कहानी ‘स्पाइस गर्ल्स ऑफ इंडिया’ की, जानिए कैसे एक महिला ने अपनी सात बेटियों के साथ खड़ा किया मसालों का बड़ा व्यापार

जोधपुर की इस महिला ने सभी चुनौतियों को हराकर अपनी बेटियों के साथ खड़ा किया बड़ा मसाला व्यापार, ‘स्पाइस गर्ल्स ऑफ इंडिया’ के नाम से हैं मशहूर
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"जोधपुर में रहने वाली ये शख्सियत अपनी बेटियो के साथ ‘स्पाइस गर्ल्स ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर हैं। आज एक माँ और उनकी सात बेटियाँ ना सिर्फ मसाले का व्यवसाय संचालित कर रही हैं, बल्कि पितृसत्ता और लैंगिक आधार पर स्थापित रूढ़िवादी समाज की सोच को चुनौती भी दे रही हैं।"

जोधपुर के चहल-पहल वाले सरदार मार्केट में आज ‘स्पाइस गर्ल्स ऑफ इंडिया’ अपने एमवी स्पाइसेस स्टोर पर अपनी ट्रेडमार्क मसाला-सुगंधित चाय पेश करती हुईं दुनिया भर के पर्यटकों का स्वागत करती हैं। आज दुनिया भर से शहर आने वाले पर्यटकों के बीच यह एक प्रसिद्ध और लोकप्रिय ब्रांड है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल कंपनियों और ब्लॉगर्स द्वारा चर्चा भी की जा चुकी है।

हालांकि यह कहना बिल्कुल सटीक होगा कि एमवी स्पाइसेस की कहानी वास्तव में न केवल अपने लिए बल्कि अपनी सात बेटियों के लिए उनकी समानता और उनके सम्मान के लिए एक माँ की लड़ाई की कहानी है।

जब भगवंती मोहनलाल के पति का निधन हो गया, तो उनके ससुराल वालों ने उनके इस विचार का विरोध किया, जहां वे अपनी विशेष रूप से बेटियों की मदद से व्यवसाय की देखभाल करना चाहती थीं। अजमेर में पली-बढ़ी भगवंती अपनी पढ़ाई पूरी कर नौकरी करना चाहती थीं, लेकिन जब उनके परिवार को कठिन आर्थिक हालातों का सामना करना पड़ा तो उन्होने सबसे पहले भगवंती की शिक्षा पर रोक लगा दी।

22 साल की उम्र में उनका विवाह जोधपुर के एक परिवार में 15,000 रुपये दहेज के साथ कर दिया गया था। लगातार तीन बेटियों के जन्म के बाद उसके ससुराल वाले उनके बुरा व्यवहार करने लगे थे, क्योंकि परिवार को ‘घर चलाने के लिए एक बेटा चाहिए था।‘

भगवंती कहती हैं,

“मेरे पति एक पढ़े-लिखे और दयालु व्यक्ति थे और कई बार घर पर शांति स्थापित करने की कोशिश की, हालांकि बाद में हम लड़कियों के साथ बाहर चले गए।"

एक विनम्र शुरुआत

भगवंती के पति मोहनलाल को भगवंती का घर का बना खाना बहुत पसंद था और वे उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मसालों के बारे में जानने के लिए उत्सुक थे। इसे समझते हुए दोनों ने फैसला किया और रात-रात भर काम करते हुए विभिन्न प्रकार के मसाले खुद बनाने शुरू कर दिये।

इसके बाद मोहनलाल मेहरानगढ़ किले के पास एक चादर बिछाकर मसाले बेंचने लगे। ये क्रम चल ही रहा था कि एक दिन किले के गार्ड ने उन्हें बुलाते हुए कहा कि जोधपुर के महाराजा ने उन्हें भीतर बुलाया है।

भगवंती के अनुसार उनके पति उस समय घबरा गए थे, लेकिन गार्ड ने यह कहकर उन्हें शांत किया कि राजा बाहर मसाले बेचने वाले व्यक्ति से मिलना चाहते हैं।

वह बताती हैं,

“हमें आश्चर्य हुआ कि एक फ्रांसीसी पर्यटक ने हमारे मसाले खरीदे और उसे इतना पसंद किया कि उन्होंने राजा को एक पत्र लिखा। राजा ने हमारे काम और शहर को प्रसिद्धि दिलाने के लिए प्रशंसा की और फिर मेरे पति को 6,000 रुपये के किराए पर मेहरानगढ़ किले में जगह भी दी।”

