एक साल में हुए 55200 स्टार्टअप्स, Startup India ने बनाया नया रिकॉर्ड
भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम ने नया रिकॉर्ड बनाया है. वित्त वर्ष 2025-26 में 55,200 से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता मिली. इसके साथ ही स्टार्टअप्स की कुल संख्या 2.23 लाख पार हो गई है जिनसे 23 लाख नौकरियां सृजित हुई. सरकारी योजनाओं, फंडिंग और बढ़ती महिला भागीदारी से स्टार्टअप सेक्टर को नई ताकत मिल रही.
भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम एक बार फिर नई ऊंचाई पर पहुंच गया है. वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार ने 55,200 से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता दी है. यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. 2016 में शुरू हुई Startup India पहल के बाद किसी एक साल में इतने स्टार्टअप्स पहली बार मान्यता प्राप्त हुए हैं.
यह सिर्फ संख्या नहीं है, बल्कि देश में तेजी से बढ़ते नवाचार और उद्यमिता की ताकत का संकेत है.
Startup India से बना मजबूत इकोसिस्टम
Startup India पहल की शुरुआत 16 जनवरी 2016 को हुई थी. इसका उद्देश्य था देश में नवाचार को बढ़ावा देना, निजी निवेश को आकर्षित करना और नए उद्यमियों को आगे बढ़ाना. सरकार ने इसके तहत कई योजनाएं और प्रोग्राम शुरू किए. इनका मकसद स्टार्टअप्स को पहचान देना, उन्हें विकसित करना और उन्हें आगे बढ़ने में मदद करना है.
आज इसका असर साफ दिखता है. 31 मार्च 2026 तक देश में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 2.23 लाख के पार पहुंच गई है. इन स्टार्टअप्स ने मिलकर 23.36 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा की हैं. यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा योगदान है.
भारत में 21 अप्रैल 2026 तक कुल 128 यूनिकॉर्न स्टार्टअप (ऐसे स्टार्टअप जिनकी वैल्यू 1 बिलियन डॉलर या उससे अधिक है) हैं.
दुनिया में यूनिकॉर्न की संख्या के मामले में भारत तीसरे स्थान पर है. पहले स्थान पर अमेरिका है, जहां 1,130 यूनिकॉर्न हैं, और दूसरे स्थान पर चीन है, जहां 247 यूनिकॉर्न हैं.
भारत के शहरों की बात करें तो बेंगलुरु सबसे आगे है, जहां सबसे ज्यादा 54 यूनिकॉर्न हैं. इसके बाद मुंबई में 21 और गुरुग्राम में 20 यूनिकॉर्न मौजूद हैं.
सेक्टर के हिसाब से देखें तो कंज्यूमर सेक्टर में सबसे ज्यादा 58 यूनिकॉर्न बने हैं. इसके बाद एंटरप्राइज एप्लिकेशन सेक्टर में 40 और रिटेल सेक्टर में 39 यूनिकॉर्न हैं.

वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार ने 55,200 से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता दी है, जो कि एक रिकॉर्ड है. (Source: PIB)
महिलाओं की भागीदारी और तेज ग्रोथ
भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में महिलाओं की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है. 1.07 लाख से अधिक स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला डायरेक्टर या पार्टनर है. यह कुल स्टार्टअप्स का करीब 48 प्रतिशत है.
वित्त वर्ष 2025-26 में स्टार्टअप्स की संख्या में साल दर साल 51.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. वहीं इनसे बनने वाली नौकरियों में 36.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.
अगर पिछले साल से तुलना करें तो 2024-25 में करीब 36,400 स्टार्टअप्स को मान्यता मिली थी, जो अब बढ़कर 55,200 से ज्यादा हो गई है. इसी तरह नौकरियां भी 3,66,870 से बढ़कर 4,99,400 के पार पहुंच गई हैं.
किन राज्यों में सबसे ज्यादा स्टार्टअप्स
आज स्टार्टअप्स देश के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में मौजूद हैं. लेकिन कुछ राज्य इस मामले में आगे हैं. महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और गुजरात टॉप पर हैं.
