SEC के लगाए आरोपों पर रेलवे मंत्रालय ने Oracle के खिलाफ शुरू की अपनी जांच

By Rajat Pandey
October 10, 2022, Updated on : Mon Oct 10 2022 06:48:01 GMT+0000
SEC के लगाए आरोपों पर रेलवे मंत्रालय ने Oracle के खिलाफ शुरू की अपनी जांच
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रेल मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान से मिली जानकारी के अनुसार रेलवे ने मल्टीनेशनल टेक्नोलॉजी फर्म ओरेकल (Oracle) के खिलाफ घूसखोरी के आरोपों की जांच शुरू कर दी है. अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (US Securities and Exchange Commission) ने अपने एक आदेश में बताया कि 2019 में रेलवे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (State owned Enterprise) के अधिकारियों को प्रौद्योगिकी फर्म Oracle की भारतीय शाखा द्वारा लगभग 400,000 डॉलर की रिश्वत दी गई थी. इस जानकारी के बाद रेलवे की ओर से इस पूरे प्रकरण की जांच शुरू करदी गई है.


अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) ने ओरेकल पर विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम (FCPA) के उल्लंघन कर संयुक्त अरब अमीरात, भारत और तुर्की में विदेशी अधिकारियों को रिश्वत देने के $23 मिलियन का जुर्माना लगाया है.


रेल मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, अब तक इस जांच के प्राथमिक लक्ष्य के रूप में किसी समयरेखा (Timeline) या एसोई (State owned Enterprise) की पहचान नहीं की गई है. मंत्रालय ने ओरेकल और एसईसी (SEC) से भी संपर्क किया है और उनसे एसओई और रिश्वत लेने वाले अधिकारियों के नाम साझा करने को कहा है.


27 सितंबर के एक आदेश में अमेरिकी नियामक ने कहा कि ओरेकल इंडिया के कर्मचारियों ने 2019 में रेल मंत्रालय के स्वामित्व वाली एक परिवहन कंपनी के साथ लेनदेन के संबंध में "अत्यधिक छूट योजना" (excessive discount scheme) का इस्तेमाल किया था.


एसईसी (SEC) ने अपने एक आदेश में कहा कि, "ओरेकल इंडिया के सेल्स कर्मचारियों ने एक परिवहन कंपनी के साथ लेनदेन के संबंध में अत्यधिक छूट योजना (excessive discount scheme) का इस्तेमाल किया. इस परिवाहन कंपनी का अधिकांश स्वामित्व भारतीय रेल मंत्रालय (Indian SOE) के पास था है.


एसईसी (SEC) के आदेश के अनुसार, जनवरी 2019 में ओरेकल इंडिया के सेल्स कर्मचारियों ने दावा किया था कि डील के सॉफ्टवेयर घटक पर 70 प्रतिशत की छूट के बिना डील हांथ से निकल जाएगी. यह दावा कड़ी प्रतिस्पर्धा का हवाला देते हुए किया गया था.


कंपनी को डिस्काउंट को मंजूर करवाने के लिए  फ्रांस-आधारित कर्मचारी से मंजूरी की जरुरत थी. कर्मचारी ने बिना किसी दस्तावेजी मांग के डिस्काउंट को मंजूरी दे दी. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारतीय एसओई की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध खरीद वेबसाइट ने संकेत दिया कि ओरेकल इंडिया की कोई प्रतिस्पर्धा (Competition) नहीं थी, क्योंकि इसने परियोजना के लिए ओरेकल उत्पादों के उपयोग को अनिवार्य कर दिया था.


एसईसी(SEC) ने अपने एक आदेश में कहा कि लेन-देन में शामिल सेल्स कर्मचारियों में से एक ने एक स्प्रेडशीट बनाई थी, जिसमें संकेत दिया गया था कि एक विशिष्ट भारतीय एसओई(SOE) अधिकारी को संभावित रूप से भुगतान करने के लिए $ 67,000 का 'बफर' उपलब्ध है.