क्या है कर्मचारी पेंशन (संशोधन) योजना 2014? सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या होगा असर?

By Vishal Jaiswal
November 04, 2022, Updated on : Fri Nov 04 2022 10:16:54 GMT+0000
क्या है कर्मचारी पेंशन (संशोधन) योजना 2014? सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या होगा असर?
वर्ष 2014 के संशोधन ने अधिकतम पेंशन योग्य वेतन (मूल वेतन और महंगाई भत्ता मिलाकर) की सीमा 15,000 रुपये प्रति माह तय की थी. संशोधन से पहले, अधिकतम पेंशन योग्य वेतन 6,500 रुपये प्रति माह था.
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को वर्ष 2014 की कर्मचारी पेंशन (संशोधन) योजना की वैधता को बरकरार रखा. हालांकि, अदालत ने पेंशन कोष में शामिल होने के लिए 15,000 रुपये मासिक वेतन की सीमा को रद्द कर दिया.


वर्ष 2014 के संशोधन ने अधिकतम पेंशन योग्य वेतन (मूल वेतन और महंगाई भत्ता मिलाकर) की सीमा 15,000 रुपये प्रति माह तय की थी. संशोधन से पहले, अधिकतम पेंशन योग्य वेतन 6,500 रुपये प्रति माह था.


प्रधान न्यायाधीश यू.यू. ललित, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा कि जिन कर्मचारियों ने पेंशन योजना में शामिल होने के विकल्प का इस्तेमाल नहीं किया है, उन्हें छह महीने के भीतर ऐसा करना होगा.


कर्मचारी भविष्य निधि संगठन और केंद्र ने केरल, राजस्थान और दिल्ली के उच्च न्यायालयों के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें 2014 की योजना को रद्द कर दिया गया था.

क्या है EPS?

कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) एक रिटायरमेंट स्कीम है. इसे EPFO द्वारा मैनेज किया जाता है. इसे 1995 में लॉन्च किया गया था और इस योजना में मौजूदा और नए ईपीएफ सदस्य शामिल हो सकते थे. यह योजना संगठित क्षेत्र में काम कर चुके रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए है, जो 58 वर्ष की आयु में रिटायर हो चुके हैं.


नियोक्ता/ कंपनी और कर्मचारी दोनों ही ईपीएफ फंड में कर्मचारी की सैलरी में से 12 प्रतिशत का समान योगदान करते हैं. हालांकि, कर्मचारी के योगदान का पूरा हिस्सा ईपीएफ में और नियोक्ता/ कंपनी के शेयर का 8.33 प्रतिशत कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) में और 3.67 प्रतिशत हर महीने ईपीएफ में जाता है.

कर्मचारी पेंशन योजना, 1995

ईपीएस संशोधन से पहले, कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (ईपीएस योजना) के पैराग्राफ 6 में प्रावधान था कि ईपीएस योजना हर उस कर्मचारी पर लागू होगी जो 16 नवंबर 1995 को या उसके बाद कर्मचारी भविष्य निधि योजना 1952 (ईपीएफ योजना) का सदस्य बना.


इसके अलावा, ईपीएस योजना के पैराग्राफ 11 में प्रावधान था कि पेंशन योग्य वेतन कर्मचारियों की सदस्यता से कर्मचारी के बाहर निकलने की तारीख से पहले 12 (बारह) महीनों की अवधि में सेवा की अंशदायी अवधि के दौरान प्राप्त औसत मासिक वेतन होगा.


इस प्रावधान ने अधिकतम पेंशन योग्य वेतन को 6,500 रुपये प्रति माह पर सीमित कर दिया था, लेकिन नियोक्ता और कर्मचारियों के विकल्प पर कर्मचारियों के वास्तविक वेतन के अनुसार योगदान करने की अनुमति दी थी.

कौन होते हैं पात्र?

कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए किसी भी व्यक्ति को निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना होता है:

·      EPFO के सदस्य होना चाहिए

·      कुल मिलाकर कम से कम 10 साल तक नौकरी की हो

·      58 साल की आयु हो

ऐसे मिलता है पेंशन लाभ

EPFO के सभी योग्य सदस्य अपनी उम्र के मुताबिक पेंशन का लाभ तब से उठा सकते हैं जब वे पेंशन निकालना शुरू करते हैं. पेंशन राशि अलग- अलग मामलों में अलग-अलग होती है.


कोई सदस्य 58 वर्ष की आयु में रिटायर होने के बाद पेंशन लाभ लेना शुरू कर सकता है. 50 वर्ष की आयु होने पर भी कर्मचारी ईपीएस से पैसे निकालना शुरू कर सकते हैं, लेकिन तब पेंशन राशि कम होगी. कर्मचारी दो साल (60 साल की उम्र तक) के लिए अपनी पेंशन को स्थगित कर सकते हैं, जिसके बाद उन्हें हर साल 4% की अतिरिक्त दर से पेंशन मिलेगी.


यदि EPFO का कोई भी सदस्य पूरी तरह विकलांग हो जाता है और उसने पेंशन योग्य सेवा अवधि भी पूरी नहीं की है, तब भी वह मासिक पेंशन का हकदार है. कर्मचारी विकलांग होने की तारीख से मासिक पेंशन प्राप्त करने के लिए योग्य हो जाता है और ज़िंदगीभर के लिए उसे पेंशन मिलती है.