महाराष्ट्र में 38,660 से ज्यादा स्टार्टअप्स हैं जिन्होंने 4,13,900 से ज्यादा नौकरियां पैदा की हैं. कर्नाटक में 22,600 से अधिक स्टार्टअप्स हैं जिन्होंने 2,46,000 से ज्यादा नौकरियां दी हैं. उत्तर प्रदेश में 21,960 स्टार्टअप्स हैं जिनसे 2,11,580 नौकरियां पैदा हुई हैं. दिल्ली में 21,120 स्टार्टअप्स हैं जिन्होंने 2,36,640 नौकरियां दी हैं. गुजरात में 19,270 स्टार्टअप्स हैं जिन्होंने 2,14,800 नौकरियां पैदा की हैं.
इसके अलावा तमिलनाडु, तेलंगाना, हरियाणा, केरल और राजस्थान भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. राजस्थान में 8,100 से अधिक स्टार्टअप्स हैं और 83,100 से ज्यादा रोजगार बने हैं.
सरकारी योजनाओं से मिला बढ़ावा
सरकार स्टार्टअप्स को मजबूत करने के लिए लगातार आर्थिक मदद दे रही है. Fund of Funds for Startups (FFS) के तहत 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि 135 से अधिक Alternative Investment Funds (AIFs) को दी जा चुकी है. इन फंड्स ने आगे 1,420 से ज्यादा स्टार्टअप्स में 26,900 करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश किया है.
सरकार ने अब Startup India Fund of Funds 2.0 भी लॉन्च किया है, जिसका कॉर्पस 10,000 करोड़ रुपये है.
FFS 1.0 के तहत 2024-25 में 980 करोड़ रुपये दिए गए थे, जो 2025-26 में बढ़कर 1,039 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गए हैं.
Credit Guarantee Scheme for Startups को भी मजबूत किया गया है. इसमें प्रति उधारकर्ता गारंटी सीमा 10 करोड़ से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये कर दी गई है. साथ ही गारंटी फीस कम की गई है. 2025-26 के अंत तक 410 से ज्यादा लोन, जिनकी कुल राशि 1,250 करोड़ रुपये से ज्यादा है, गारंटी के तहत आए हैं.
2024-25 में 130 लोन गारंटी थे, जो 2025-26 में बढ़कर 135 से ज्यादा हो गए हैं. वहीं राशि 305 करोड़ से बढ़कर 600 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई है.
Startup India Seed Fund Scheme के तहत 219 इनक्यूबेटर्स चुने गए हैं. 945 करोड़ रुपये का पूरा फंड कमिट किया जा चुका है. इन इनक्यूबेटर्स ने 3,400 से ज्यादा स्टार्टअप्स को 605 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग मंजूर की है. इस योजना को आगे भी जारी रखा गया है ताकि स्टार्टअप्स को निरंतर सहायता मिलती रहे.
पेटेंट और सरकारी खरीद में बढ़त
स्टार्टअप्स अब सिर्फ बिजनेस ही नहीं बना रहे, बल्कि नवाचार में भी आगे हैं. अब तक 19,400 से ज्यादा पेटेंट आवेदन स्टार्टअप्स की ओर से दाखिल किए जा चुके हैं.
2024-25 में जहां 2,850 से ज्यादा पेटेंट आवेदन थे, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 4,480 से ज्यादा हो गए हैं.
सरकारी खरीद में भी स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ रही है. Government e-Marketplace (GeM) पर 38,600 से ज्यादा स्टार्टअप्स जुड़ चुके हैं.
2024-25 में 5,140 से ज्यादा स्टार्टअप्स जुड़े थे, जो 2025-26 में बढ़कर 6,540 से ज्यादा हो गए हैं. ऑर्डर की संख्या 1,19,620 से बढ़कर 1,40,260 से ज्यादा हो गई है. वहीं ऑर्डर का कुल मूल्य 14,103 करोड़ रुपये से बढ़कर 19,190 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है.
भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है. यह देश के हर कोने तक पहुंच रहा है. नए आइडिया, नई सोच और सरकारी समर्थन मिलकर भारत को एक मजबूत स्टार्टअप हब बना रहे हैं. आने वाले समय में यह सेक्टर और बड़ी भूमिका निभाने वाला है.




