देश से दूर रहने पर खत्म नहीं हुआ प्यार, भारत की भलाई के लिए कर रहे काम

By जय प्रकाश जय
June 10, 2019, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:32:07 GMT+0000

देश से दूर रहने पर खत्म नहीं हुआ प्यार, भारत की भलाई के लिए कर रहे काम
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परिवहन कारोबारी जोगिंदर सिंह सलारिया अध्यक्ष के रूप में 'पीसीटी ह्यूमेनिटी' के माध्यम से चैरिटी करते रहते हैं। वह पाकिस्तान के गांवों में 62 हैंडपंप लगवाने, अबू धाबी में सबसे लंबी इफ्तार पार्टी से 'गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड्स' में आने के साथ ही भारतीय लड़कियों के लिए दिल्ली में 'बेटी खेलाओ' प्रोजेक्ट भी लांच कर चुके हैं। 


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जोगिंदर सिंह सलारिया


हमारे देश के कई उद्योगपति, व्यवसायी, कारोबारी ऐसे भी हैं, जो विदेश तो जाते हैं पैसा कमाने के लिए लेकिन उनकी आर्थिक सफलताएं मानव कल्याण की मिसाल बन जाती हैं। हमारे देश में एक दिन ऐसे प्रवासी भारतीयों के लिए भी रखा गया है। भारत सरकार सन् 2003 से हर वर्ष 09 जनवरी को 'प्रवासी भारतीय दिवस' मनाती है क्योंकि इसी दिन महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से स्वदेश वापस आए थे। इस समय दुनिया के 11 देशों में पांच लाख से अधिक प्रवासी भारतीय हैं, जिनमें एक हैं, 1993 में दुबई (संयुक्त अरब अमीरात) में जा बसे जोगिंदर सिंह सलारिया, जो अपने सामाजिक सरोकारों से अक्सर सुर्खियों में आते रहते हैं।


वह कभी सबसे लंबी इफ्तार पार्टी के कारण 'गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड्स' में आ जाते हैं, तो कभी अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर अपने महत्वाकांक्षी खेल प्रोजेक्ट ‘बेटी खेलाओ, देश जिताओ’ लांचकर आधी आबादी का प्रोत्साहन करने लगते हैं। मानवता की सेवा में उनके लिए ऱाष्ट्रों के सीमाएं भी कोई मायने नहीं रखती हैं। जिन दिनो पुलवामा की आतंकी घटना के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था, वह पाकिस्तान के गरीब गांवों में हैंडपंप लगवा रहे थे। वह 'पीसीटी ह्यूमेनिटी' के संस्थापक के रूप में अपने सामाजिक सरोकार साझा करते रहते हैं।


सलारिया की दुबई में 'पहल इंटरनेशनल' कंपनी है। वह परिवहन कारोबार से जुड़े हैं। पुलवामी की आतंकी घटना के बाद जब पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को लेकर भारत में भारी गुस्सा था, जोगिंदर सिंह सलारिया को सोशल मीडिया के जरिए पता चला कि पाकिस्तान के दक्षिण-पूर्व सिंध प्रांत के अत्यंत गरीब इलाके में लोग एक-एक बूंद पानी के लिए बेहाल हैं। पाकिस्तान सरकार वहां की भूखी-प्यासी जनता के हालात पर खामोशी साधे हुए है।


सलारिया को अपने सोर्सेज से पता चला था कि दक्षिण-पूर्व सिंध के उस गांव में रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं, फलो, दूध और सब्जियों के दामों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हो रही है, पेट्रोल डीजल और केरोसीन के दामों में आग लगी हुई है, गांव में अच्छी सड़क नहीं होने से इलाज के लिए लोगों को 50 किलो मीटर का सफर तय करना पड़ रहा है, स्कूल की हालत खस्ता होने से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे वहां के लोगों को पेयजल की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। सलारिया ने वहां के स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से परेशान हाल लोगों को राहत पहुंचाने की सीधी पहल की। वहां के गांवों में करीब 62 हैंडपंप लगवाने के साथ ही उन्होंने अनाज की बोरियां भी भिजवाईं।





जोगिंदर सिंह सलारिया ने अभी हाल ही में रमजान के महीने में 18 मई को अबू धाबी में सबसे लंबा इफ्तार कराने के लिए 'गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड्स' में अपना नाम दर्ज करा लिया। उनकी चैरिटी संस्था 'पीसीटी ह्यूमेनिटी' को वहां 'लॉन्गेस्ट लाइन ऑफ हंगर रिलीफ पेकैज' देने का श्रेय मिला। सलारिया कहते हैं- वह उनके लिए अविश्वसनीय पल रहा। लोगों की जिंदगी बदलने और उनके चेहरे पर मुस्कुराहट लाने का उनका लंबा सफर रहा है। रेकॉर्ड के अलावा, उनका मुख्य लक्ष्य तो लोगों को सेहतमंद रहने के लिए शुद्ध शाकाहारी भोजन देना है और पशुओं को बचाना भी है। उनकी कंपनी 'पहल इंटरनेशनल' के परिसर में रोजाना शाकाहारी इफ्तार आयोजित किए गए।


इससे पहले 08 मार्च 2019 को अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दिल्ली 'पीसीटी ह्यूमेनिटी' की ओर से एक महत्वाकांक्षी खेल प्रोजेक्ट 'बेटी खेलाओ, देश जिताओ' लांच किया गया। इस मौके पर सलारिया ने कहा कि 'अब महिलाएं बड़ी संख्या में व्यापक स्तर पर खेलों में हिस्सा लेकर देश को गौरवन्वित कर रही हैं। उन्ही के कारण पिछले रियो ओलंपिक में भारत को जो दो पदक मिले। इस प्रोजेक्ट के जरिए हम ग्रास रुट स्तर पर खेलों में महिलाओं की और अधिक भागीदारी को बढ़ावा देना चाहते हैं।


हम ग्रामीण क्षेत्रों और समुदायों तक पहुंचकर प्रतिभाओं को विकसित करेंगे। हम समुदायों और सरकारी नीतियों के बीच एक समन्वय स्थापित करेंगे। हम माता पिता को यह बताएंगे कि लड़कियों को घरों से बाहर लाकर खेलों में करियर बनाने के लिए प्रेरित करना देश हित में कितना जरूरी है। लड़कियों को खेलों में आगे लाने के लिए स्कूलों, समुदायों, कॉरपोरेट जगत, राष्ट्रीय महासंघों, राज्य स्तर के संघों, मीडिया और अन्य अंशधारकों को मिलकर काम करना होगा।' इस अवसर पर 'पीसीटी ह्यूमेनिटी' की ओर से महिला खिलाड़ियों और कोचों को 'स्पोर्ट्स एक्सीलेंस अवॉर्ड' भी प्रदान किए गए।