डिजिटल क्लासरूम के जरिए भारत के 1.96 बिलियन डॉलर वाले ऑनलाइन एजुकेशन मार्केट में सेंध लगा रहा है यह 32 वर्षीय उद्यमी

By Sutrishna Ghosh
January 22, 2020, Updated on : Wed Jan 22 2020 07:31:30 GMT+0000
डिजिटल क्लासरूम के जरिए भारत के 1.96 बिलियन डॉलर वाले ऑनलाइन एजुकेशन मार्केट में सेंध लगा रहा है यह 32 वर्षीय उद्यमी
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32 वर्षीय चिराग आर्य एक ऐसे परिवार से हैं जो कई दशकों से टीचिंग सेक्टर में है। उनकी मां, अनीता आर्य ने दो दशक से अधिक समय तक मुंबई के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय स्कूलों - कैथेड्रल, जॉन कॉनन स्कूल और कैंपियन स्कूल में मैथ पढ़ाया। यह कहना गलत नहीं होगा कि लर्निंग और अकैडमिक उनके डीएनए का हिस्सा रहा है।


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चिराग आर्य, पेपरविडियो के कॉ-फाउंडर



जॉर्जिया टेक, यूएसए से स्नातक, मुंबई के मूल निवासी चिराग ने भारतीय शिक्षा प्रणाली को करीब से देखा है। उन्होंने करीब से देखा है कि भारतीय शिक्षा प्रणाली वर्षों से विकसित हो रही है और कुशल पेशेवरों को पैदा कर रही है। हालांकि फिर भी उनका मानना है कि इस सेक्टर में अभी इतना गैप है कि इसमें कुछ करने के लिए गोता लगाया जा सकता है। 


वे कहते हैं,

"भले ही वर्तमान छात्रों का वातावरण उस वातावरण से पूरी तरह से अलग हो जिसमें मैं बड़ा हुआ था, लेकिन सीखने के तरीके अभी भी समान हैं।" उनका ये कहना गलत नहीं है। शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक, "पिछले 10 वर्षों में हमारी शैक्षिक प्रणाली में संरचनात्मक खामियां केवल गहरी हुई हैं।"


भले ही भारत अधिक से अधिक बच्चों को स्कूल में लाने में कामयाब रहा है, लेकिन रिपोर्ट बताती है कि चुनौती उन्हें शिक्षित करने की है और ये एक ऐसी बाधा है जो सीधे योग्य शिक्षकों की चकाचौंध की कमी से जुड़ी हुई लगती है। शिक्षक-नेतृत्व वाले और छात्र-केंद्रित सीखने के बीच इस अंतर को पाटने के लिए, चिराग ने पेपरविडियो (PaperVideo) की सह-स्थापना की, जो तब सप्लीमेंट्री एजुकेशन के लिए भारत की पहली डिजिटल क्लासरूम थी। इसकी शुरुआत उन्होंने दिसंबर 2017 में अपनी मां अनीता और बहन स्नेहा आर्य के साथ की। दो साल की कठिन रिसर्च, डिसकसन और वर्कशॉप्स से उत्पन्न हुआ उत्पाद, एडटेक प्लेटफॉर्म सितंबर 2019 में लाइव हो गया।


प्रौद्योगिकी के साथ शिक्षण को बदलना

पेपरवीडियो के प्रोग्राम में प्रैक्टिस क्वेश्चन, होमवर्क, टेस्ट, और इलस्ट्रेटिव वीडियो होते हैं जो ऐसे क्वेश्चन को एक्सप्लेन करते हैं जिन्हें छात्रों ने गलत तरीके से करने का प्रयास किया होता है। चिराग बताते हैं कि कक्षाओं की तरह ही, लाइव, शिक्षक के नेतृत्व वाली ऑनलाइन कक्षाएं यहाँ आयोजित की जाती हैं। यूनीक कोर्स एक स्ट्रक्चर्ड और टाइम-टेस्टेड लर्निंग मैथड पर आधारित है। यह 3,000 से अधिक फ्लैशकार्ड, रिमाइंडर और टू-डू लिस्ट में टीचिंग प्रजेंटेशन, डिजिटल बुक्स, वीडियो एक्सप्लेनेशन, 10,000+ होमवर्क और टेस्ट क्वेश्चन, हर क्वेश्चन के लिए स्ट्रेटजी-बेस्ड वीडियो स्पष्टीकरण के माध्यम से छात्रों को एक हॉलिस्टिक डिजिटल क्लासरूम एक्सपीरियंस प्रदान करता है।


लेकिन इसकी सबसे बड़ी यूएसपी, शायद, यह है कि इसके प्रोग्राम टेक्स्ट बुक सिलेबस के अनुरूप होते हैं। इस समय, सप्लीमेंट्री लर्निंग प्लेटफॉर्म में ग्रेड 8 से 12 के लिए मैथमैटिक करिकुलम है, जो सीबीएसई, आईसीएसई, और भारत के सभी राज्य शिक्षा बोर्डों के अनुरूप है। सभी प्रोग्राम्स के सेंटर में, आइडिया सेम रहता है: टेक टूल्स के साथ ट्रेडिशनल मैथेड को अपनाना।


