बच्चों को भीख मांगने से रोकने के लिए शुरू किया NGO, आज सैनिक भाइयों की कलाई पर सज रही हैं इनकी राखियां

By Vishal Jaiswal
August 11, 2022, Updated on : Thu Aug 11 2022 05:59:39 GMT+0000
बच्चों को भीख मांगने से रोकने के लिए शुरू किया NGO, आज सैनिक भाइयों की कलाई पर सज रही हैं इनकी राखियां
एनजीओ के फाउंडर अजय ओली ने साल 2014 में इस सोसायटी को स्टार्ट किया था. उनका उद्देश्य था कि बच्चों को आजीविका से जोड़ सकें और वे भीग मांगने का काम न करें. लखनऊ से एमबीए करने के बाद उन्होंने इसकी शुरुआत लखनऊ से ही की थी.
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आज रक्षाबंधन का त्यौहार है और पूरे देश में इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर अपना प्यार और अपनापन जता रही हैं. हालांकि, हमारे देश की सीमाओं पर तैनात कई जवानों की कलाई अक्सर सूनी रह जाती है. लेकिन एक एनजीओ ऐसा भी है, जो न केवल जवानों की कलाई तक राखियां पहुंचा रहा है बल्कि गरीब, बेसहारा बच्चों के जीवन को संवार भी रहा है.


यह एनजीओ है उत्तराखंड स्थित घनश्यान ओली चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी (Ghanshyam Oli Child Welfare Society). पिछले 7 सालों से एनजीओ, बच्चों द्वारा बनाई जाने वाली राखियों को देश की सेवा में तैनात जवानों को भिजवाता है.

कैसे हुई शुरुआत?

एनजीओ के फाउंडर अजय ओली ने साल 2014 में इस सोसायटी को स्टार्ट किया था. उनका उद्देश्य था कि बच्चों को आजीविका से जोड़ सकें और वे भीग मांगने का काम न करें. लखनऊ से एमबीए करने के बाद उन्होंने इसकी शुरुआत लखनऊ से ही की थी. इसके बाद उन्होंने अपने गृहनगर पिथौरागढ़ में भी इसे शुरू किया.


YourStory से बात करते हुए ओली ने कहा कि बहुत सारे बच्चे आजीविका के लिए पढ़ाई छोड़ देते थे. इसे देखने के बाद बाद हमने तय किया कि हम कुछ ऐसा करेंगे जिससे बच्चे अपनी आजीविका के साथ पढ़ाई भी कर सकें और कोई स्किल भी सीख सकें.


साल 2014 में हमने तीन ऐसी बच्चियों के साथ काम शुरू किया जो किसी तरह अपना गुजारा करती थीं. हमने उन्हें आत्मनिर्भर बनाना शुरू किया. पढ़ाई-लिखाई भी कराई. साल 2015 से हम स्किल डेवलपमेंट एक्टिविटी भी कराने लगे. इसमें हम बच्चों से राखी, दिया, एपण, कलर्स आदि बनवाते हैं.


एनजीओ की वालंटियर प्रेमा सुतरी और पूजा भट्ट बच्चियों के विकास और उनकी शिक्षा को देखती हैं. वे पिछले 7 सालों से राखी बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. लक्ष्मी, प्रेमा, मुस्कान, मीनाक्षी, मंजू, सपना पिछले 6 सालों से लगातार एनजीओ के साथ काम कर रही हैं.

सैनिकों को भेजनी शुरू की राखी

ओली बताते हैं कि राखी हमारा सबसे इम्पॉर्टेंट, यूनीक और पहला प्रोडक्ट है. हम करीब एक लाख राखियां बनाते हैं, जिसमें से करीब 45-50 हजार राखियां हम देश की सीमाओं के साथ अन्य चुनौतीपूर्ण जगहों पर तैनात सैनिकों को बिना किसी कीमत के भेजते हैं.


ओली ने कहा कि अभी हम जम्मू कश्मीर के पीओके बॉर्डर पर तैनात 1 से लेकर सभी 70 राष्ट्रीय राइफल के जवानों के लिए राखियां भेजते हैं. इस बार हम असम बाढ़ में काम करने वाले असम राइफल्स के जवानों, राजस्थान बॉर्डर पर तैनात जवानों के साथ-साथ उत्तराखंड और जम्मू में तैनात आईटीबीपी के जवानों के लिए भी राखी भेज रहे हैं. हम चीन बॉर्डर पर तैनात जवानों और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के लिए भी राखी भेज रहे हैं.


