पहले देश की सीमा पर डटे रहे अब कोरोना मरीजों की मदद को आगे आए ये रिटायर्ड सैनिक

सैनिकों द्वारा चलाई गई इस मुहिम के तहत करीब 1453 रिटायर सैनिक फिलहाल जम्मू और कश्मीर में कोरोना मरीजों की देखभाल में जुटे हुए हैं। रिटायर होने से पहले ये सभी सैन्यकर्मी थल सेना, जल सेना और पैरामिलिट्री फोर्स में अपनी सेवाएँ दे रहे थे।
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देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने की ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर लेकर चलने वाले सैनिक अपने रिटायरमेंट के बाद एक बार फिर से देश सेवा में जुट गए हैं। आज जब देश कोरोना महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहा है, तो ऐसे में ये रिटायर सैनिक कोरोना मरीजों की सेवा में लगे हुए हैं।

सैनिकों द्वारा चलाई गई इस मुहिम के तहत करीब 1,453 रिटायर सैनिक फिलहाल जम्मू और कश्मीर में कोरोना मरीजों की देखभाल में जुटे हुए हैं। रिटायर होने से पहले ये सभी सैन्यकर्मी थल सेना, जल सेना और पैरामिलिट्री फोर्स में अपनी सेवाएँ दे रहे थे।

‘देश सेवा का एक और मौका’

सैनिकों के अनुसार कुछ दानदाताओं ने उन्हें पीपीई किट और सैनेटाइजर जैसी चीजें उपलब्ध कराई हैं। फिलहाल ये सभी सैन्यकर्मी कश्मीर के शासन के साथ मिलकर ये सराहनीय काम कर रहे हैं। कोरोना मरीजों की मदद के लिए सैनिकों को 10 के समूह में बांटा गया है। वर्तमान में सैनिकों की ये टीमें कश्मीर के तमाम जिलों में कोरोना मरीजों की सेवा में लगी हुई हैं।

कोरोना मरीजों की सेवा में लगे ये सैनिक उन मरीजों की दवा देने से लेकर ऑक्सीजन लेवल चेक करने तक हर तरह से उनका ख्याल रख रहे हैं। सैनिकों के अनुसार उन्हें इस बात की बेहद खुशी है कि रिटायर होने के बाद भी उन्हें देश की दोबारा सेवा करने का मौका मिला है।

फैला रहे हैं जागरूकता

जम्मू कश्मीर के उधमपुर में रिटायर्ड सैनिक लोगों के बीच जाकर कोरोना को लेकर जागरूकता फैलाने का भी काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं, ये सैनिक कोरोना के लक्षण नज़र आने के बाद लोगों के ऑक्सीजन लेवल और पल्स रेट को भी मापने का काम कर रहे हैं।

मरीज में कोरोना के गंभीर लक्षण नज़र आने के बाद ये रिटायर्ड सैनिक उन मरीजों को जरूरी सलाह देने के साथ ही जरूरत पड़ने पर अस्पताल तक पहुंचाने का भी काम कर रहे हैं।

99 साल के रिटायर्ड सैनिक आए आगे

बीते हफ्ते 99 साल के रिटायर्ड सैनिक केशो लाल वर्मा ने कोरोना से लड़ाई में अपनी तरफ से सेना को एक लाख रुपये का दान दिया था, जिसके बाद सोशल मीडिया के साथ ही हर तरफ उनकी तारीफ हुई थी।

मालूम हो कि केशो लाल वर्मा ने खुद जालंधर स्थित स्टेशन कमांडर के दफ्तर पहुँच कर एक लाख रुपये का यह चेक सौंपा था। साल 1922 में जन्मे केशो लाल वर्मा ने देश की आजादी से भी पहले साल 1942 में सेना को जॉइन किया था। केशो लाल रॉयल इंडियन आर्मी में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं, इसी के साथ उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में भी हिस्सा लिया था।

रिटायर सैन्य डॉक्टर देंगे सेवाएँ

गौरतलब है कि देश में बीते कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कहर के बाद अब तीसरी लहर के आगमन से पहले रिटायर्ड सैनिकों की सीधी मदद लेते हुए कमर कसने का काम किया जा रहा है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने सेना के 400 रिटायर्ड डॉक्टरों को एक साल की सेवा के लिए चुनने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मंत्रालय अगले चार महीनों तक सैन्य डॉक्टरों के चयन की प्रक्रिया जारी रखेगा।

Edited by रविकांत पारीक

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