भारत में कश्मीर के विलय की कहानी, 75 साल पहले महाराजा ने कैसे किए थे विलय पत्र पर हस्ताक्षर

By yourstory हिन्दी
October 26, 2022, Updated on : Sat Oct 29 2022 06:50:43 GMT+0000
भारत में कश्मीर के विलय की कहानी, 75 साल पहले महाराजा ने कैसे किए थे विलय पत्र पर हस्ताक्षर
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15 अगस्त 1947 यानी देश की आजादी के समय तक देश में 570 से ज्यादा रियासतें थी. रियासत ऐसे स्टेट थे, जहां अंग्रेजों के अधीन राजा का शासन होता था. 1947 में देश आज़ाद हुआ. ब्रिटिश राज ने सभी मौजूदा रियासतों और राजतंत्रों के सामने पेशकश की थी कि वो भौगोलिक स्थितियों के लिहाज से भारत और पाकिस्तान में से किसी एक में अपना विलय कर लें. इन रियासतों के शासकों को ये फैसला करना था कि वे भारत के साथ जाना चाहते हैं या पाकिस्तान के साथ या फिर आजाद रहना चाहते हैं. 560 रियासतों ने भारत में विलय का फैसला किया. लेकिन जूनागढ़, जम्मू-कश्मीर और हैदराबाद ने इन दोनों में से किसी के भी साथ  नहीं जाने का फैसला किया.


ब्रिटिश शासन के अधीन सबसे बड़ी रियासत जम्मू-कश्मीर की थी. गुलाब सिंह जम्मू-कश्मीर रियासत के पहले राजा थे जिन्होंने डोगरा राजवंश की नींव डाली. आज़ादी के वक़्त जम्मू- कश्मीर के राजा डोगरा वंश के आखिरी शासक महाराजा हरि सिंह थे. हरि सिंह हिंदू थे लेकिन उस समय कश्मीर की ज्यादातर आबादी मुस्लिम थी. हरि सिंह भारत और पाकिस्तान के साथ विलय के बजाय आजाद रहने के पक्ष में थे. मतलब जम्मू और कश्मीर एक स्वतंत्र राज्य के रूप में बना रहे.


सितंबर आते-आते कश्मीर में पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ की शिकायतें आने लगीं. हरि सिंह के साथ बिगड़ते संबंधों और जिन्ना और मुस्लिम लीग के विरोधी शेख अब्दुल्ला की रिहाई और शेख अब्दुल्ला की जवाहर लाल नेहरू से अच्छी दोस्ती की वजह से पाकिस्तान को लगा कि कश्मीर का भारत में विलय हो जाएगा.


22 अक्टूबर को पाकिस्तान के द्वारा भेजे गए हथियारबंद कबायलियों ने जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण कर दिया. पाकिस्तान से आने वाले क़बायली लड़ाकों के आक्रमण ने हरी सिंह के विलय के फ़ैसला को और पुख्ता कर दिया.  अपने राज्य को पाकिस्तानी सेना के आक्रमण से बचाने के लिए महाराजा ने भारत सरकार से मदद मांगी. हरि सिंह 25 अक्टूबर को श्रीनगर से गाड़ियों के काफ़िला के साथ जम्मू पंहुच गए, जहां 26 अक्टूबर को भारत में विलय के लिए संधि पत्र ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ पर दस्तखत कर दिया. कुछ इतिहासकारों का मानना है कि महाराजा ने श्रीनगर छोड़ने से पहले ही काग़ज़ पर दस्तख़त कर दिया था. इसके ठीक बाद अगले दिन ही कबायलियों से लड़ने के लिए भारतीय सेना श्रीनगर पहुंची. इसके साथ ही कश्मीर पर भारत का आधिकारिक कब्जा हो गया. 20 जून 1949 को राजा हरि सिंह को सत्ता से औपचारिक रूप से हटा दिया गया. 


लॉर्ड माउंटबेटन की सलाह पर जवाहर लाल नेहरू ने कश्मीर में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सरक्षा परिषद में उठाया, जिसके तहत 1 जनवरी 1949 को दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम हुआ और दोनों देशों के बीच कश्मीर में सीमा रेखा निर्धारित हुई, जिसे लाइन ऑफ कंट्रोल या LoC कहा जाता है. यानी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर भारत का कब्जा रहा जबकि गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान ने कब्जा बरकरार रखा, जिसे पाक अधिकृत कश्मीर या PoK कहा जाता है. वहीँ, कश्मीर के एक और हिस्से को बाद में पाकिस्तान ने चीन को सौंप दिया था, जिसे चीन अक्साई चीन के नाम से जाना जाता है.



Edited by Prerna Bhardwaj