केरल के 11 साल के लड़के ने छोड़ा प्लेस्टेशन का सपना, ऑनलाइन कक्षाओं के लिए गरीब बच्चों को दान किए टीवी सेट

केरल के 11 साल के लड़के ने छोड़ा प्लेस्टेशन का सपना, ऑनलाइन कक्षाओं के लिए गरीब बच्चों को दान किए टीवी सेट

Tuesday June 23, 2020,

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कोरोनावायरस (COVID-19) महामारी के चलते देशव्यापी लॉकडाउन लागू होने के साथ, देश भर के स्कूल ऑनलाइन क्लासेज देने के लिए तैयार हो रहे हैं। हालांकि, कई छात्र खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी सहायता की कमी के कारण कक्षाएं लेने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।


ऐसे बच्चों की मदद करने के लिए, केरल के एक 11 वर्षीय लड़के ने करुणा और उदारता की मिसाल कायम करते हुए अपने जन्मदिन पर खास तोहफा दिया है।


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मोहम्मद अली, सांसद हिबी एडेन के साथ (फोटो साभार: indiatimes)


एक रिपोर्ट के अनुसार, फोर्ट कोच्चि में द डेल्टा स्टडी के छात्र मुहम्मद अली नाम के लड़के ने अपने जन्मदिन पर तोहफे के तौर पर प्लेस्टेशन की मांग को छोड़ दिया। अली के पिता, अंसिफ अशरफ ने बच्चे के नाम पर एक बैंक खाता खोला था और उसके सपने के प्लेस्टेशन के लिए अलग से पैसे जोड़ना शुरू किया था। लेकिन अली ने अपने पिता से बातचीत के बाद अपना विचार बदल दिया।


रमजान के दौरान, जो लॉकडाउन के बीच में हुआ था, अंसिफ अशरफ गरीबों की मदद के लिए परोपकारी गतिविधियों में शामिल हो गए। तब जिज्ञासु अली ने उनके इस नेक काम के पीछे अपने पिता से उनका उद्देश्य पूछा।


चुलकील, फोर्ट कोच्चि के एक व्यापारी अशरफ ने अली को बताया कि कुछ लोगों के पास खाना खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। इस बात ने अली को झकझोर दिया और उसने कुछ ऐसा करने का फैसला किया, जिससे फर्क पड़ सकता है।


अली के पिता ने बताया,

"एक दिन, मैंने फेसबुक पर सांसद हिबी एडेन के चैलेंज को देखा और अली को सुझाव दिया कि हमें उसके खाते जमा पैसों का उपयोग दान करने के लिए करना चाहिए। अली ने तुरंत हामी भर दी और ऑनलाइन क्लासेज तक नहीं पहुँच पाने वाले गरीब बच्चों की मदद करने का फैसला किया।"

उसके द्वारा लॉन्च किए गए "टैबलेट चैलेंज" का उद्देश्य उन छात्रों को टैबलेट प्रदान करना है जिनके पास गैजेट / लैपटॉप या डेस्कटॉप नहीं हैं।


अली ने बीती 9 जून को अपने जन्मदिन पर गरीब बच्चों को दो टीवी और एक टैबलेट दान दिए। एक और टेलीविजन सेट मौलाना आजाद के सचिव एन के एम शरीफ को सौंप दिया गया।


एनएसएस 2017-18 के अनुसार, देश में केवल 10.7 प्रतिशत परिवारों के पास कंप्यूटर थे, जिनमें ग्रामीण (4.4 प्रतिशत) और शहरी क्षेत्रों (23.4 प्रतिशत) के बीच व्यापक अंतर था। लॉकडाउन के कारण लाखों छात्रों के लिए "सीखने के समय" का बड़ा नुकसान हुआ।


अली ने हमें दिखाया है कि इस तरह के छोटे कितने बड़े बदलाव ला सकते हैं। हम में से कई लोगों के लिए, इंटरनेट एक्सेस होने या कुछ गैजेट्स के मालिक होने से बहुत फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन मौजूदा COVID-19 महामारी की तरह परीक्षण के समय में, जरुरतमंदो की मदद करना जरूरी है



Edited by रविकांत पारीक