MSMEs के मामले में लगातार खिल रहा केरल, FY22 के आखिर तक रजिस्टर्ड यूनिट 1.5 लाख तक जाने का अनुमान

By yourstory हिन्दी
July 25, 2022, Updated on : Mon Jul 25 2022 13:14:24 GMT+0000
MSMEs के मामले में लगातार खिल रहा केरल, FY22 के आखिर तक रजिस्टर्ड यूनिट 1.5 लाख तक जाने का अनुमान
उद्योगों के पास अब जिला और राज्य दोनों स्तरों पर शिकायत निवारण फोरम हैं. उनके निर्णय सरकार के सभी विभागों के लिए बाध्यकारी हैं.
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चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान केरल में 42300 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को रजिस्टर किया गया. इसे देखते हुए राज्य सरकार ने राज्य में वित्त वर्ष 2022-23 के अंत तक रजिस्टर होने वाले MSME की संख्या के अनुमान को संशोधित कर दिया है. पहले केरल सरकार को उम्मीद थी कि वित्त वर्ष के आखिर तक राज्य में 1 लाख MSME रजिस्टर होंगे लेकिन अब अनुमान है कि यह आंकड़ा 1.5 लाख रहेगा.


न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, केरल के कानून, उद्योग और कॉयर मंत्री पी राजीव ने यह बात कही है. मंत्री ने कक्कानाड में इन्फोपार्क फेज 2 एसईजेड में Innovature की एक नई फैसिलिटी का उद्घाटन करने के बाद कहा कि केरल में पिछले वित्तीय वर्ष में केवल 17300 MSME रजिस्टर हुए थे.

कम भूमि की आवश्यकता वाली औद्योगिक परियोजनाओं को प्रोत्साहन

उन्होंने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि हम एक ऐसा राज्य हैं जहां एक तरफ फ्रैजाइल पश्चिमी घाट हैं और दूसरी तरफ रेगुलेशन जोन एक्ट वाला तट है. बीच में हमारे पास पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र हैं. इसका मतलब है कि हम केवल वर्टिकल जा सकते हैं. सरकार कम भूमि की आवश्यकता वाली औद्योगिक परियोजनाओं को प्रोत्साहित करती है. इनोवेचर जापानी ग्राहकों पर केंद्रित है. इसमें 500 कर्मचारी हैं और 20000 वर्ग फुट का कार्यक्षेत्र है. इनोवेचर का लक्ष्य 2025 तक 2000 कर्मचारियों की वृद्धि का है.

गैर-IT स्टार्टअप को भी IT स्टार्टअप जैसी छूट

राजीव ने यह भी कहा कि केरल सरकार ने गैर-आईटी स्टार्टअप को भी वे सभी छूट देने का फैसला किया है, जो उनके आईटी समकक्षों को मिलती हैं. राज्य सरकार ने 10 एकड़ भूमि वाले गैर-आईटी व्यवसायों को भी 3 करोड़ रुपये के अनुदान के साथ कुछ छूट प्रदान करने का निर्णय लिया है. अब 50 करोड़ रुपये तक के निवेश वाली फर्मों को संचालन शुरू करने के छह महीने के भीतर ही लाइसेंस प्राप्त करने की आवश्यकता होती है. उन्होंने कहा कि 50 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली फर्मों को आवेदन के सात दिनों के भीतर लाइसेंस दिया जाएगा. उद्योगों के पास अब जिला और राज्य दोनों स्तरों पर शिकायत निवारण फोरम हैं. उनके निर्णय सरकार के सभी विभागों के लिए बाध्यकारी हैं. मंत्री ने यह भी कहा कि गलत अधिकारियों को दंडित किया जाएगा.


Edited by Ritika Singh