छंटनी की आंच से बचा हुआ है यह एडटेक प्लेटफॉर्म, भारत के बाद अब विदेश में कमाएगा नाम

By Vishal Jaiswal
August 08, 2022, Updated on : Sat Aug 13 2022 13:44:18 GMT+0000
छंटनी की आंच से बचा हुआ है यह एडटेक प्लेटफॉर्म, भारत के बाद अब विदेश में कमाएगा नाम
जहां देश की दिग्गज एडटेक कंपनियां फंडिंग हासिल करने के लिए संघर्ष कर रही हैं और मार्केट में बने रहने के लिए खर्च में कटौती के साथ बड़े पैमाने पर छंटनी कर रही हैं तो वहीं Jaro Education अब देश से निकलकर अपनी ग्लोबल पहचान बनाने के लिए कमर कस चुकी है.
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देश की पहली एडटेक और सेल्फ फंडेड कंपनी Jaro Education देश की उन गिनी चुनी एडटेक कंपनियों में से है जो कि प्रॉफिट में है और कोविड-19 महामारी के ढलान पर आने के बाद एडटेक मार्केट में आए उतार से बिल्कुल भी प्रभावित नहीं है.


जहां देश की दिग्गज एडटेक कंपनियां फंडिंग हासिल करने के लिए संघर्ष कर रही हैं और मार्केट में बने रहने के लिए खर्च में कटौती के साथ बड़े पैमाने पर छंटनी कर रही हैं तो वहीं Jaro Education अब देश से निकलकर अपनी ग्लोबल पहचान बनाने के लिए कमर कस चुकी है.


जारो एजुकेशन की अब तक की यात्रा और ग्लोबल एक्सपेंशन प्लान पर सीईओ रंजीता रमन ने YourStory के साथ विस्तार से बात की.

Jaro Education क्या है?

जारो एजुकेशन एक ऐसा एडटेक प्लेटफॉर्म है जो कि एजुटेकेटर्स मॉडल पर काम नहीं करता. बल्कि यह यूनिवर्सिटी और स्टूडेंट्स को एक कॉमन प्लेटफॉर्म पर लाने वाला एग्रीगेटर है. जारो यूनिवर्सिटीज और इंस्टीट्यूट्स के साथ मिलकर अपनी मार्केट रिसर्च पेश करता है. इसमें वे बताते हैं कि मार्केट में अभी किन कोर्सेज की डिमांड है.


इस तरह जारो और इंस्टीट्यूट्स के बीच समझौता होने के बाद वे आपसी सहमति से एक प्रोग्राम डिजाइन करते हैं. इसके बाद वे टारगेट मार्केट सिलेक्ट करते हैं. फिर जारो वहां से सारी नॉन अकेडमिक जिम्मेदारियां उठाता है. यह एक एंड-टू-एंड मॉडल है. इसमें जारो इंस्टीट्यूट्स के लिए स्टूडियोज भी तैयार करके देता है. हालांकि, कोर्स की पढ़ाई कराना, सर्टिफिकेट देना और एग्जाम लेने का काम इंस्टीयूट्स करते हैं.


रंजीता रमन ने बताया कि इसमें जारो का रेवेन्यू मॉडल यह है कि वे जिन इंस्टीट्यूट्स के साथ मिलकर काम करते हैं, वे उन्हें भुगतान करती हैं. हर इंस्टीट्यूट्स को वे अलग-अलग सर्विसेज मुहैया कराते हैं और इस हिसाब से उनके लिए उनका रेवेन्यू अलग होता है. जारो स्टूडेंट्स से पैसे नहीं लेता है. स्टूडेंट्स, इंस्टीट्यूट्स को पेमेंट करते हैं.

कैसे हुई शुरुआत?

जारो एजुकेशन की स्थापना साल 2009 में फर्स्ट जनरेशन एंटरप्रेन्योर संजय सालुंखे ने की थी. वह एक मैनेजमेंट ग्रेजुएट हैं और उन्होंने इंजीनियरिंग और लॉ भी किया है. उन्होंने अपना कैरियर एक एचआर के रूप में शुरू किया था. उन्होंने डॉक्टरेट भी किया है.


