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फेसबुक की मुसीबत दूर करने पर मणिपुर के इंजीनियर को मिले 5,000 डॉलर

जय प्रकाश जय
14th Jun 2019
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यूजर की निजता भंग करने वाला व्हाट्सएप बग ढूंढने निकालने पर मणिपुरी के सिविल इंजीनियर जोनेल सौगैजम को फेसबुक कंपनी ने 3 लाख 47 हजार 250 रुपए का इनाम दिया है। फेसबुक अब तक अपने 'बग बाउंटी प्रोग्राम' के तहत भारतीय शोधकर्ताओं को 4.84 करोड़ का भुगतान कर चुका है।

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पहली फोटो में जोनेल सौगैजम

यूजर की निजता भंग करने वाला व्हाट्सएप बग ढूंढने निकालने पर पेशे से सिविल इंजीनियर मणिपुरी के 22 वर्षीय जोनेल सौगैजम को फेसबुक कंपनी ने 5,000 डॉलर (3,47,250 रुपये) का इनाम देने के साथ ही उन्हे ‘फेसबुक हॉल ऑफ फेम’ में स्थान दिया है। इस साल हॉल ऑफ फेम की 94 लोगों की सूची में सौगैजम को 16वां पायदान मिला है। इस बग के कारण व्हाट्सएप ऑडियो कॉल यूजर ( रिसीवर) की इजाजत के बिना वीडियो कॉल में तब्दील हो रहा था।


जोनेल सौगैजम ने बताया है कि व्हाट्सऐप में इस बग के कारण ऑडियो कॉलिंग के दौरान यूजर्स रिसीवर की इजाजत के बिना वीडियो कॉलिंग पर स्विच कर रहे थे। ऐसे में, वीडियो-ऑडियो कॉलिंग करने पर परेशानी होती थी। सौगैजम ने इस बग को फेसबुक के बग बाउंटी प्रोग्राम के तहत खोज निकाला। तमाम टेक कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स में बग खोजने के लिए बग बाउंटी प्रोग्राम चलाती हैं। व्हाट्सऐप की टेक्निकल टीम ने अब इस बग को फिक्स कर दिया है। फेसबुक ने सौगैजम को प्रेषित अपने ई-मेल संदेश में सौगैजम को अवगत कराया है- 'हमने आपके द्वारा बताए गए बग को चेक किया और सही पाए जाने के बाद आपको 5 हजार डॉलर की राशि से सम्मानित करने का फैसला लिया है।'


दरअसल, सॉफ्यवेयर या हार्डवेयर में बग एक ऐसी खामी होती है, जिसकी वजह से प्रोग्राम ठीक से काम नहीं करता। यह अक्सर सॉफ्टवेयर में उस टकराव की वजह से होता है, जब एक के बाद एक एप्लीकेशन को रन करने की कोशिश का जाती है। इन बग की वजह से सॉफ्टवेयर क्रैश हो सकता है या फिर अनपेक्षित परिणाम देने लगता है। कुछ खामियों की वजह से सिस्टम में अनधिकृत एक्सेस भी संभव रहता है। प्रोग्राम के तहत शोधकर्ताओं को सिक्योरिटी बग और फेसबुक की सेवाओं व आधारभूत ढांचे में खतरे की सूचना देने लिए इनाम दिया जाता है। 2015 में फेसबुक की टीम ने 102 ऐसे बग बाउंटी आवेदनों की पहचान की थी, जिनका प्रभाव सबसे ज्यादा था। यह उससे पहले के मुकाबले 38 प्रतिशत ज्यादा थे। सबसे ज्यादा इनाम हासिल करने वालों में भारत, मिस्त्र और त्रिनिदाद एवं टोबैगो के शोधकर्ता शामिल हैं।


दुनिया का सबसे बड़ा सोशल नेटवर्किंग प्लेटफार्म फेसबुक अक्सर किसी न किसी को इस तरह के पुरस्कार देता रहता है। व्हाट्सएप पर वैसे तो अक्सर नए अपडेट और फीचर्स आते रहते हैं लेकिन दरअसल, इसी साल जनवरी 2019 में मोबाइल ऐप पर एक खतरनाक बग आ गया, जो व्हाट्सएप पर सेव मैसेजेस में घुसकर उन्हें चुपचापा, बिना किसी जानकारी के ऑटोमेटिकली डिलीट करने लगा। जबकि इससे पहले फेसबुक के मालिकाना हक वाली इस ऐप को लेकर एक रिपोर्ट में खुलासा किया जा चुका था कि ये प्राइवेसी के मामले में काफी सेफ है, लेकिन इस बग से यूजर्स के तमाम जरूरी मैसेज डिलीट होने लगे।


यूजर परेशान होने लगे तो फेसबुक कंपनी ने कहा कि उसने इस बग को ठीक करने का काम शुरू कर दिया है। तब कुछ यूजर्स ने ट्विटर पर यह बात शेयर की कि व्हाट्सएप में आया बग उनकी चैट को क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर में डिलीट कर रहे हैं। मतलब पुराने से नए मैसेजेस डिलीट हो रहे हैं। उसके बाद व्हाट्सएप प्रवक्ता की ओर से भी कहा गया कि उन्होंने इस बग को पहचान लिया है और अब इसे हटाने पर काम जारी है लेकिन बग हटाया नहीं जा सका था। अ जाकर मणिपुरी के सौगैजम ने बग ढूंढकर फेसबुक कंपनी की यह मुसीबत दूर कर दी है।


इसी तरह केरल के अनंत कृष्णा ने भी जब व्हाट्सऐप में खलल पैदा कर रहे इसी तरह के एक अन्य बग से पिंड छुड़ाया था तो फेसबुक प्रबंधन ने उन्हे 500 डॉलर का अवॉर्ड दिया था और वह सौगैजम से एक पायदान ऊपर फेसबुक थैंक्स लिस्ट में 80वें नंबर पर आ गए थे। फेसबुक अब तक अपने 'बग बाउंटी प्रोग्राम' के तहत भारतीय शोधकर्ताओं को 4.84 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुका है। 'बग बाउंटी प्रोग्राम' में भाग लेने वाले 127 देशों के शोधकर्ताओं में भारत पहले स्थान पर है। इस कार्यक्रम से जुड़े टेक्नीकल प्रोग्राम मैनेजर एडम रडरमैन ने लिखा है कि 2011 में प्रोग्राम शुरू होने के बाद से ही 'फेसबुक बग बाउंटी प्रोग्राम' में भारत से सबसे ज्यादा सुरक्षा शोधकर्ता हिस्सा लेते रहे हैं।


इसके अलावा सबसे ज्यादा इनामी राशि (4.84 करोड़ रुपये) हासिल करने में भी यह देश शीर्ष पर है। दो साल पहले तक इस प्रोग्राम में 2,400 वैध आवेदन प्राप्त हुए थे और दुनियाभर के 800 से ज्यादा शोधकर्ताओं को 43 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 28 करोड़ रुपये) का इनाम दिया जा चुका था।





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