एक भाई ने किया एमबीए, दूसरे ने बीटेक, अब किसान बन कमा रहे करोड़ों

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आज भी एक ओर खेती किसानी को पिछड़ा हुआ व्यवसाय माना जाता है और किसानों को भी कामचलाऊ कमाई से संतुष्ट होना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर लखनऊ के दो भाइयों ने इस परिभाषा को ही बदल दिया है। आज शशांक और अभिषेक आधुनिक खेती के बल पर करोड़ों का राजस्व उठा रहे हैं।

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आधुनिक खेती करने वाले भाई शशांक भट्ट और अभिषेक भट्ट

MBA छोड़ कर किसानी का रुख करने वाले यूपी की राजधानी लखनऊ के निवासी शशांक भट्ट आज खेती-किसानी की दुनिया में मुकाम हासिल कर रहे हैं। MBA के बाद नौकरी तो मिली लेकिन संतुष्टि नहीं मिली, ऐसे में शशांक ने यह तय किया कि वो कुछ और करेंगे। कुछ और करने की ललक ने उनसे सबसे बड़ा मौका दिखाया खेती के रूप में।


शशांक को सबसे बड़ा साथ मिला उनके भाई अभिषेक का। अभिषेक ने अपना बीटेक पूरा किया, उसके साथ भाई के साथ नई पारी को आगे बढ़ाने निकल पड़े।


योरस्टोरी से बात करते हुए शशांक ने बताया कि 2010 में एमबीए पूरा करने के बाद 2011 में खेती की तरफ उनका रुझान बढ़ा, जिसमें उनके मामा राजीव राय जो कि आधुनिक खेती के व्यवसाय में पहले से ही थे, उनसे सीखने में शशांक को ख़ासी मदद मिली।


शुरुआती दिनों की बात करते हुए शशांक कहते हैं,

“मध्यमवर्गीय परिवार होने के नाते सबसे बड़ी मुश्किल तब आई जब परिवार को अपने निर्णय के बारे में मनाना पड़ा। घर वालों की अनुमति के बाद मैंने देश भर में घूम-घूम कर आधुनिक कृषि के बारे में जानकारी इकट्ठी की।”

शशांक के अनुसार, उत्तर प्रदेश आज भी खेती के मामले में काफी पीछे है, ऐसे में मैंने आधुनिक खेती के जो तरीके सीखे थे, उनपर चलते हुए बेहद छोटे स्तर पर खेती शुरू की।

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आधुनिक तरीकों से उगाई जा रही शिमला मिर्च.

शशांक के अनुसार,

“इस तरह की खेती को लोगों से बेहद प्रशंसा मिली। राज्य भर से लोग हमारी आधुनिक खेती के तरीकों को जानने के लिए हमारे पास आने लगे। इज़राइल से भी आए लोगों ने हमारी खेती के बारे में जानकारी लेते हुए हमारे काम को सराहा।”

शुरुआती दौर में शशांक ने एक किसान से 5 एकड़ खेत लीज पर लेकर वहां शिमला मिर्च उगाने से शुरुआत की, वहीं आज शशांक 22 एकड़ से अधिक जमीन पर शिमला मिर्च के साथ, फूलगोभी और जुकिनी की खेती भी कर रहे हैं।


उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले शशांक ने खेती की शुरुआत 5 एकड़ से की, लेकिन पाँच सालों बाद आज शशांक बाईस एकड़ में खेती कर रहे हैं।


रेवेन्यू पर बात करते हुए शशांक बताते हैं कि,

“शुरुआती दौर में ये सब काफी मुश्किल भरा था, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, चीजों में बदलाव होता गया। आज हम अपने काम के बल पर 15 करोड़ से अधिक का राजस्व उठा रहे हैं।”

शशांक अपने भाई के साथ मिलकर एग्रीप्लास्ट नाम की कंपनी की भी स्थापना की, जो खेती से जुड़ा काम कर रही है। यह कंपनी बड़ी संख्या में किसानों को अपने साथ जोड़कर उन्हे आधुनिक खेती के लिए प्रशिक्षित कर रही है।


इस बारे में जानकारी देते हुए शशांक बताते हैं,

“हमारी वेबसाइट से जुड़कर किसान हमसे संपर्क कर सकते हैं। हमने कॉल सेंटर की स्थापना भी की है, जहां किसानों को हमारी तरफ से हर संभव मदद उपलब्ध कराते हुए उनका मार्गदर्शन किया जा रहा है।”

शशांक के अनुसार उत्तर प्रदेश में किसान अभी आधुनिक तौर-तरीकों से खेती नहीं कर रहे हैं, जिससे मेहनत करते हुए भी उन्हे बेहतर राजस्व नहीं मिल पा रहा है।


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आधुनिक तरीकों पर आधारित है ये खेती

शशांक आज अपने भाई अभिषेक के साथ मिलकर किसानों को आधुनिक खेती के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 10 हज़ार किसान आज शशांक से जुड़े हुए हैं। शशांक और अभिषेक इन किसानों को आधुनिक खेती के बारे में लगातार जानकारी साझा करते रहते हैं।


शशांक ने योरस्टोरी को बताया,

“भविष्य को लेकर हमारी योजना है कि हम नई तकनीक को भारत में लाएँ, जिससे किसानों को अधिक से अधिक फायदा हो सके। किसानों की आमदनी को दोगुनी करने के लिए हमें उन्हे आधुनिक तकनीक मुहैया करानी ही पड़ेगी।”

शशांक के अनुसार खेती को लेकर उन्हे सरकार से सब्सिडी मिली, जिससे उन्हे आगे बढ़ने में मदद मिली, लेकिन शशांक के अनुसार सरकार को किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी को और बढ़ाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक किसान आधुनिक खेती की ओर बढ़ सकें।




आज शशांक आस-पास के किसानों को आधुनिक खेती से रूबरू कराते हुए उनका मार्गदर्शन भी कर रहे हैं। शशांक के खेती करने के तरीके की सबसे खास बात ये है कि खेती के इन तरीकों को छोटा-बड़ा कोई भी किसान बड़ी आसानी से अपना सकता है।


आधुनिक किसानी में भविष्य को लेकर शशांक कहते हैं,

“आज बड़ी संख्या में युवा बड़े कॉलेजों से पढ़ने के बाद खेती की तरफ अपना रुझान बढ़ा रहे हैं। आज खेती में अपार संभावनाएं उपलब्ध हैं। मैं भी लोगों से अपील करता हूँ कि खेत बेंचकर शहर की तरफ रुख करने के बजाय आप आधुनिक खेती कर बेहतर कमाई करें।”

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