महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, इस महिला उद्यमी ने लॉन्च किए कई तरह के नॉन-टॉक्सिक कंडोम

By Rekha Balakrishnan
January 30, 2020, Updated on : Sat Feb 01 2020 07:00:38 GMT+0000
महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, इस महिला उद्यमी ने लॉन्च किए कई तरह के नॉन-टॉक्सिक कंडोम
हैदराबाद स्थित कोमल बल्दवा ने ब्ल्यू, ऑर्गेनिक पुरुष लेटेक्स कंडोम जो योनि, खुजली और सूखापन के अपने व्यक्तिगत अनुभव से सबक लेते हैं, जो पैराबेंस, ग्लिसरीन, कृत्रिम स्वाद और बेंजोकेन से मुक्त हैं।
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कोमल बल्दवा का मानना है कि कंट्रासेप्शन (contraception) महिलाओं की हेल्थ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शादी के बाद, जब भी उनके पति ने कंडोम का इस्तेमाल किया, उन्हें योनि में खुजली (vaginal itching) और सूखापन (dryness) होने लगा। और देखते-देखते उन्हें मूत्र संक्रमण भी होने लगा।


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कोमल बल्दवा



समय के साथ, उन्होंने महसूस किया कि उनका शरीर कंडोम्स में प्रयुक्त केमिकल्स पर रिएक्ट कर रहा था। उन्होंने सलाह के लिए एक स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क किया, लेकिन उन्हें वो समाधान दिया गया जो वह नहीं चाहती थीं।


वे बताती हैं,

पहले उसने (डॉक्टर) ने पूछा 'आप बच्चे की प्लानिंग क्यों नहीं करतीं?' उसने ओरल कंट्रासेप्शन का सुझाव दिया जिसका बहुत बुरा साइड इफेक्ट हुआ। मैं आईयूडी इस्तेमाल को लेकर भी कम्फर्ट नहीं थी। और क्या एसटीडी और अन्य बीमारियों की रोकथाम के लिए कंडोम एक समझदार विकल्प नहीं था?”


एक नॉन-टॉक्सिक सलूशन की तलाश

कोमल ने नॉन-टॉक्सिक कंडोम पर रिसर्च करना शुरू किया और पाया कि वे यूरोप में उपलब्ध थे। तब उनके अंदर उद्यमशील की ज्वाला जगी। कोलकाता में एक मारवाड़ी परिवार में जन्मी कोमल के लिए व्यापार हमेशा उनकी पसंद रहा है। यूके से मार्केटिंग में एमएस करने के बाद, उन्होंने एक फेस्टिवल गुड्स सप्लाई का बिजनेस शुरू किया था।


जब वह शादी के बाद हैदराबाद चली गईं, तो उन्होंने अपने पति के फैमिली कंस्ट्रक्शन बिजनेस को ज्वान कर लिया और कुछ समय के लिए दो अन्य बिजनेस भी चलाए - एक प्रीमियम लिंगरी ब्रांड और एक लग्जरी बेबी केयर प्रोडक्ट रेंज।


दुर्भाग्य से, ये दोनों ठीक से शुरू नहीं हो पाए। और तभी उनके अंदर नॉन-टॉक्सिक कंडोम लॉन्च करने का विचार आया। कोमल हॉलैंड में एक कंडोमोलॉजिस्ट के संपर्क में आई, जिसने उन्हें एक ब्रांड स्थापित करने की प्रक्रिया में मार्गदर्शन किया।


वह याद करती हैं,

“इससे पहले, मैंने अपने दोस्तों और उनके परिचितों और दोस्तों को एक सर्वे फॉर्म भरने के लिए कहा। जब मैंने उस सर्वे के वो 400 फॉर्म कलेक्ट किए, तो मुझे पता चला कि 40 प्रतिशत महिलाओं ने स्वीकार किया कि उन्हें उसी समस्या का सामना करना पड़ा था - योनि में खुजली और सूखापन।”


स्वास्थ्य और आनंद के लिए

कोमल ने फैसला किया कि उनका प्रोडक्ट जो ब्ल्यू कंडोम (Bleu condoms) के ब्रांड नाम से लॉन्च किया गया है, उसे "मेडिकल" प्रोडक्ट के रूप में देखा जाना चाहिए।


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वह बताती हैं,

"क्यों न इस पर भी बात की जाए कि कंडोम प्लेजर यानी आनंद के अलावा एक स्वास्थ्य से भी जुड़ी हुई चीज है जो केवल एक पोर्न फिल्म से एक प्रेरित नहीं है।"


वह कहती हैं,

"ये सभी ब्रांड जो लॉन्ग-लास्टिंग प्लेजर और कई तरह के फ्लेवर का वादा करते हैं, उनमें पारबेंस, ग्लिसरीन, बेंजोकेन और आर्टिफिशियल फ्लेवर जैसे केमिकल शामिल होते हैं जो हानिकारक हैं।"


पैकेजिंग के प्रति उनका दृष्टिकोण साफ है, वे इसके लिए 'किसी न्यूड आकर्षित करने वाली महिला' के ट्रेंड को फॉलो नहीं करती हैं। यह सिंपल और महिलाओं के अनुकूल है, और एक महिला के पास इसे खरीदने के लिए कोई हिचक नहीं होनी चाहिए। Bleü में Bleu के ऑर्गैनिक कंडोम हाइपोएलर्जेनिक हैं; कोमल कहती हैं कि रबड़ में चिकनाई वाले तरल पदार्थ में न तो कोई कठोर रसायन होता है और न ही कार्सिनोजेनिक एजेंट- यह एक ऐसी सच्चाई है जिसे ज्यादातर कंडोम निर्माता रिवील नहीं करते हैं।





पिछले साल दिसंबर में लॉन्च किया गया, ब्ल्यू कंडोम कंपनी की वेबसाइट के साथ-साथ फ्लिपकार्ट, 1mg, स्नैपडील और कुछ अन्य ईकॉमर्स साइटों पर उपलब्ध हैं। हाइपोएलर्जेनिक प्रोपर्टीज के लिए उन्हें स्त्रीरोग विशेषज्ञ और सेक्सोलॉजिस्ट द्वारा अप्रूव किया गया है।


एक बूटस्ट्रैप्ड स्टार्टअप, जो मैन्युफैक्चरिंग के लिए हैदराबाद की एक कंपनी से आउटसोर्स करता है। कोमल कहती हैं कि अब तक, प्रोडक्ट के बारे में जागरूकता ज्यादातर सोशल मीडिया कैंपेन के माध्यम से की गई है।


वे बताती हैं,

“हमारा कैंपेन महिलाओं के स्वास्थ्य और आनंद के महत्व पर केंद्रित होगा। हम संगठनों, यौन शिक्षकों और अन्य लोगों के साथ बातचीत करने की प्रक्रिया में हैं, ताकि जागरूकता पैदा हो, लेकिन इसमें समय लगेगा।"


कोमल को याद है कि जब वह पहली बार टॉक्सिन-फ्री कंडोम के विचार से जुड़ी थी, तो ज्यादातर लोग इस विषय पर बातचीत से दूर चले गए क्योंकि वे शर्मिंदा थे।


कोमल कहती हैं,

“कभी-कभी मुझे ऐसा लगता था कि मैं एक दीवार से बात कर रही थी, लेकिन इसने मुझे आगे बढ़ने से नहीं रोका। मेरा मानना है कि एक महिला को यह तय करने का अधिकार है कि किस प्रोडक्ट का उपयोग किया जाना चाहिए, और यह उसके स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है। और इसी तरह इस आइडिया का जन्म हुआ।” 

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