बड़े करदाताओं में से करीब 92 प्रतिशत ने 2017-18 के लिये सालाना रिटर्न भरा: जीएसटीएन

By भाषा पीटीआई
February 17, 2020, Updated on : Mon Feb 17 2020 10:33:09 GMT+0000
बड़े करदाताओं में से करीब 92 प्रतिशत ने 2017-18 के लिये सालाना रिटर्न भरा: जीएसटीएन
आंकड़ों के अनुसार पात्र बड़े करदाताओं में से 91.3 प्रतिशत ने 12 फरवरी 2020 तक अपना सालाना रिटर्न दाखिल किया है। इसी प्रकार 92.3 प्रतिशत पात्र बड़े करदाताओं ने इस तारीख तक अपना मिलान ब्योरा भरा है।
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नई दिल्ली, जीएसटी नेटवर्क ने रविवार को कहा कि दो करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाले करीब 92 प्रतिशत बड़े करदाताओं ने 2017-18 के लिये सालाना रिटर्न भर दिया है।


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फोटो क्रेडिट: dailyhunt



माल एवं सेवा कर के एक जुलाई 2017 से लागू होने के बाद यह पहला मौका है जब जीएसटी के तहत पंजीकृत कंपनियों को सालाना रिटर्न जीएसटीआर-9 और मिलान ब्योरा जीएसटीआर-9सी भरना है।


जीएसटीएन ने एक बयान में कहा,

‘‘आंकड़ों के अनुसार पात्र बड़े करदाताओं में से 91.3 प्रतिशत ने 12 फरवरी 2020 तक अपना सालाना रिटर्न दाखिल किया है। इसी प्रकार 92.3 प्रतिशत पात्र बड़े करदाताओं ने इस तारीख तक अपना मिलान ब्योरा भरा है।’’


दो करोड़ रुपये तक के सालाना कारोबार वाले करदाताओं के लिये सालाना रिटर्न फाइल करना वैकल्पिक है। वहीं 2 करोड़ रुपये से अधिक सालाना कारोबार वाली कंपनियों के लिये यह जरूरी है। कुछ करदाताओं को मिलान प्रमाणपत्र भी भरना होता है जिसे जीएसटीआर-9सी के नाम से जाना जाता है। इसे जीएसटीआर-9 भरने के बाद ही भरा जा सकता है।


आंकड़ों के अनुसार दो करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाले करदाताओं की संख्या 12.42 लाख है। यह 92.58 लाख नियमित करदाताओं का केवल 13.4 प्रतिशत है।


इसका मतबल है कि 80.16 लाख करदाताओं को सालाना रिटर्न भरने की जरूरत नहीं है।


हालांकि, जीएसटीएन के आंकड़े के अनुसार 1.04 लाख करदाताओं ने मिलाना ब्योरा भरा है। ये वे करदाता हैं जिनका सालाना कारोबार दो करोड़ रुपये तक है।


जीएसटी के तहत पंजीकृत व्यापारियों द्वारा जिन राज्यों में सर्वाधिक जीएसटी रिटर्न फाइल किये गये हैं, उसमें महाराष्ट्र 96 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर है। उसके बाद क्रमश: राजस्थान और गुजरात (95-95 प्रतिशत) का स्थान है।


जीएसटीआर 9 और 9सी भरने की अंतिम तारीख विभिन्न राज्यों में अलग-अलग थी। यह फीन फरवरी, पांच और सात फरवरी थी।


जीएसटीएन ने कहा कि जिन करदाताओं ने निर्धारित समयसीमा में 2017-18 का रिटर्न फाइल नहीं किया है वे अब भी विलम्ब शुल्क के साथ इसे फाइल कर सकते हैं।


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