9 साल की उम्र में Guinness से हॉलीवुड तक का सफर, संगीत और हौसले के सुरों से सजी Parv Thacker की कहानी
9 साल के पर्व ठक्कर ने क्लबफुट को मात देकर संगीत की दुनिया में अपनी खास पहचान बनाई है. Guinness World Record के बाद Global Music Awards 2026 जीतने और HIMA नॉमिनेशन तक उनका सफर हौसले, संगीत और सामाजिक जागरूकता की कहानी है.
कच्छ, गुजरात के नौ साल के पर्व ठक्कर (Parv Thacker) के लिए संगीत के मायने सिर्फ गाना गाने या स्टेज पर परफॉर्म करना नहीं है. संगीत उनके बचपन का हिस्सा रहा है और मुश्किल समय में उनका साथ भी देता रहा है.
पर्व का जन्म bilateral clubfoot के साथ हुआ था. बचपन के शुरुआती साल इलाज, अस्पतालों के चक्कर और लगातार उपचार के बीच बीते. इस दौरान उनका परिवार उनके साथ खड़ा रहा और संगीत धीरे-धीरे उनकी जिंदगी में एक खास जगह बनाता गया.
बहुत छोटी उम्र में पर्व ने गाने रिकॉर्ड करने शुरू कर दिए. उन्होंने स्टेज पर परफॉर्म किया और क्लबफुट को लेकर जागरूकता फैलाने वाले अभियानों से भी जुड़े. 2025 में उन्हें Guinness World Records ने सबसे कम उम्र के पुरुष गायक के तौर पर मान्यता दी. इसके बाद उनके संगीत ने GRAMMY Awards की समीक्षा प्रक्रिया तक जगह बनाई और 2026 में Hollywood Independent Music Awards (HIMA) में उन्हें वर्ल्ड म्यूजिक कैटेगरी में नामांकन भी मिला. पर्व को Global Music Awards 2026 में सम्मानित किया गया. उनके लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही, क्योंकि यह उनकी संगीत यात्रा और लगातार हो रही रचनात्मक कोशिशों की अंतरराष्ट्रीय पहचान थी.
लेकिन पर्व से बात करने पर उनकी उपलब्धियों से ज्यादा उनकी सीखने की ललक, परिवार के प्रति लगाव और दूसरों के लिए कुछ करने की इच्छा सामने आती है. उनके लिए संगीत सिर्फ पहचान बनाने का जरिया नहीं, बल्कि अपनी आवाज का इस्तेमाल किसी अच्छे काम के लिए करने की जिम्मेदारी भी है.
क्लबफुट से शुरू हुई कहानी, संगीत बना साथी
पर्व का जन्म bilateral clubfoot के साथ हुआ था. बचपन का एक लंबा हिस्सा इलाज और अस्पतालों के चक्कर में बीता. प्लास्टर और उपचार उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहे. यह सफर उनके लिए आसान नहीं था. लेकिन उनके परिवार ने कभी उन्हें इस चुनौती तक सीमित नहीं रहने दिया. उन्होंने पर्व को आगे बढ़ने, अपने हुनर को पहचानने और अपने सपनों पर भरोसा करना सिखाया.
घर में संगीत के साथ भारतीय संस्कृति की कहानियां, भगवद्गीता और रामायण से जुड़े प्रसंग भी उनकी परवरिश का हिस्सा रहे. उनके पिता डॉ. कृपेश ठक्कर गायक, गीतकार, लेखक, संगीत चिकित्सक, शिक्षक और फिल्म निर्देशक हैं. मां डॉ. पूजा ठक्कर आयुर्वेदिक चिकित्सक और स्तंभकार हैं. उनकी बहन वाचा ठक्कर भी गायिका और लेखिका हैं.
परिवार के सभी सदस्य मिलकर Parv Fusion Band के साथ प्रस्तुति देते हैं. पर्व के मुताबिक, उनके घर में संगीत किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार के साथ सीखने और करने की प्रक्रिया है.
YourStory से बात करते हुए पर्व बताते हैं, “मैं ऐसा नहीं कह सकता कि मुझे संगीत कब पसंद आने लगा, क्योंकि मुझे याद ही नहीं कि मेरे जीवन में संगीत के बिना कोई समय था. मैंने बहुत छोटी उम्र से गाना शुरू कर दिया था. धीरे-धीरे मुझे महसूस हुआ कि मेरे गाने लोगों तक पहुंच रहे हैं और कुछ लोगों को हिम्मत दे रहे हैं. तभी मुझे लगा कि संगीत केवल प्रदर्शन नहीं है.”

परिवार बना पहला स्कूल
पर्व पांचवीं कक्षा में पढ़ रहे हैं. उनकी पढ़ाई और संगीत दो अलग रास्ते नहीं हैं. उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत में गायन, हारमोनियम और कीबोर्ड की तीन साल की शिक्षा ली है. भारतीय संस्कृति, भगवद्गीता और रामायण से जुड़े विषयों को भी समझते हैं.
उनके लिए यात्राएं और प्रस्तुतियां भी सीखने का माध्यम हैं. पिता उन्हें संगीत और रचनात्मकता सिखाते हैं. मां अनुशासन और देखभाल पर ध्यान देती हैं. बहन वाचा उनके साथ रचनात्मक काम करती हैं. दादा-दादी उन्हें प्रार्थना और परंपराओं से जोड़ते हैं.