10 साल तक अमेरिका की कई आईटी कंपनियों में हेड एचआर के रूप में काम करने के बाद उन्होंने एक एंटरप्रेन्योर के रूप में अपना पहला वेंचर शुरू किया था. उनका पहला वेंचर NetHR था जो कि एक रिक्रूटमेंट फर्म है. यह आईटी सर्च के लिए एक टॉप रिक्रूटमेंट फर्म है. इसके क्लाइंट्स में JP Morgan Chase, Morgan Stanley, Goldman Sachs आदि हैं.


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Dr. Sanjay Salunkhe, Founder. (Image: YourStory)

उन्होंने Jaro Education के रूप में 2009 में अपना दूसरा वेंचर शुरू किया था. 2017 में उन्होंने अपना तीसरा वेंचर Jaro Fincap शुरू किया था जो कि माइक्रो फाइनेंशिंग कंपनी है. यह कंपनी वीमेन एंटरप्रेन्योर को अपना बिजनेस स्टार्ट करने के लिए सपोर्ट करती है. 2018 में उन्होंने अपना चौथा वेंचर Toppscholars स्टार्ट किया था जो कि BYJU'S की तरह एक एआई बेस्ड लर्निंग प्लेटफॉर्म है.

Jaro Education का अपस्किलिंग पर फोकस

रंजीता ने बताया कि एक एचआर पर्सन होने के कारण और अमेरिका में स्किल ट्रेंड पर रिसर्च करने के कारण सालुंखे को पता था कि वर्किंग प्रोफेशनल में स्किल गैप कितना अधिक है और उन्हें स्किल डेवलपमेंट की कितनी अधिक आवश्यकता है. उन्होंने यह भी देखा कि जब लोग अप्रेजल के लिए आते थे तब कई बार स्किलिंग में फिट नहीं बैठते थे और प्रमोशन नहीं होने पर वे डिमोटिवेट हो जाते थे.


उन्होंने कहा कि इन सबका ध्यान रखते हुए उन्होंने जब अपना वेंचर स्टार्ट किया तो अपस्किलिंग पर जोर देने का फैसला किया. एक ऐसा प्लेटफॉर्म जहां वे जॉब के साथ अपने आप को अपग्रेड कर पाएं. इसको ध्यान में रखकर उन्होंने जारो एजुकेशन स्टार्ट किया था.

3 लाख से अधिक स्टूडेंट्स को इनरोल किया

रंजीता ने बताया कि हम देश के 30 से अधिक शहरों में काम कर रहे हैं. अभी तक हम कुल 3 लाख स्टूडेंट्स या वर्किंग प्रोफेशनल्स को इनरोल कर चुके हैं. इन्हें देश के टॉप इंस्टीट्यूशंस के साथ डिग्री, डिप्लोमा और अन्य प्रोग्राम्स में इनरोल किया गया है.


उन्होंने कहा कि हमारा स्पेशलाइजेशन डिग्री, डिप्लोमा से लेकर शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म सभी में है. हम करीब 41 डोमेन के प्रोग्राम ऑफर करते हैं. इसमें मैनेजमेंट, टेक्नोलॉजी, टेक्नोफंक्शनल लीडर, लीडरशिप, फिनटेक, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस, एनालिटिक्स, बिजनेस मैनेजमेंट आदि शामिल हैं.

ग्लोबल मार्केट में एक्सपेंशन की तैयारी

रंजीता ने बताया कि पिछले 12-13 वर्षों में हमने अपने आप को बेहद ही मजबूती के साथ स्थापित किया है. हम अभी तक इंडियन पार्टनर्स के साथ काम करते रहे हैं और आगे हमारा लक्ष्य ग्लोबल पार्टनर्स के साथ काम करना है.


उन्होंने कहा कि हमने कुछ ग्लोबल कंपनियों के साथ पार्टनरशिप की है. पिछले महीने हमने सिंगापुर और अमेरिका में अपना ऑफिस खोला है. आगे हमारा प्लान ग्लोबली जाने का है. अब हम आईआईटी और आईआईएम के एजुकेटर्स को हायर करने की तैयारी कर रहे हैं जो कि ग्लोबल इंस्टीट्यूट्स के कोर्सेज को पढ़ाएंगे.


उन्होंने कहा कि फिलहाल हम 28 यूनिवर्सिटीज और इंस्टीट्यूट से अधिक के साथ काम कर रहे हैं. इसमें आईआईएम अहमदाबाद, आईआईएम कोझीकोड, आईआईएम त्रिची, आईआईटी गुवाहाटी, एसआरएम यूनिवर्सिटी, मणिपाल यूनिवर्सिटी, शिव नदार यूनिवर्सिटी शामिल हैं.