ओली कहते हैं कि, यही नहीं, हम अन्य सेक्टर्स में भी काम करने वाले अच्छे लोगों को बच्चों द्वारा बनाई गई राखियां भेजते हैं. मार्केट में भी जाती हैं बच्चों की बनाई राखी


ओली कहते हैं कि सैनिकों को भेजने के बाद भी हमारी 50-55 हजार राखियां बच जाती हैं. हम उन्हें मार्केट में उचित कीमत पर बेचने की कोशिश करते हैं. हम इन राखियों की कीमत 10 से 35 रुपये तक रखते हैं. पिछले 7 सालों में हम लोग 5 से 5.50 लाख राखियां बना चुके हैं.

स्किल डेवलपमेंट के साथ आजीविका का साधन उपलब्ध कराना उद्देश्य

ओली कहते हैं कि हमारा एनजीओ एक नॉन फंडेड एनजीओ है. ये सभी बच्चे बेहद गरीब पृष्ठभूमि से आते हैं और हम इनसे कोई पैसे नहीं लेते हैं. लेकिन बच्चे जो भी एक्टिविटी करते हैं उसी से हम फंड जनरेट करते हैं और एनजीओ को चलाते हैं.


वह बताते हैं कि हम जो क्लासेज चलाते हैं, उसमें से 3 दिन इनके स्किल डेवलपमेंट की क्लास होती है. उसके लिए हम अगर दो लाख का सामान खरीदकर बच्चों को एक्टिविटी के लिए देते हैं तो उन्हें मार्केट में बेचकर उस कॉस्ट को निकालते हैं. बाकी के पैसे बच्चों के राशन-पानी, पढ़ाई-लिखाई पर इस्तेमाल करते हैं. हमारा यही उद्देश्य है कि ऐसे स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम चलाकर हम देशभर में बच्चों को भीख मांगने से रोक सकें. यह बिल्कुल उसी तरह से है जैसे सामान्य स्कूलों में ड्रॉइंग है.एनजीओ के साथ 17 हजार बच्चे कर चुके हैं काम


ओली बताते हैं कि, हमारे यहां 5 साल से लेकर 16 साल तक के बच्चे हैं. अभी तक पिछले 8 साल में हम 17 हजार बच्चों के साथ काम कर चुके हैं. इनमें ऐसे बच्चे शामिल हैं जो हमारे यहां रहते हैं, अपने घर पर रहते हैं लेकिन हम उन्हें सपोर्ट करते हैं, या हमारे साथ काम करते हैं आदि. ओली के एनजीओ में फिलहाल कुल 7 बच्चे रहते हैं और चार बच्चे अपने घर रहते हैं. राखी बनाने वाले बच्चे कुल 30 हैं.

राष्ट्रपति, पीएम, अमिताभ बच्चन से मिल चुकी है तारीफ

ओली ने कहा कि हमारे पास आर्मी की यूनिट्स प्रशंसा पत्र भेजती रहती हैं. हमारे पास प्रधानमंत्री का एक बार लेटर आया है. उत्तराखंड के राज्यपाल ने दो बार पत्र भेजा है. राष्ट्रपति ने भी सराहना का पत्र भेजा है. अमिताभ बच्चन का भी पत्र आया है. सभी बटालियनों के तो नहीं लेकिन बहुत से बटालियन के पत्र आते हैं.बच्चे सीख भी रहे और अपनी प्रतिभा का लोहा भी मनवा रहे


ओली ने कहा कि हम जब ये सामान सेल करने जाते हैं तो बच्चों को भी लेकर जाते हैं. इससे उनको पता चलता है कि मार्केटिंग कैसे की जाती है. अगर कोई बच्चा आगे जाकर बीबीए या एमबीए करेगा तो उसे इससे मदद मिलेगी.


उन्होंने कहा कि हम बच्चों को एजुकेशनल ट्रिप पर भी ले जाते हैं. इस साल हम उन्हें कुमाऊं, गढ़वाल ले जाने वाले हैं. हमारे कई छोटे बच्चे डिस्ट्रिक्ट, स्टेट और नेशनल लेवल पर बॉक्सिंग, ताइक्वांडो, खोखो आदि में गोल्ड, सिल्वर जीत चुके हैं.