पर्व कहते हैं, “मेरे लिए परिवार ही मेरा पहला स्कूल है. पापा मुझे संगीत और रचनात्मकता सिखाते हैं. मां मुझे अनुशासन और देखभाल समझाती हैं. वाचा दीदी मेरे साथ शुरू से गाती और कुछ नया करती रही हैं. मेरे दादा-दादी मुझे प्रार्थना करना और भगवान के प्रति आभार रखना सिखाते हैं.”
Guinness से GRAMMY तक का सफर
पर्व का पहला एल्बम तब जारी हुआ, जब उनकी उम्र सिर्फ एक साल और 342 दिन थी. उस समय उन्हें इस उपलब्धि का अर्थ समझने की उम्र नहीं थी. 2025 में Guinness World Records की आधिकारिक मान्यता मिलने के समय वह आठ साल के थे.
उनके संगीत से जुड़े काम को गुजरात के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और शिक्षा मंत्री से भी सराहना मिल चुकी है.
उनका संगीत Global Clubfoot Awareness Parv और Music Therapy for All जैसे प्रयासों से जुड़ा रहा है. 2026 में Global Music Awards में उनके एल्बम Sounds of Sanatan: Vol. 1 को भी अवार्ड मिला. उनकी बचपन की आवाज में रिकॉर्ड किया गया “Jai Shri Ram” आगे चलकर Resonant Roar of Hanuman का हिस्सा बना, जिसे The Clubfoot Anthem के नाम से भी जाना जाता है.
पर्व कहते हैं कि पुरस्कार उनके लिए मंजिल नहीं हैं. “पापा हमेशा कहते हैं कि पुरस्कार को मंजिल मत समझो. असली काम यह है कि हम सीखते रहें और ईमानदारी से अपना काम करते रहें.”
संगीत के साथ सामाजिक सरोकार
पर्व की कहानी में संगीत और सामाजिक जागरूकता साथ-साथ चलते हैं. क्लबफुट के इलाज के दौरान परिवार के अनुभवों ने उन्हें दूसरे बच्चों और उनके परिवारों के लिए जागरूकता फैलाने की दिशा में काम करने की प्रेरणा दी.
यह प्रयास आगे Give Vacha Foundation, Music Therapy for All और Awareness Through Arts जैसे अभियानों से जुड़े. पर्व का जन्मदिन 7 मई Global Clubfoot Day के रूप में भी मनाया जाता है.
पर्व चाहते हैं कि उनकी कहानी किसी ऐसे बच्चे तक पहुंचे, जो खुद को किसी चुनौती से घिरा हुआ महसूस करता हो. इसी सोच से प्रेरित फिल्म मैन भी अर्जुन: पर्व भी उनके जीवन से जुड़ी है. इसका संदेश केवल उनकी कहानी तक सीमित नहीं है.
पर्व कहते हैं, “मैं चाहता हूं कि मैं भी अर्जुन: पर्व के जरिए लोग यह समझें कि हर व्यक्ति की अपनी लड़ाई होती है. जरूरी यह है कि हम डरकर रुकें नहीं और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहें.”

HIMA नॉमिनेशन और आगे की राह
अब पर्व की यात्रा Hollywood Independent Music Awards (HIMA) तक पहुंच चुकी है. HIMA 2026 में उन्हें वर्ल्ड म्यूजिक कैटेगरी में नामांकन मिला है. उनके लिए यह खास है क्योंकि Resonant Roar of Hanuman जैसी रचना क्लबफुट जागरूकता से जुड़ी उनकी कहानी का हिस्सा रही है.
आगे पर्व का ध्यान तीन फिल्मों Main Bhi Arjun: Parv, Tiny Steps Take Giant Leaps और Nanakda Pagla Bhare Haranfal पर है. इसके साथ Parv Fusion Band के साथ प्रस्तुतियां और नए संगीत पर काम जारी है. GRAMMY Awards की प्रक्रिया से जुड़े प्रोजेक्ट भी उनकी यात्रा का हिस्सा हैं.
पर्व के लिए यह सफर अभी शुरुआती दौर में है. कम उम्र में मिली पहचान के बावजूद वह खुद को सीखने वाला बच्चा मानते हैं. संगीत उन्हें परिवार से मिला, चुनौतियों ने धैर्य सिखाया और सामाजिक काम ने उसे एक उद्देश्य दिया.
उनकी कहानी का महत्व किसी एक रिकॉर्ड या नामांकन से आगे जाता है. यह दिखाती है कि किसी बच्चे की शुरुआत चाहे जितनी चुनौतीपूर्ण हो, उसके सपनों की दिशा तय नहीं होती. पर्व इसे अपने शब्दों में कहते हैं, “एक उपलब्धि के बाद यात्रा खत्म नहीं होती. मैं अभी सीखना चाहता हूं, गाना चाहता हूं, प्रस्तुति देना चाहता हूं और अभिनय भी करना चाहता हूं.”
पर्व की कहानी का संदेश यही है: अपनी परिस्थितियों से पहचान तय नहीं होने दें. सीखते रहें, अपने पसंद के काम को ईमानदारी से करते रहें और आगे बढ़ते रहें. उनके लिए यही है, “Rise Like Arjun.”



