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स्टार्टअप स्टोरी

रोबोट बनाने से लेकर दिहाड़ी मज़दूरों को रोज़गार दिलाने तक, मिसाल क़ायम कर रहे छोटे शहर के ये 'बड़े' स्टार्टअप्स

Sameer Ranjan
20th Mar 2019
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Photom के फाउंडर हिम्मत सिंह

सोलर उपकरणों की सफ़ाई के लिए


स्टार्टअप भारत सीरीज़ में इस बार योर स्टोरी आपके लिए ऐसे स्टार्टअप्स और ऑन्त्रप्रन्योर्स की कहानी लेकर आया है, जो भारत के छोटे-छोटे शहरों से ताल्लुक रखते हैं और आई क्रिएट के माध्यम से अपने सपनों को उड़ान दे रहे हैं। आई क्रिएट यानी इंटरनैशनल सेंटर फ़ॉर ऑन्त्रप्रन्योरशिप ऐंड टेक्नॉलजी। इन सभी स्टार्टअप्स को आई क्रिएट के माध्यम से इनक्यूबेशन का सहयोग मिल रहा है। आपको बता दें कि पिछले साल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इज़रायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने आई क्रिएट का उद्घाटन किया था।


फोटोम

2017 में हिम्मत सिंह ने राजस्थान के एक छोटे से गांव मंडला से फोटोम नाम के स्टार्टअप की शुरुआत की। यह स्टार्टअप सोलर पावर प्लांट्स के लिए रोबोटिक क्लीनिंग सिस्टम विकसित करता है। सोलर पैनल्स पर जमा होने वाली धूल से उनके परफ़ॉर्मेंस पर बुरा असर पड़ता है और इस समस्या को दूर करने के लिए आमतौर पर लोगों को ख़ुद से ही पानी के ज़रिए इनकी सफ़ाई करनी पड़ती है। एक ओर पानी की उपलब्धता के संकट और दूसरी ओर प्रबंधन की अतिरिक्त लागत की वजह से सोलर पावर प्लांट्स की उपयोगिता कम होती जा रही थी।


इस समस्या का प्रभावी हल ढूंढने वाले हिम्मत कहते हैं, "हम इन पैनल्स को साफ़ करने के लिए किसी तरह के केमिकल या पानी का इस्तेमाल नहीं करते। यह पूरी तरह से एक ड्राय (सूखा) सिस्टम है। हम इसके माध्यम से ऊर्जा भी बचा सकते हैं और नुकसान को बिल्कुल ख़त्म कर सकते हैं।"


फोटोम को आई क्रिएट की मदद से इक्विटी सीड फ़ंडिंग मिल चुकी है और हाल में यह स्टार्टअप आठ लोगों की टीम के साथ काम कर रहा है। यहां तक कि एक छोटे से गांव से इस स्टार्टअप की शुरुआत करने वाले हिम्मत को यूके सरकार की रॉयल ऐकेडमी ऑफ़ इंजीनियर फ़ॉर लीडर्स इन इनोवेशन फ़ेलोशिप द्वारा आमंत्रित भी किया जा चुका है। वह इस फ़ेलोशिप की ओर से भारत से चयनित होने वाले 15 ऑन्त्रप्रन्योर्स में से एक थे।


फोटोम ने रोबोट्स के पांच प्रोटोटाइप्स तैयार किए हैं, जो लंबाई में 2 से 4 मीटर तक हैं। स्टार्टअप की योजना है कि गुजरात से अपने पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की जाए और सोलर प्लान्ट्स से प्रमाणित होने के बाद इनका कमर्शल लॉन्च किया जाए।


लेबरअड्डा की टीम

लेबरअड्डा

इंदु भूषण अस्थाना, सिद्धार्थ अस्थाना और विभूति मोहन ने 2017 में लखनऊ से लेबरअड्डा की शुरुआत की। इस स्टार्टअप का उद्देश्य है कि ज़्यादा से ज़्यादा दिहाड़ी और विस्थापित हुए मजदूरों को और ख़ासतौर पर जिनके पास कोई ख़ास कौशल नहीं है, उन्हें रोज़गार के बेहतर अवसर मुहैया कराए जाएं।


