MSME एक्सपोर्टर्स को सपोर्ट करने के लिए इंपोर्ट ड्यूटी पर पुनर्विचार करने की ज़रूरत: नीति आयोग

By Ravi Pareek
July 31, 2022, Updated on : Sun Jul 31 2022 14:19:22 GMT+0000
MSME एक्सपोर्टर्स को सपोर्ट करने के लिए इंपोर्ट ड्यूटी पर पुनर्विचार करने की ज़रूरत: नीति आयोग
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Share on
close

नीति आयोग (NITI Aayog) के उपाध्यक्ष सुमन बेरी (Suman Bery) ने कहा है कि भारत को व्यापार घाटे पर इसके परिणाम के बारे में चिंता करने के बजाय निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता (export competitiveness) को बढ़ावा देने के लिए एक आवश्यक रणनीति के रूप में आयात पर विचार करना चाहिए. ये बात बेरी ने हाल ही में मुंबई में MVIRDC World Trade Center (WTC) द्वारा 'India’s Export Competitiveness' पर एक स्टडी जारी करने के लिए आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही.


WTC ने बेरी के हवाले से कहा, “भारत जैसी अपेक्षाकृत खुली अर्थव्यवस्था के लिए, प्रतिस्पर्धात्मकता आयात से जुड़ी हुई है. प्रिसिसन इंजीनियरिंग जैसी कुछ वैल्यू चेन्स में, भारत इंपोर्ट पर निर्भर है. यह व्यापार घाटे को कम करने के लिए आयात पर शुल्क लगाने का प्रलोभन दे रहा है. हालांकि, इंपोर्ट पर टैक्स एक्पोर्ट पर टैक्स है और इसलिए हमारे MSME एक्सपोर्टर्स को सपोर्ट करने के लिए इंपोर्ट ड्यूटी पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है."


कच्चे तेल, कोयला, खाद्य तेल और कीमती धातुओं के आयात बिल में वृद्धि के कारण भारत का व्यापार घाटा अप्रैल-जून 2022 में दोगुना होकर 70.8 बिलियन डॉलर हो गया था, जो एक साल पहले की अवधि में 31.4 बिलियन डॉलर था.


बेरी ने जोर देकर कहा कि भारत को व्यापारिक निर्यात और सेवाओं के निर्यात के बीच अंतर में बहुत कठोर नहीं होना चाहिए क्योंकि माल के निर्यात में भी बहुत सारे सेवा घटक शामिल हैं.


उन्होंने कहा, “विभिन्न डिजिटल पहल जो निर्यात की सुविधा प्रदान करती हैं, माल निर्यात में सेवाओं के अवतार का प्रतिनिधित्व करती हैं. व्यापार सुविधा अपने आप में गहन सेवा है. इसलिए, आपूर्ति श्रृंखला में वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात के बीच स्पष्ट अंतर करना उचित नहीं है. हमें MSME द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं की पहचान करने की जरूरत है जो माल निर्यात में शामिल हैं.”


विजय कलंत्री, अध्यक्ष, MVIRDC WTC मुंबई, ने सरकार को नीति आयोग के तहत एक टास्क फोर्स के लिए सुझाव दिया, जो स्थानीय MSME इकाइयों को पुनर्जीवित करने के लिए है, जो विशेष रूप से प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, व्हाइट गुड्स और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स में आयात से अनुचित प्रतिस्पर्धा के कारण मार्केट में पिछड़ गए थे.


कलंत्री ने कहा, “आयात प्रतिस्थापन पर पुनर्विचार करके आत्मनिर्भर कार्यक्रम के तहत हमारे MSME को पुनर्जीवित करने का यह सही समय है. भारत को लॉजिस्टिक्स की लागत को भी कम करना चाहिए, जो GDP का लगभग 8 प्रतिशत है, जो 6 प्रतिशत से कम है ताकि हम अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें.”


बैनर तस्वीर: Twitter/@NITIAayog