UPI और क्रेडिट कार्ड लेन-देन के मामले में शुल्क पर RBI ने पब्लिक से मांगा फीडबैक

By Ritika Singh
August 18, 2022, Updated on : Thu Aug 18 2022 11:52:36 GMT+0000
UPI और क्रेडिट कार्ड लेन-देन के मामले में शुल्क पर RBI ने पब्लिक से मांगा फीडबैक
RBI ने 3 अक्टूबर को या उससे पहले इस डिस्कशन पेपर पर फीडबैक और सुझाव मांगे हैं.
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक डिस्कशन पेपर जारी किया है. इसमें केंद्रीय बैंक ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), क्रेडिट कार्ड आदि से संबंधित शुल्कों पर पब्लिक फीडबैक मांगा है. डिस्कशन पेपर में इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS) नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT) सिस्टम, रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) सिस्टम और UPI जैसे पेमेंट सिस्टम्स में शुल्क से संबंधित सभी पहलुओं को शामिल किया गया है. इसमें डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) जैसे विभिन्न पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स भी शामिल हैं. RBI ने 3 अक्टूबर को या उससे पहले इस पेपर पर फीडबैक और सुझाव ईमेल के माध्यम से मांगे हैं.


RBI ने एक बयान में कहा कि पेमेंट सर्विसेज के लिए शुल्क, यूजर्स के लिए उचित और प्रतिस्पर्धात्मक रूप से निर्धारित होना चाहिए, साथ ही इंटरमीडियरीज के लिए ऑप्टिमल रेवेन्यु स्ट्रीम प्रदान करने वाला भी होना चाहिए. प्राप्त फीडबैक का उपयोग नीतियों और इंटरवेंशन रणनीतियों को निर्देशित करने के लिए किया जाएगा.

क्या कहता है डिस्कशन पेपर

RBI ने डिस्कशन पेपर में पूछा है कि क्या डेबिट कार्ड लेनदेन को नॉर्मल फंड्स ट्रांसफर के रूप में चार्ज किया जाना चाहिए और क्या MDR सभी व्यापारियों के लिए समान होना चाहिए. MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट. यह वह कमीशन है, जो बैंक और कार्ड जारीकर्ता आपस में साझा करते हैं. इस प्रकार यदि MDR 0.5 प्रतिशत है तो यह राशि बैंक और कार्ड जारीकर्ता, जैसे वीज़ा, मास्टरकार्ड, एएमईएक्स आदि के बीच साझा की जाएगी. वर्तमान में डेबिट कार्ड, रूपे कार्ड और UPI के लिए कोई शुल्क नहीं लगता है क्योंकि वे सरकार की जीरो-MDR नीति के अंतर्गत आते हैं. यह नीति अनिवार्य करती है कि व्यापारियों पर इन मोड्स के माध्यम से पेमेंट स्वीकार करने के लिए कोई शुल्क नहीं लगाया जाना चाहिए.


डिस्कशन पेपर में RBI ने सवाल किया है कि क्या रूपे कार्ड को MDR के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय कार्ड नेटवर्क से संबद्ध अन्य डेबिट कार्ड से अलग माना जाना चाहिए. यह भी पूछा है कि क्या RBI को डेबिट कार्ड ट्रांजेक्शंस के लिए MDR को डिरेगुलेट करना चाहिए और हितधारकों को एमडीआर और इंटरचेंज के इष्टतम स्तर पर निर्णय लेने देना चाहिए.

क्रेडिट कार्ड, UPI के मामले में क्या प्रतिक्रिया मांगी

क्रेडिट कार्ड के मामले में RBI ने इस बात पर प्रतिक्रिया मांगी है कि क्या क्रेडिट कार्ड MDR शुल्क उचित हैं और क्या नियामक को क्रेडिट कार्ड और PPI लेनदेन के लिए MDR को विनियमित करना चाहिए. UPI के संदर्भ में RBI ने सवाल किया है कि अगर UPI लेनदेन पर शुल्क लगाया जाता है तो क्या उन्हें नियामक द्वारा एडमिनिस्टर किया जाना चाहिए या फिर उन्हें बाजार संचालित किया जाना चाहिए.

क्या सरचार्जेस उचित

नियामक ने यह भी सवाल किया है कि क्या सरचार्जेस उचित हैं और क्या व्यापारियों को ग्राहकों पर सरचार्जेस लगाने की अनुमति दी जानी चाहिए. साथ ही पूछा है कि इस तरह के सरचार्ज को कौन रेगुलेट करे.

NEFT और IMPS

इसके अतिरिक्त, RBI ने सवाल किया है कि क्या RBI को NEFT के माध्यम से प्रोसेस्ड लेनदेन के लिए सदस्य बैंकों से शुल्क लेना चाहिए. यह भी पूछा है कि क्या RBI को बैंकों द्वारा NEFT लेनदेन के लिए अपने ग्राहकों पर लगाए जाने वाले शुल्क को निर्धारित करना चाहिए या फिर उन्हें बाजार संचालित होना चाहिए. इसके अलावा RBI ने इस पर भी प्रतिक्रिया मांगी है कि क्या केंद्रीय बैंक को IMPS पर शुल्कों को विनियमित करना चाहिए और क्या इसके तहत लगाए जाने वाले शुल्कों के मामले में एक सीमा तय करनी चाहिए.

दिसंबर 2021 में डिस्कशन पेपर का किया था प्रस्ताव

RBI ने दिसंबर 2021 में पेमेंट सिस्टम्स में शुल्क को लेकर एक डिस्कशन पेपर जारी करने का प्रस्ताव किया था और कहा था कि इसमें डिजिटल पेमेंट के विभिन्न चैनलों में शामिल शुल्क से संबंधित सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा. डिजिटल लेनदेन, यूजर्स के लिए वहनीय बनाने और प्रोवाइडर्स के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी बनाने के लिए उपायों की आवश्यकता है. RBI का डिटेल्ड डिस्कशन पेपर यहां मौजूद है...

https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/Publications/PDFs/DPSSDISCUSSIONPAPER5E016622B2D3444A9F294D07234059AA.PDF