‘विदेश पढ़ने मत जाओ’ - भारतीय छात्रों से यह क्यों कह रहे हैं Zerodha के नितिन कामथ

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में पढ़ाई के लिए विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की कुल संख्या में वृद्धि हुई है. वहीं, Zerodha के नितिन कामथ ने Twitter पर भारतीय छात्रों को पढ़ाई के लिए विदेश नहीं जाने की सलाह दी है. लेकिन वे क्यों मना कर रहे हैं? जानिए

‘विदेश पढ़ने मत जाओ’ - भारतीय छात्रों से यह क्यों कह रहे हैं Zerodha के नितिन कामथ

Wednesday February 22, 2023,

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जैसा कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियां लागत कम करने के लिए हाल के महीनों में सामूहिक रूप से 150,000 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं. ऐसे में Zerodha और True Beacon के फाउंडर निखिल कामथ (Nikhil Kamath) ने हायर स्टडीज के लिए विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों को बड़ी सलाह दी है. उन्होंने छात्रों से देश में स्थापित नए विश्वविद्यालयों पर पुनर्विचार करने के लिए कहा.

निखिल ने ट्विटर पर लिखा, "पश्चिम में बढ़ती ब्याज दरों और हाई-पेड टेक जॉब्स में बड़े पैमाने पर फायरिंग के चलते भारत में स्थापित नए विश्वविद्यालयों पर पुनर्विचार करना चाहिए, जिनमें जबरदस्त सुधार हुआ है."

आगे बताते हुए, कामथ ने कहा, "पढ़ाई और नेटवर्क के लिए विदेश जाना एक बात है, और जीवन भर के लिए 7-8% के पागलपन भरे कर्ज में डूब जाना दूसरी बात है."

अपने ट्वीट में, कामथ ने InvestyWise द्वारा क्यूरेट किया गया एक चार्ट शेयर किया, जिसमें 2018 के बाद से पढ़ाई करने के लिए विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों में लगभग 44.87 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई.

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education - MoE) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में पढ़ाई के लिए विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की कुल संख्या में वृद्धि हुई है.

शिक्षा राज्य मंत्री डॉ सुभाष सरकार ने लोकसभा में बताया कि पिछले साल लगभग 7.5 लाख छात्र विदेश गए थे. विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या (7,50,365 छात्र) 2021 में 4,44,553 छात्रों की तुलना में 68.79 प्रतिशत बढ़ी.

आंकड़ों के अनुसार, विदेश में पढ़ाई करने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या 2017 में 4.54 लाख से बढ़कर 2018 में 5.17 लाख हो गई.

2019 में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई, 5.86 लाख छात्र उच्च शिक्षा के लिए देश छोड़कर चले गए. कोविड-19 महामारी के दौरान, विदेशी विश्वविद्यालयों में भारतीय नागरिकों की संख्या में इसके रिकॉर्ड में भारी गिरावट देखी गई, क्योंकि केवल 2.59 लाख छात्रों ने हायर स्टडीज के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था. 2021 में 4.44 लाख रजिस्ट्रेशन के साथ संख्या में मामूली वृद्धि देखी गई.

विदेश पढ़ाई के लिए जिन देशों को भारतीय छात्रों ने चुना, उनमें लोकप्रिय हैं - अमेरिका, यूके और ऑस्ट्रेलिया शामिल थे. जदयू सांसद राजीव रंजन सिंह के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में सुभाष सरकार ने विस्तृत जानकारी साझा की.

केंद्र सरकार इस साल की पहली तिमाही में हायर एजुकेशन से जुड़े तीन रेगुलेशन लाने जा रही है. इन रेगुलेशन के सामने आने के बाद न केवल विदेशी यूनिवर्सिटीज भारत में अपने कैंपस खोल पाएंगी बल्कि भारतीय यूनिवर्सिटीज भी विदेश में अपनी सेवाएं मुहैया पाएंगी. बहुत ही जल्द, हॉवर्ड और ऑक्सफोर्ड जैसी प्रतिष्ठित ग्लोबल यूनिवर्सिटीज में पढ़ने के लिए आपको विदेश जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. ये यूनिवर्सिटीज खुद अपने कैंपस भारत में खोल पाएंगी.

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