लाइफ स्टाइल का ईको सिस्टम तैयार करने में जुटी कंपनी पेटीएम

By जय प्रकाश जय
July 19, 2019, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:33:06 GMT+0000
लाइफ स्टाइल का ईको सिस्टम तैयार करने में जुटी कंपनी पेटीएम
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आने वाले कुछ वर्षों में परिधान और लाइफस्टाइल उत्पादों का घरेलू बाजार 160 बिलियन डॉलर का हो जाने की संभावना है। पिछले कुछ समय में लाइफस्टाइल स्टॉक्स में अच्छी खासी बढ़ोत्तरी हुई है। बाज़ार के इस ताज़ा हालात के ही मद्देनजर अब पेटीएम भी लाइफस्टाइल पर अपना ध्यान फोकस करने जा रही है।

 


Vijay Shekhar Sharma

पेटीएम फाउंडर विजय शेखर शर्मा



परिधान और लाइफस्टाइल उत्पादों का घरेलू बाजार इस समय लगभग कुल 85 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसके 2025 तक 160 बिलियन डॉलर का हो जाने की संभावना है। तलवल्कर्स बेटर वैल्यू फिटनेस, स्पेसिलिटी रेस्टोरेंट्स, जुबिलेंट फूडवर्क्स, महिंद्रा हॉलिडेज, पीवीआर और जायडस वेलनेस जैसे लाइफस्टाइल स्टॉक्स पिछले कुछ समय में अच्छे खासे बढ़े हैं।


यही वजह है कि ई-कॉमर्स नेटवर्क की भरमार के बावजूद हर शहर में ऐसे बाज़ार आजकल खरीददारों से भरे पड़े हैं। इसी के चलते इनवेस्टर्स ने डिस्क्रीशनरी कंजम्पशन में बढ़ोतरी की उम्मीद पर ऐसी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ा दी है। इसी उम्मीद में पेटीएम के विजय शेखर शर्मा भी अब अपना सारा ध्यान लाइफस्टाइल पर फोकस किए हुए ई-कॉमर्स में अपनी कंपनी की उपस्थिति घटाने लगे हैं। विजय शेखर शर्मा को उम्‍मीद है कि आने वाले कुछ वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था 5,000 अरब डॉलर की हो जाएगी।


एक ताज़ा जानकारी के मुताबिक, पेटीएम कंपनी लोगों को लाइफस्टाइल और वित्तीय सेवा देने के लिए ईको सिस्टम तैयार करने में जुटी है। कंपनी के संस्थापक विजय शेखर कहते हैं कि हम गेमिंग और वीडियो कंटेंट भी तैयार कर रहे हैं। उनकी कंपनी कॉमर्स में टिकट, यात्रा, ऑनलाइन टू ऑफलाइन और विज्ञापन में डील, बैनर्स और वीडियो विज्ञापन शामिल कर रही है। साथ ही उनकी कंपनी ने ग्राहकों के ट्रांजेक्शन डेटा की मदद से बैंकिंग, लोन और वेल्थ मैनेजमेंट जैसी फिनटेक सेवाएं शुरू कर दी हैं। ऑनलाइन मॉडल के लिए पैसे जुटाने की रणनीति बना रहे हैं। पहले हमारी अभी तक कंपनी की टीम वेयरहाउस मॉडल बनाने में जुटी थी, अब उसका फोकस शॉपकीपर मॉडल पर है। अपना पूंजी प्रवाह बरकरार रखने के लिए उनकी कंपनी ने क्लिक्स कैपिटल और टाटा कैपिटल के साथ साझेदारी भी की है। 

वैसे तो आजकल हर चीज हर जगह मिल जाती है लेकिन हर शहर में कुछ जगहें शॉपिंग सेंटर बन जाती हैं। जैसे मुंबई में दादर मार्केट, बान्द्रा, लिंकिंग रोड, फैशन स्ट्रीट, क्रॉफर्ड मार्केट, वाशी और दिल्ली में लाजपत नगर, सरोजनी नगर, पुरानी दिल्ली, ग्रेटर कैलाश, तिलक नगर आदि शॉपिंग के गढ़ बन गए हैं। रेडीमेड कपड़े, इलैक्ट्रिकल्स एंड इलैक्ट्रॉनिक्स के सामान, जूते-चप्पलें, ट्रैवेल सर्विसेज़, घड़ियाँ, मोबाइल फोन, खाने-पीने की बेशुमार दुकानें खुलती जा रही हैं। खरीदार अपनी लाइफस्टाइल बेहतर बनाने के लिए, साल के बारहों महीने खास तौर से लाइफ स्टाइल उत्पादों से अटीं दुकानों से जमकर खरीददारी करने लगे हैं। 



लाइफ स्टाइल उत्पादों के क्षेत्र में पेटीएम के उतरने की एक बुनियादी वजह ये भी हो सकती है। इनवेस्टर्स को लग रहा है कि इकनॉमिक ग्रोथ में रिकवरी होने पर इस क्षेत्र में कंज्यूमर की डिमांड में और अधिक तेजी आ सकती है। गौरतलब है कि अभी पिछले ही साल कोरियन डिजाइनर लाइफस्टाइल कंपनी बेकोज भारतीय बाजार में प्रवेश करते हुए 100 करोड़ रुपए के निवेश से 50 आउटलेट शुरू करने की घोषणा के साथ दिल्ली के कमला नगर में अपने पहले एक्सक्लुसिव स्टोर से भारतीय बाजार में प्रवेश किया है। मौजूदा वित्त वर्ष में वह 250 करोड़ रुपए के कारोबार का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके उत्पादों में कॉस्मेटिक्स, फैशन एवं मोबाइल एक्सेसरीज, लगेज, होम डेकोर, स्टेशनरी, बेबी उत्पाद शामिल हैं।


लाइफ स्टाइल उत्पाद वाली कंपनियों के साथ बाजार के ताज़ा रुझान की कुछ जमीनी हकीकतें हैं, जो नए जमाने में हर किसी को चौंका रही हैं। मेकअप की डिमांड को देखते हुए कॉस्मेटिक कंपनियां अब बच्चों तक को टार्गेट करने लगी हैं। ये कंपनियां 4 से 10 साल की बच्चियों के लिए ब्यूटी प्रोडक्ट से लेकर स्पा की सर्विसेज दे रही हैं। बच्चों के लिए ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने वाली शुशु कॉस्मेटिक कंपनी का दावा है कि वह बच्चों के लिए हेल्दी कॉस्मेटिक उपलब्ध करा रही है, मसलन, पानी में घुलने वाली नेल पॉलिश, फैंसी गर्ल साबुन, बकरी के दूध से बने शैम्पू, नॉन-टॉक्सिक लिप कलर आदि।


पूरी दुनिया में बच्चियों में खूबसूरत दिखने की दीवानगी इस कदर बढ़ी है कि वे अपने यूट्यूब चैनल पर मेकअप ट्रिक शेयर करने लगे हैं। सौंदर्य प्रसाधनों के सबसे बड़े बाजार वाले दक्षिण कोरिया में ही कॉस्मेटिक सर्जरी दर सबसे ज्यादा है। एनालिस्ट्स को लगता है कि जीडीपी ग्रोथ में बढ़ोतरी होने पर ऐसी कंपनियों के परफॉर्मेंस में सुधार आ सकता है।