सिद्धार्थ कहते हैं, "हम देखते थे कि दिहाड़ी मजदूर रोज़ाना कस्बे या शहर के बड़े इलाकों में जाकर रोज़गार की तलाश करते थे। रोज़ ही दो से तीन घंटे का समय सिर्फ़ काम की खोज में बर्बाद हुआ करता था। उनके पास फोन नहीं थे और जिनके पास थे, वे भी अपने फोन घर पर छोड़कर आया करते थे। इस स्थिति को देखते हुए हमने एक ऐप, एक वेबसाइट और एक कॉल सेंटर की शुरुआत की। चूंकि ज़्यादातर मजदूरों के पास स्मार्टफ़ोन्स नहीं होते, हम उनके नाम और आधार नंबर अपने रेकॉर्ड में दर्ज कर लेते हैं। जैसे ही किसी को मजदूरों की ज़रूरत पड़ती है, वह हमारे ऐप के ज़रिए या फिर कॉल सेंटर पर कॉल करके अपने काम के हिसाब से मजदूरों का चुनाव कर लेता है।"


"वहीं दूसरी ओर, जब मजदूरों के पास काम नहीं होता, तब वे हमें मिस्ड कॉल के माध्यम से सूचित कर देते हैं कि वे अभी काम करने के लिए उपलब्ध हैं। इसके बाद हम उनके लिए काम की तलाश करके उन्हें उपयुक्त स्थान पर भेज देते हैं।"


सबसे पहले एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लेबरअड्डा की शुरुआत फ़ैज़ाबाद से हुई थी। हाल में, यह स्टार्टअप उत्तर प्रदेश के 9 शहरों में अपने ऑपरेशन्स चला रहा है, जिनमें लखनऊ, कानपुर, मथुरा और अन्य बड़े शहर शामिल हैं।


सोलर लैब्स

2017 में शुरू हुए सोलर लैब्स का उद्देश्य है कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और जीआईएस (जियोग्राफ़िक इन्फ़र्मेशन सिस्टम) जैसी तकनीकों की मदद से भारत में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए।


कंपनी के को-फ़ाउंडर सिद्धार्थ गंगल बताते हैं, "जब भी लोग अपनी छतों पर सोलर पैनल्स लगाते हैं तब सॉफ़्टवेयर की मदद से उन्हें बताया जाता है कि उनकी छत पर कितने सोलर पैनल्स लगाए जा सकते हैं और साथ ही, उनकी मदद से कितने किलोवाट ऊर्जा पैदा की जा सकती है। हमारा स्टार्टअप उपभोक्ताओं को इस बारे में भी जानकारी देता है कि किस तरह से वापस ग्रिड में बिजली बेचकर वे आय का साधन भी तैयार कर सकते हैं।"


वह बताते हैं, "आमतौर पर हमारे ग्राहक, सोलर ईपीसी कंपनियां होती हैं, जो हमारे माध्यम से ऐनालिसिस रिपोर्ट्स लेती हैं और फिर उन रिपोर्ट्स को अपने क्लाइंट्स तक पहुंचाती हैं।" यह स्टार्टअप अंबाला (हरियाणा) में रजिस्टर्ड है और इसकी शुरुआत सिद्धार्थ गंगल, अंकुश जिंदल, अश्विन ए, अभय सिंह और देवांग बचरवार ने मिलकर की थी।


अपने स्टार्टअप को गुजरात शिफ़्ट करने के संबंध में सिद्धार्थ ने बताया, "गुजरात में सौर ऊर्जा से जुड़ीं पर्याप्त संभावनाएं हैं और यहां पर राज्य सरकार का रवैया काफ़ी सहयोगी भी है।"


