NSE स्कैम में आया बड़ा फैसला, जानिए कैसे एक बाबा के इशारों पर चित्रा रामकृष्ण ने दोनों हाथों से लुटाए पैसे

SAT ने सोमवार को 625 करोड़ रुपये के डिसगॉर्जमेंट ऑर्डर को घटाकर 100 करोड़ रुपये कर दिया है. यह पैसे सेबी के इन्वेस्टर प्रोटेक्शन फंड में जमा किए जाएंगे.

NSE स्कैम में आया बड़ा फैसला, जानिए कैसे एक बाबा के इशारों पर चित्रा रामकृष्ण ने दोनों हाथों से लुटाए पैसे

Tuesday January 24, 2023,

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कुछ महीने पहले ही एनएसई (NSE) का एक बड़ा स्कैम सामने आया था. जी वहां, वही... चित्रा रामकृष्ण वाला मामला, जिसमें हिमालय के योगी बाबा का भी जिक्र हुआ था. उस को-लोकेशन ट्रेडिंग स्कैम केस में एनएसई को 100 करोड़ रुपये का जुर्माना सेबी (SEBI) को चुकाना होगा. इस मामले को लेकर मई 2018 में केस दर्ज किया गया था. SAT यानी सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल ने सोमवार को 625 करोड़ रुपये के डिसगॉर्जमेंट ऑर्डर को घटाकर 100 करोड़ रुपये कर दिया है. यह पैसे सेबी के इन्वेस्टर प्रोटेक्शन फंड में जमा किए जाएंगे. सैट के आदेश में यह भी कहा गया है शेयर बाजार ने को-लोकेशन केस में कोई अवैध कमाई नहीं की है.

2019 में सेबी ने एनएसई और इसकी पूर्व सीईओ चित्रा रामकृष्ण और रवि नारायण के खिलाफ कई आदेश जारी किए थे. सेबी ने एनएसई को इन्वेस्टर फंड में करीब 1100 करोड़ रुपये जमा करने को कहा था. साथ ही सेबी ने अप्रत्यक्ष रूप से एनएसई पर सिक्योरिटीज मार्केट से पैसे जुटाने पर बैन लगा दिया. यह भी कहा गया था कि दोनों को स्कैम के दौरान ली गई सैलरी का 25 फीसदी वापस देना होगा.

जानिए क्या है पूरा मामला?

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के संस्थापक सदस्यों में से एक और एनएसई की पूर्व एमडी-सीईओ चित्रा रामकृष्ण पर बड़े स्कैम का आरोप लगा. को-लोकेशन स्कैम के तहत कुछ खास ब्रोकर्स को शेयर मार्केट का डेटा कुछ सेकेंड पहले मिल जाता था. अगर किसी को मार्केट में उतार-चढ़ाव का डेटा कुछ सेकेंड पहले मिलने से क्या हो सकता है, ये आप समझ ही सकते हैं. पता चला कि चित्रा की तरफ से एनएसई के कई सारे डिसीजन किसी दूसरे शख्स के इशारे पर लिए जाते थे, जिसकी पहचान हिमालय के एक बाबा की तरह सामने आई.

बाबा के साथ शेयर करती थीं सारे बिजनेस सीक्रेट

जैसे ही पता चला कि चित्रा अपने तमाम फैसले एक बाबा के इशारों पर ले रही थीं, लोगों में खलबली सी मच गई. मामले की सीबीआई जांच शुरू हो गई. जब चित्रा से पूछा गया कि ये बाबा कौन है तो उन्होंने कहा कि उस बाबा से वह कभी नहीं मिलीं. उनका दावा था कि वह एक हिमालय में रहने वाले बाबा हैं. बता दें कि करीब 20 सालों से चित्रा और इस बाबा के बीच ईमेल के जरिए कई बिजनेस सीक्रेट्स पर बातें हुई थीं. यानी चित्रा ने एनएसई के कई सीक्रेट उस बाबा से साझा किए थे. वह बाबा मेल पर ही चित्रा को निर्देश देता था और वह उसी के इशारों पर अपने फैसले लिया करती थीं. जब चित्रा से सवाल किया गया कि आखिर हिमालय में रहने वाला बाबा ईमेल आईडी कैसे इस्तेमाल करता है? इस पर चित्रा का जवाब था कि वह एक आध्यामिक बाबा हैं और अपनी आध्यात्मिक शक्तियों से वह ऐसा कर पाते हैं.

बाबा के इशारे पर आनंद सुब्रमण्यम पर लुटाए पैसे

चित्रा रामकृष्ण अप्रैल 2013 से दिसंबर 2016 तक एनएसई की एमडी और सीईओ रही थीं. चित्रा उस बाबा को शिरोमणी कहकर बुलाती थीं, जबकि बाबा उन्हें चितसोम बुलाता था. उसी बाबा के इशारे में चित्रा ने आनंद सुब्रमण्यम को कंपनी में भारी सैलरी पैकेज पर नियुक्त किया था. आनंद का सालाना पैकेज करीब 14 लाख रुपये हुआ करता था, लेकिन 2013 में जब उन्होंने आनंद को चीफ स्ट्रेटेजिक एडवाइजर (CSA) के तौर पर नियुक्त किया तो डेढ़ करोड़ का ऑफर दिया. यह नियुक्ति और भारी-भरकम पैकेज उसी हिमालय के बाबा के इशारे पर दिया गया था. 2-3 साल में आनंद का पैकेज बढ़ते-बढ़ते 5 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा. देखा जाए तो एनएसई के पैसे को चित्रा रामकृष्ण दोनों हाथों से आनंद सुब्रमण्यम पर लुटाए जा रही थीं. ये सब हो रहा था हिमालय के बाबा के इशारे पर.

तमाम मामलों पर जो बातें होती थीं, वह [email protected] ईमेल आईडी के जरिए होती थीं. वह बाबा कंपनी के तमाम डिसीजन, 5 सालों की प्लानिंग समेत हर बात चित्रा से पूछता था और वह बता देती थीं. वही बाबा ये तय करता था कि किस अधिकारी को कौन सी जिम्मेदारी दी जानी है. ऑर्गेनाइजेशन का स्ट्रक्चर और लॉबिंग स्ट्रेटेजी भी वही हिमालय का बाबा तय करता था.

आनंद सुब्रमण्यम पर शक की सुई

जब सीबीआई ने जांच की तो पता चला कि anand.subramanian9 और sironmani.10 अकाउंट आनंद के एनएसई वाले डेस्कटॉप में स्काइप एप्लिकेशन के डेटाबेस से जुड़े हुए थे. इतना ही नहीं [email protected] ईमेल आईडी और सुब्रमण्यम के मोबाइल नंबर भी जुड़े पाए गए. ऐसे में शक की सुई आनंद सुब्रमण्यम पर भी लटक रही है. सवाल उठ रहा है कि कहीं यही तो वो हिमालय वाला बाबा नहीं? हालांकि, एक सवाल ये भी है कि अगर ऐसा होता तो वो बाबा कंपनी के प्लान्स आदि के बारे में क्यों पूछता, क्योंकि सुब्रमण्यम तो कंपनी की डिसीजन कमेटी का ही हिस्सा था. हालांकि, चित्रा रामकृष्ण कहती हैं कि वह बाबा आनंद सुब्रमण्यम नहीं हैं. इस रहस्यमयी बाबा का आज तक कोई पता नहीं चला है.

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