स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भागीदारी के लिए भारत, अमेरिकी कंपनियों के बीच चार समझौते

By Prerna Bhardwaj
October 12, 2022, Updated on : Wed Oct 12 2022 12:46:22 GMT+0000
स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भागीदारी के लिए भारत, अमेरिकी कंपनियों के बीच चार समझौते
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भारत और अमेरिका ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय रणनीतिक भागीदारी को मजबूत करने के लिये चार बड़े समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये हैं. वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच, कोविड-19 महामारी से लगातार उबरने और जलवायु संबंधी लगातार चुनौतियों के बीच, अमेरिका और भारत की यह साझेदारी ऊर्जा को लेकर दोनों देशों की प्रतिबद्धता दर्शाती है. अमेरिका और भारत की सरकारी एजेंसियों ने सहयोग के पांच तकनीकी स्तंभों में कई उपलब्धियों का प्रदर्शन किया: 1) बिजली और ऊर्जा दक्षता, 2) अक्षय ऊर्जा, 3) जिम्मेदार तेल और गैस, 4) सतत विकास, और 5) उभरती ईंधन और प्रौद्योगिकी.


ये समझौते भारत और अमेरिका की तेल एवं गैस कंपनियों के बीच मंगलवार को तेल और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के ह्यूस्टन में एक गोलमेज सम्मेलन के दौरान हुए. बैठक में एक्सॉन मोबिल और तेलुरियन जैसी ऊर्जा और चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियां मौजूद थीं.


अमेरिका और भारत के बीच मजबूत रणनीतिक भागीदारी बनाने को लेकर प्रतिबद्ध अमेरिका-भारत रणनीतिक भागीदारी मंच ने भारतीय महावाणिज्य दूतावास के साथ मिलकर गोलमेज बैठक का आयोजन किया. बैठक में अमेरिका और भारत के बीच सार्वजनिक तथा निजी दोनों क्षेत्रों में ऊर्जा भागीदारी और अवसरों को टटोला गया. दोनों मंत्रियों ने संतुलित ऊर्जा बाजारों को सुनिश्चित करने के लिए विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के महत्व को भी रेखांकित किया,जिसमें रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से कच्चे तेल को जारी करने की अमेरिकी पहल को भारत का समर्थन और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने का महत्व शामिल है.दोनों मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को सतत आर्थिक विकास और उचित ऊर्जा अवस्थांतर का समर्थन करते हुए ऊर्जा पहुंच, वहनीयता, ऊर्जा न्याय को बढ़ावा देना चाहिए. दोनों मंत्रियों ने यह भी माना कि महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने में उनकी व्यवहार्यता और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सरकार के सभी स्तरों पर ठोस कार्रवाई और कार्यान्वयन की आवश्यकता है.

भारत और अमेरिका ने उभरते ईंधन और प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने के निरंतर प्रयासों और अंतिम उपयोग क्षेत्रों के विद्युतीकरण और डीकार्बोनाइजेशन पर भी चर्चा की. चर्चाओं में कठिन क्षेत्रों को शामिल किया गया और मंत्रियों को स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण पर संयुक्त अनुसंधान एवं विकास और कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (सीसीयूएस) प्रौद्योगिकियों पर स्वच्छ ऊर्जा-अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए (पीएसीई-आर) अमेरिका–भारत साझेदारी के तहत अन्य नवीन प्रौद्योगिकियों पर नए सहयोग और अन्वेषण करने की क्षमता सहित विभिन्न पहलों के बारे में सूचित किया गया.


दोनों मंत्रियों ने टिकाऊ, किफायती, विश्वसनीय, लचीला और स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों को सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा निवेश में वृद्धि की जरूरत के महत्व पर जोर दिया.


नए द्विपक्षीय प्रयासों में शामिल हैं:


स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण सहित विश्वसनीय, किफायती और लचीला स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पावर ग्रिड को मजबूत करना;

भार प्रबंधन का समर्थन करने के लिए ग्रिड-एकीकृत भवनों, इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य वितरित ऊर्जा संसाधनों का आकलन करना;

2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित ऊर्जा संसाधनों से लगभग 50 प्रतिशत संचयी विद्युत शक्ति की स्थापित क्षमता प्राप्त करने के भारत के लक्ष्य का समर्थन करने सहित नवीकरणीय ऊर्जा विकास और इसकी तैनाती को आगे बढ़ाना;

उपकरणों, इमारतों और औद्योगिक क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता और संरक्षण को आगे बढ़ाना;

भारत में एक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) वित्त पोषण सेवा सुविधा की स्थापना के माध्यम से एक सक्षम परितंत्र बनाने सहित परिवहन क्षेत्र का विद्युतीकरण और डीकार्बोनाइजिंग;

मीथेन का पता लगाने और उपशमन प्रौद्योगिकियों की तैनाती करने के प्रयासों सहित तेल और गैस मूल्य श्रृंखला में उत्सर्जन को कम करना;

विद्युतीकरण, कार्बन कैप्चर एवं भंडारण, और अन्य स्वच्छ उभरती ऊर्जा प्रौद्योगिकियों की तैनाती के प्रयासों के माध्यम से औद्योगिक क्षेत्र को डीकार्बोनाइज़ करना;

ईआईए जैसी भारतीय और अमेरिका ऊर्जा प्रयोगशालाओं और एजेंसियों और ऊर्जा डेटा प्रबंधन, मॉडलिंग, कम कार्बन प्रौद्योगिकियों के बीच सहयोग को और मजबूत करना.