कृषिसागर के फाउंडर निखिल

कृषिसागर

निखिल पसारी ने 2017 में धूले (महाराष्ट्र) से अपने इस स्टार्टअप की शुरुआत की थी। यह स्टार्टअप, ऐग्री-ट्रेड के लिए एक बीटूबी प्लेटफ़ॉर्म तैयार कर रहा है। जहां एक तरफ़ बीटूबी ऐग्री-ट्रेड में व्यापार मूलरूप से वॉट्सऐप या मोबाइल फ़ोन्स के ज़रिए होता है, वहीं कृषिसागर का उद्देश्य है कि कृषि से संबंधित व्यावसायिक लेनदेन को पूरी तरह से स्टार्टअप द्वारा तैयार प्लेटफ़ॉर्म पर लाया जाए और किसानों, फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और ट्रेडर्स सभी को इस प्लेटफ़ॉर्म पर पंजीकृत किया जाए।


निखित का कहना है, "आमतौर पर किसानों के पास रियल टाइम जानकारी की कमी होती है और वे जानकारियों के लिए अपने आस-पास के व्यापारियों पर ही निर्भर होते हैं। हमारे प्लेटफ़ॉर्म की मददसे किसानों को पूरे देश में कृषि उत्पादों इत्यादि के दाम से संबंधित और अन्य ज़रूरी जानकारियां सीधे उपलब्ध हो सकेंगी।"


निखिल ने जानकारी दी कि जैसे ही किसान को किसी ख़रीददार की बोली वाजिब लगती है, वह ऑर्डर पर सहमति दे सकता है। स्टार्टअप पहले ही धूले में अपना पायलट प्रोजेक्ट चला चुका है और इस दौरान कंपनी को अच्छी प्रतिक्रिया भी मिली। उनके पायलट प्रोजेक्ट में लगभग 500 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कृषि व्यापार से जुड़े लोगों को एक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म उपलब्ध कराने के साथ-साथ यह स्टार्टअप ख़रीददार की विश्वसनीयता के संबंध में फ़ीडबैक और कृषि क्षेत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण ख़बरें भी मुहैया कराता है।



नाका फ़ूड्स

नाका फ़ूड्स की शुरुआत, मैसूर के वीवीआईईटी से इंजीनियरिंग ग्रैजुएट कुशल आराध्य ने की थी। यह कंपनी अपने ग्राहकों को अर्बन लाइफ़स्टाइल को ध्यान में रखते हुए हेल्दी स्नैक्स की बेहतरीन रेंज उपलब्ध कराती है।


कुशल बताते हैं, "हमने 2015 के आख़िर तक अपने काम की शुरुआत कर दी थी। हमने आई क्रिएट द्वारा मिली सीड फ़ंडिंग की बदौलत अपने स्टार्टअप की शुरुआत की थी। हमने अपना पहला उत्पाद, सेंटर फ़ूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इन्स्टीट्यूट (सीएफ़टीआरआई) के वैज्ञानिकों के सहयोग के साथ विकसित किया था। इसके बाद हमने अपने उत्पाद में ज़रूरी सुधार किए और स्नैक्समार्केट के साथ मिलकर 70 आईटी ऑफ़िसों के माध्यम से अपने उत्पाद का फ़ीडबैक लिया। स्नैक्समार्केट, बेंगलुरु की ही एक हेल्दी स्नैक वेंडिंग मशीन कंपनी है।


अपने प्रोडक्ट “4PM Bar” के बारे में बताते हुए उन्होंने जानकारी दी कि यह एक हेल्दी और सुविधाजनक उत्पाद है और इसके माध्यम से वे शहरी जीवनशैली को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह उत्पाद जल्द ही कॉर्पोरेट ऑफ़िसों और कैफ़े इत्यादि पर उपलब्ध होगा। कुशल का दावा है कि इस उत्पाद में स्पिरुलिना मौजूद है, जो हमारे आहार से नदारद ज़रूरी पोषक तत्वों की भरपाई कर सकता है।


यह भी पढ़ें: भारत के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति अजीम प्रेमजी ने परोपकार में दान किए 52 हजार करोड़


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