बाल विवाह के चलते घर से भागीं, बोर्ड एग्जाम में हासिल किए 90 प्रतिशत अंक

लखनऊ के तुषार ने पैरों से लिखकर बोर्ड परीक्षा में फर्स्ट क्लास पा लिया तो कर्नाटक की रेखा ने घर वालों की बचपन में ही उसकी शादी रचा देने की साजिशों को ठोकर मारते हुए बेंगलुरू के गवर्नमेंट पीयू कॉलेज में नब्बे प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल कर लिए।

बाल विवाह के चलते घर से भागीं, बोर्ड एग्जाम में हासिल किए 90 प्रतिशत अंक

Monday April 29, 2019,

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तुषार और रेखा

कोई भी, जो अपने सपने खुद बुनता ही नहीं, उड़ान मोकम्मल करने के हौसले भी रखता है, कामयाबी जरूर उसके कदम चूम लेती है। चुनौतीपूर्ण हालात में परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाने की दो ऐसी मिसालें सामने आई हैं, जिन्हे जान-सुनकर कोई भी अचंभित हो सकता है। एक हैं तपोवन नगर (लखनऊ) के दसंवीं के श्रमसाध्य मेधावी तुषार विश्वकर्मा और दूसरी हैं चिक्काबल्लापुर (कर्नाटक) की रेखा वी। एक को पैरों से प्रश्नपत्र हल कर परीक्षा में प्रथम श्रेणी मिली तो दूसरी ने घरवालों की बाल वधू बनाने की साजिश को ठोकर मारकर प्री यूनिवर्सिटी परीक्षा में नब्बे प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल कर लिए। अब दोनो के लिए लोगों के मुंह से अनायास शाबाशी और बधाइयां मिल रही हैं।


क्रिएटिव कॉन्वेंट स्कूल (लखनऊ) के छात्र तुषार विश्वकर्मा के दोनो हाथ पोलियो से निःशक्त हो चुके हैं। तुषार के पिता राजेश विश्वकर्मा बताते हैं कि बचपन में जब तुषार ने स्कूल जाने की जिद की तो उन्हें विचार आया कि क्यों न वह उसे पैरों से ही लिखना सिखाएं। इसके बाद उसे लगातार अभ्यास कराया गया। वह खुद पर पूरी तरह से निर्भर है। अब तो तुषार हाईस्कूल परीक्षा में 67 फीसदी नंबरों से पढ़ाई में ही अव्वल नहीं, बल्ले से चौके-छक्के भी लगा लेते हैं। वह गिल्ली-डंडा भी खेल लेते हैं। अपने लगभग सारे कामकाज खुद ही कर लेते हैं। स्कूल में सहपाठी भी हर तरह की मदद करते हैं। वैसे वह किसी पर आश्रित होने से भरसक बचने का प्रयास करते हैं। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों से लड़ना सीख लिया है। अपनी कक्षा में तुषार हैंड राइटिंग में भी सबसे अव्वल हैं। उनके पिता मौरंग-बालू के कारोबारी हैं और मां गृहणी। तुषार की बड़ी बहन सोनी बीकॉम की पढ़ाई कर रही है जबकि भाई विशाल 12वीं में हैं। पढ़ाई पूरी कर तुषार इंजीनियर बनना चाहते हैं।


चिक्काबल्लापुर (कर्नाटक) के एक गांव की रेखा वी पर जब उनकी मां ने कम उम्र में ही शादी के लिए दबाव डाला तो एक दिन चुपके से वह अपने दोस्तों के साथ बेंगलुरू भाग गईं। तब तक उनकी उम्र अठारह साल की हो चुकी थी। उन्होंने हेब्बल में एक कंप्यूटर ट्रेनिंग ज्वॉइन कर लिया। उसके बाद अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर मदद मांगी। नीलमंगला के एक गवर्नमेंट पीयू कॉलेज में एडमिशन मिल गया। रेखा की प्रतिभा रंग लाई और कॉलेज में 600 में से 542 मार्क्स मिले इतिहास में तो शत प्रतिशत अंक मिल गए।


इस समय वह इतिहास, अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में बीए कर रही हैं। रेखा अब वकील बनने के बाद आगे सिविल सर्विसेज परीक्षा में बैठना चाहती हैं। वह कहती हैं कि वह जब बच्ची थीं, तभी पिताजी का निधन हो गया। घर वाले कम उम्र में ही उनकी शादी कराना चाहते थे। वह इसके खिलाफ थीं। वह अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती थीं। अब उनकी जिंदगी का एक ही लक्ष्य है, पहले वकील बनें, फिर सिविल सर्विसेज परीक्षा में बैठें।


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