चिराग बताते हैं,

"जैसा कि 'पेपरविडियो' शब्द ही अपने आप में यह दर्शाता है कि हम क्या करने की कोशिश कर रहे हैं - हम कक्षाओं और किताबों (डिजिटल किताबों) की तरह आजमाए गए और टेस्ट किए गए सीखने के तरीकों को बरकरार रखते हुए शिक्षा को बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।"


'स्किल इंजन' के साथ एक्शनेबल इनसाइट

इस प्लेटफॉर्म के पीछे का दिमाग- चिराग, अनीता और स्नेहा आर्या का है। इनके पास इस क्षेत्र में वर्षों का अनुभव और एक अच्छी तरह से जुड़ा हुआ नेटवर्क है। इस क्षेत्र में अपने अनुभव और संसाधनों के माध्यम से उन्होंने सीखा कि क्वालिटी टीचर और करिकुलम की कमी ही वो प्राथमिक कारण हैं जिसके चलते सभी ग्लोबल एजुकेशन इंडेक्स में भारत की रैंकिंग गिरती जा रही है। ग्लोबल मैट्रिक्स पर हाई स्कोर करने का मतलब होगा कि ऑनलाइन रिसोर्सेस के साथ K12 करिकुलम को सप्लीमेंट करना।


केपीएमजी-गूगल की रिपोर्ट के अनुसार, महत्वपूर्ण ऑनलाइन एडॉप्शन की क्षमता वाली एजुकेशन की पांच कैटेगरीज हैं। इन पांच कैटेगरीज में से, जैसा कि यह पता चला है, ऑनलाइन प्राइमरी और सेकेंड्री सप्लीमेंट्री एजुकेशन 2021 तक 39 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ प्रमुख श्रेणी के रूप में अग्रणी है।


2021 तक लगभग 280 मिलियन छात्र स्कूलों में दाखिला लेने वाले हैं। इससे न केवल देश में एक बढ़ते एडटेक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए मंच निर्धारित होता है, बल्कि इस स्पेस के विभिन्न प्लेयर्स के लिए खुद को प्रतियोगिता से अलग करने के लिए भी इसकी आवश्यकता होती है।


लेकिन एक तरह से BYJU’S, Vedantu, और Toppr जैसों के साथ कंपटीशन करने वाला पेपरवीडियो देश के प्रमुख एडटेक खिलाड़ियों के बीच मशीन लर्निंग का उपयोग करके अपना अलग स्थान हासिल कर रहा। 


संस्थाप कहते हैं,

“पेपरवीडियो का 'स्किल इंजन' हर विद्यार्थी की प्रगति को उसकी यात्रा के दौरान समझता और ट्रैक करता है। प्रत्येक ऑनलाइन क्लास, होमवर्क या टेस्ट छात्र की ताकत और कमजोरियों को मैप करता है और प्रत्येक छात्र के लिए व्यक्तिगत सीखने के मार्ग, ऑनलाइन क्लासेस और टेस्ट प्रदान करता है।”


पांच साल का लक्ष्य

वर्तमान में यह मैथ्स करिकुलम के साथ ग्रेड 8-12 तक के ही छात्रों के लिए है, लेकिन आगे बढ़ते हुए इसकी योजना इंडियन K-12 स्कूल सिस्टम में पढ़ाए जाने वाले सभी विषयों को जोड़ने की है। पेपरवीडियो द्वारा डेवलप कार्यक्रमों के दायरे में आईआईटी जेईई, कैट, जीआरई और प्रोफेशनल डेवलपमेंट जैसे डिजिटल मार्केटिंग, मशीन लर्निंग आदि जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं के पाठ्यक्रम भी शामिल किए जाएंगे। पाठ्यक्रम के विस्तार के साथ, चिराग कहते हैं, कुछ कंटेंट और कोर्स भी मोनेटाइज होंगे।


वे कहते हैं,

“हमारी बुक्स, कॉन्सेप्ट वीडियो आदि जैसी अधिकांश फीचर्स फ्री होंगी, लेकिन एडॉप्टिव लर्निंग और लाइव क्लासेस जैसी प्रीमियम सुविधाओं के लिए फी ली जाएंगी। कोर्स के बेस पर इसकी कीमत 2,000 रुपये से 5,000 रुपये के बीच होगी।"


भारत का ऑनलाइन एजुकेशन मार्केट उभरता हुआ मार्केट है, और अगले पांच वर्षों में इसके 8 गुना बढ़ने की संभावना है जो 2021 तक 1.96 बिलियन डॉलर तक पहुंचने जाएगा।


हालांकि सभी के लिए पर्याप्त जगह हो सकती है, लेकिन जिन्होंने पहले शुरू किया है उनके लिए जरूर एडवांटेज है। पेपरवीडियो की संस्थापक टीम का मानना है कि सभी के लिए एक स्पष्ट रोडमैप होना आवश्यक है।


संस्थापक कहते हैं कि उनका उद्देश्य उन्हें अब तक मिले सभी फीडबैक को ध्यान में रखते हुए काम करना है और 1 अप्रैल से पेड कोर्स शुरू करने की दिशा में इसे आगे बढ़ाना, जिसके बाद, सभी की निगाहें इसके रिवेन्यू पर होंगी।


चिराग कहते हैं,

"हम वित्त वर्ष 2021 से रिवेन्यू जनरेट कर रहे हैं।"