मोहनलाल ने अपना दिन मसाले की दुकान में बिताते थे, जबकि शाम को वह अपने किराना स्टोर पर लौट आते थे। इसी के साथ पर्यटकों के साथ बातचीत करने के लिए वे स्पेनिश और फ्रेंच जैसी विभिन्न भाषाओं को सीखने में हर दिन लगभग दो घंटे व्यतीत करते थे। यह व्यापार जल्द ही एक आकर्षण का केंद्र बन गया और इसने दुनिया भर के पर्यटकों को भारतीय मसालों के साथ स्वाद और प्रयोग करने के लिए आकर्षित करना शुरू कर दिया। यहां तक कि इसे इंग्लैंड करी संगठन द्वारा प्रमाणित भी किया गया था।

जारी रखा लगातार आगे बढ़ना

व्यवसाय ने नई ऊंचाइयों को छूना शुरू ही किया था कि मोहनलाल का निधन हो गया। भगवंती के अनुसार वह उनके जीवन का सबसे कठिन समय था। इन सब के बीच उनके ससुराल वालों ने उनसे दुकान माँगना शुरू कर दिया था।

वह कहती हैं, 

"जब मैंने उनसे कहा कि मैं दुकान चलाना जारी रखूंगी, तो वे क्रोधित हो गए और बात करने लगे कि मैं कितनी बेशर्म हूँ कि मैं अपनी बेटियों के साथ बाजार में बैठने की सोच रही हूँ। लेकिन मैंने उनका फैसला एक तरफ ही रखा। मैंने मेरी लड़कियों को प्राथमिकता दी और मुझे जो करना था, वह करने लगी।”

अपनी इसी ज़िद के साथ आगे बढ़ते हुए भगवंती अब तक अपनी सभी सात बेटियों को बिना समझौता किए उनकी पढ़ाई पूरी कराने में कामयाब रही हैं। लड़कियां भी अपने पिता की तरह ही कई विदेशी भाषाओं में पारंगत हैं। आज, सात बेटियां- उषा, पूनम, नीलम, निक्की, कविता, रितु और प्रिया जोधपुर शहर में चार स्टोर के साथ एमवी स्पाइसेस चला रही हैं। वे पिसे हुए और बिना पिसे मसाले, चाय और चाय के मसाले, करी के लिए मसालों के साथ ही क्रिसमस गिफ्ट पैक की एक विस्तृत श्रृंखला पेश करती हैं।

अपने खुदरा स्टोर के अलावा यह 250 ग्राम मसालों के लिए 3 डॉलर से 20 डॉलर की कीमत सीमा के साथ अपनी वेबसाइट के माध्यम से विदेशी ग्राहकों को भी मसाले बेंच रही हैं। इन वर्षों में स्टोर पर आने वाले कई पर्यटक अपने देश से ऑनलाइन ऑर्डर देने वाले ग्राहक बन गए हैं। प्रति माह लगभग 30 ऑर्डर के साथ आज परिवार के अलावा बाहर 12 लोगों की एक टीम है।

तीसरी सबसे बड़ी बेटी नीलम को ब्रिटेन की एक पर्यटक क्लेयर "स्पाइस गर्ल नंबर 3" कहती हैं, आज नीलम व्यवसाय के शीर्ष पर हैं।

नीलम कहती हैं, 

“मेरे बचपन की यादें मेरे माता-पिता की कड़ी मेहनत करने और कठिन समय में मसालों को पीसने की रही हैं। चाहे जो भी बाजार प्रतियोगी विकसित कर रहे हों, एमवी स्पाइसेस हमारी इस प्रक्रिया में मशीनरी को शामिल नहीं करेगा क्योंकि यही हमारे उत्पाद को उन सब से अलग बनाता है।”

भगवंती कहती हैं,

"मोहनलाल ने बहुत मेहनत की है और मैं उनका नाम यूं ही नहीं छोडूंगी. जब तक मैं जिंदा हूं, यह काम चलता रहेगा। मेरे पति के विजन का साथ देने वाली मेरी सभी बेटियां मेरे साथ हैं।''

Edited by Ranjana Tripathi