कोविड-19 के दौरान एडटेक मार्केट में आया बूम केवल दिखावा था

रंजीता ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान जो बोला गया कि एडटेक मार्केट में उछाल आया, दरअसल हुआ यह था कि ढेर सारी एडटेक कंपनियां मार्केट में आ गई थीं. उन्हें लगा था कि ऑनलाइन ही न्यू नॉर्मल होने वाला है. इन्वेस्टर्स को भी यही लगा कि अब यही भविष्य है और स्कूल, कंपनियां सभी ऑनलाइन हो जाएंगी. इसीलिए इसमें इतना अधिक निवेश किया गया और उछाल देखा और दिखाया गया.


उन्होंने कहा कि हालांकि, हम जानते थे कि ऐसा नहीं होगा. यह प्रैक्टिस लंबे समय तक नहीं चलेगी. इसको लेकर हमारी स्ट्रैटेजी काफी हद तक सफल रही. हम सिर्फ कोविड-19 के कारण नहीं बल्कि वैसे भी अच्छा कर रहे थे. हमारे उछाल का कारण यह था कि हम अलग-अलग तरह के प्रोग्राम्स ऑफर कर रहे थे.


उन्होंने आगे कहा कि वहीं, कोविड-19 के कारण बेरोजगारी बढ़ गई थी. इसके कारण स्किल गैप भी बढ़ गया था. इसको देखते हुए वर्किंग क्लास ने अपस्किलिंग पर फोकस करना शुरू किया और उन्होंने इनरोल करना शुरू कर दिया. इसके साथ ही उछाल का कारण यह भी था कि लोगों में पहले की तुलना में ऑनलाइन की उम्मीद बढ़ गई.

Jaro Education ने नहीं की कोई छंटनी

रंजीता ने कहा कि हमारे पास कोर्स स्टाफ में कुल 1000 लोगों की टीम है. पिछले साल हमने 1000-1200 लोगों को कैंपस से हायर किया था और बाहर से भी 300-400 लोगों की हायरिंग की थी. हम कभी छंटनी नहीं करते हैं. हम लॉन्ग टर्म ग्रोथ के हिसाब से हायरिंग करते हैं. जितने भी लोग गए हैं, वे खुद से गए हैं क्योंकि यह सेल्स की जॉब है और लोगों को लगता है यह प्रेसर का जॉब है, टारगेट ओरिएंटेड है.

FY21-22 में 18-20 करोड़ की प्रॉफिट में रही कंपनी

रंजीता बताती हैं कि पिछले फाइनेंशियल ईयर में हमारा नेट रेवेन्यू 104 करोड़ और ग्रॉस रेवेन्यू 280 करोड़ था. इसमें हमारा प्रॉफिट 18-20 करोड़ रुपये का था. इस साल हमें नेट रेवेन्य के 160 से 180 करोड़ तक जाने और ग्रॉस 350-400 तक जाने की उम्मीद है.

K-12 मार्केट को हाइब्रिड होना चाहिए

रंजीता कहती हैं कि हम एडटेक के K-12 मार्केट को सस्टनेबल नहीं मानते हैं. K-12 में बच्चों को पढ़ाना होता है, जिसमें फिजिकल इंटरैक्शन बेहद इम्पॉर्टेंट होता है. इसमें बच्चों का इंगेजमेंट कम रहता है और फोकस नहीं रहता है. सामने बैठकर पढ़ने में अनुशासन अधिक रहता है. हालांकि, इसमें एक फायदा है कि बच्चों को बेस्ट टीचर्स से पढ़ने का मौका मिलता है.


उन्होंने कहा कि वहीं, हायर एजुकेशन एक मैच्योर मार्केट है. हमारा मानना है कि सभी एडटेक कंपनियां K-12 को हाइब्रिड मॉडल में ही डालें. अब धीरे-धीरे सबको समझ आ रहा है. कंपनियां अब हाइब्रिड में आ रही हैं. पढ़ाई को पूरी तरह से बिजनेस की तरह नहीं देखना चाहिए. केवल पैसे बनाने, वैल्यूएशन करने औऱ मीडिया में बड़ी-बड़ी बातें करने के बजाय उन्हें अच्छे अवसर मुहैया कराने पर ध्यान देना चाहिए.