंडम में 100 मेगावाट की सौर पीवी परियोजना के संचालन के साथ, दक्षिणी क्षेत्र में तैरती सौर क्षमता का कुल वाणिज्यिक संचालन बढ़कर 217 मेगावाट हो गया. इससे पहले, एनटीपीसी ने कायमकुलम (केरल) में 92 मेगावाट तैरती सौर ऊर्जा और सिम्हाद्री (आंध्र प्रदेश) में 25 मेगावाट तैरती सौर ऊर्जा के वाणिज्यिक संचालन की घोषणा की.


रामागुंडम में 100 मेगावाट की तैरती सौर परियोजना उन्नत तकनीक के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल विशेषताओं से संपन्न है. M/s BHEL के माध्यम से EPC (इंजीनियरिंग, खरीद एवं निर्माण) अनुबंध के रूप में 423 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह परियोजना जलाशय के 500 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है. यह परियोजना 40 खंडों में विभाजित हैं और इनमें से प्रत्येक की क्षमता 2.5 मेगावाट है. प्रत्येक खंड में एक तैरता प्लेटफॉर्म और 11,200 सौर मॉड्यूल की एक सारणी होती है. तैरते प्लेटफॉर्म में एक इन्वर्टर, ट्रांसफॉर्मर और एक एचटी ब्रेकर होता है. सौर मॉड्यूल HDPE (उच्च घनत्व पॉलीथीन) सामग्री से निर्मित फ्लोटर्स पर रखे जाते हैं.

indias-largest-floating-solar-power-project-commissioned-ntpc

फोटो क्रेडिट: PIB

तैरते रहने वाली इस फ्लोटिंग सिस्टम को विशेष HMPE (हाई मॉड्यूलस पॉलीइथाइलीन) रस्सी के माध्यम से संतुलित जलाशय क्षेत्र (बैलेंसिंग रिजरवायर बेड) में रखे गए कुल भार तक लंगर डाला जा रहा है. 33 केवी भूमिगत केबल के माध्यम से मौजूदा स्विच यार्ड तक बिजली हटाई जा रही है. यह परियोजना इस मायने में अनूठी है कि इन्वर्टर, ट्रांसफॉर्मर, एचटी पैनल और SCADA (पर्यवेक्षी नियंत्रण और डेटा अधिग्रहण) सहित सभी विद्युत उपकरण भी तैरते फेरो सीमेंट प्लेटफॉर्म पर हैं. इस प्रणाली की एंकरिंग सभी खंडों के कुल भार के जरिए बॉटम एंकरिंग है.


पर्यावरण के दृष्टिकोण से, सबसे स्पष्ट लाभ न्यूनतम भूमि की आवश्यकता है जो ज्यादातर निकासी व्यवस्था से जुड़ा है. इसके अलावा, तैरते हुए सौर पैनलों की उपस्थिति के साथ, जल निकायों से वाष्पीकरण की दर कम हो जाती है और इस प्रकार जल संरक्षण में मदद मिलती है. प्रति वर्ष लगभग 32.5 लाख क्यूबिक मीटर पानी के वाष्पीकरण से बचा जा सकता है. सौर मॉड्यूल के नीचे का जल निकाय उनके परिवेश के तापमान को बनाए रखने में मदद करता है, जिससे उनकी दक्षता और उत्पादन में सुधार होता है. इसी तरह, प्रति वर्ष 1,65,000 टन कोयले की खपत से बचा जा सकता है और प्रति वर्ष 2,10,000 टन के कार्बन डाय ऑक्साइड (Co2) उत्सर्जन से बचा जा सकता है.


(फीचर फोटो क्रेडिट: PIB)