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मिलें उस इंजीनियर से जो पानी की समस्या को खत्म करने के लिए कर रहा झीलों को पुनर्जीवित

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22nd Apr 2019
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पहली फोटो में झील की सफाई में जुटे लोग, दूसरी में इंजीनियर रामवीर तंवर, फोटो साभार: सोशल मीडिया


2018 में नीति आयोग द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार भारत अपने इतिहास के सबसे बुरे जल संकट के दौर से गुज़र रहा है। करीब 60 करोड़ लोगों को साफ़ पानी नहीं मिल रहा है और दूसरी तरफ लगभग 2 लाख लोग हर साल इसी वजह से अपनी जान गंवा रहे हैं। मुसीबत यही ख़तम नहीं होती, आने वाला वक्त इससे भी ज्यादा मुश्किल है। माना जा रहा है कि 2030 तक भारत में पानी की मांग अबसे दो गुना ज्यादा बढ़ जायेगी। 


जिसका सीधा मतलब ये बनता है कि हम अपने मौजूदा जल स्त्रोतों को सूखने से बचायें। इस काम को अंजाम देने के लिए कई सारे एनजीओ और संस्थाएं सामने आ रही हैं। जिनमें से एक नाम रामवीर तंवर का भी है। सूत्रों के मुताबिक 26 साल के इस इंजीनियर एवं सोशल एक्टिविस्ट ने अपने जल संरक्षण प्रोजेक्ट द्वारा उत्तर प्रदेश में स्थित गौतम बुद्ध नगर की करीब दस झीलों को सूखने से बचाया है और इनकी ये छोटी-सी कोशिश अब करीब 50 गॉंवों में फैल चुकी है। 


रामवीर ने अपना बचपन ग्रेटर नोएडा के दाधा गाँव में झीलों के आसपास खेल कूदकर गुजरा है। जो अब उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पर दुर्भाग्यवश बीतते समय के साथ ये सारी झीलें कचरा फेंकने कि वजह से खत्म होने लगीं। रामवीर ने अपनी पढ़ाई के अंतिम वर्षों में इस समस्या को अपने कंधों पर ले लिया। रामवीर के अनुसार, 'नोएडा में पहले करीब 200 झीलें थीं और अब एक भी झील नहीं बची है'।


रामवीर तंवर, फोटो साभार: सोशल मीडिया

2013 में रामवीर ने 'जल चौपाल' सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मलेन का उद्देश्य पानी से जुड़ी समस्याओं के बारें में लोगो को जागरूक करना था। जल प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं, जैसे- कचरा फेंकने जैसी चीज़ों को इसमें शामिल किया गया।  


रामवीर 'लॉजिकल इंडियन' से बात करते हुए कहते हैं, कि गाँव के लोगों में जागरूकता की कमी होने कि वजह से वह पानी के महत्व को नहीं समझ पा रहे हैं और ऐसे वे अज्ञानता कि वजह से कर रहे हैं। सिर्फ शुल्क भरने या भरवाने से समस्या का अंत नहीं होगा।


2014 में रामवीर ने गांव के लोगों के साथ मिलकर झीलों को साफ़ किया और उन्हें पुनर्जीवित कर दिया। यह सब मुमकिन हो पाया रामवीर और गांव वालों द्वारा स्थापित किये गए डबल फिल्ट्रेशन सिस्टम की वजह से। इस प्रोसेस में झील में प्रवेश करने वाले पानी को पहले लक‍ड़ी के तख़्ते के जाल से गुज़र कर पुनः घास के जाल से गुज़रना पड़ता है। 


कीचड़ से भरी झील को साफ़ करने के लि‍ए रामवीर ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर वहां के किसानों को कीचड़ खाने वाली 10000 मछलियों का उत्पादन करने का बढ़ावा दिया। रामवीर की मेहनत और 'जल चौपाल' सम्मलेन कि कोशिश देखकर वहां की सरकार की नजर उन पर और उनके काम पर पड़ी जिसकी वजह से 'भूजल सेना' का निर्माण यूपी के हर एक जिले में हुआ। इतना ही नहीं बल्कि सरकार ने रामवीर को अपने जिलों के भूजल सेना का कोआर्डिनेटर भी बनाया।


अपनी इस लड़ाई को अगे बढ़ाने के लिए रामवीर ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक ऑनलाइन कैंपेन की शुरुआत की है, जहां वे लोगों से अपने आस-पास कि झीलों को साफ़ करने और उन्हें साफ़ रखने का निवेदन करते हैं। कोई भी व्यक्ति प्रदूषित झीलों के साथ अपनी सेल्फी लेकर फेसबुक पर #selfie_with_pond के साथ अपलोड कर इस कैंपेन का हिस्सा बन सकता है।


 The Epoch Times  के साथ अपनी बातचीत में रामवीर कहते हैं, 'यह लोगों को पानी और झीलों के महत्व को समझाने में मदद करेगा। खत्म हो रही झीलों को बचाने के बाद हम उन झीलों को टूरिज़्म स्‍पॅाट में बदलने की सोच रहे हैं, जिसके बाद यहाँ दुनिया भर से टूरिस्ट आयेंगे और गाँव में रहेंगे। इसके आलावा अगर उनकी इच्छा हुई तो वो इन झीलों को बचाने के लिये कुछ दान भी कर सकते हैं।


-ज्योति झा


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