प्रदूषण से परेशान? फेफड़ों को मज़बूत कर देगी ये दुनिया की पहली स्मार्ट डिवाइस

By रविकांत पारीक
November 15, 2022, Updated on : Tue Nov 15 2022 05:32:48 GMT+0000
प्रदूषण से परेशान? फेफड़ों को मज़बूत कर देगी ये दुनिया की पहली स्मार्ट डिवाइस
17 से ज्यादा यूनीक ब्रीदिंग सेशन वाला Airofit PRO रीयल-टाइम लाइव गाइडेंस और ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म है. इस डिवाइस की एक और खासियत यह है कि यह सांस लेने और सांस छोड़ने वाली मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है.
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Xplore Health Technologies ने दुनिया का पहला स्मार्ट रेस्पिरेटरी ट्रेनिंग डिवाइस (world’s first Smart Respiratory Training device) 'एयरोफिट प्रो' (Airofit PRO) लॉन्च किया है. इस डिवाइस की मदद से पर्सनालाइज्ड ट्रेनिंग में काफ़ी सुधार होगा. इसकी मदद से उम्र, साइज, लिंग, वरीयता, फेफड़ों की क्षमता और सांस लेने की मांसपेशियों की ताकत आदि की रीडिंग ली जा सकेगी और उसके अनुसार ट्रेनिंग की जा सकेगी.


17 से ज्यादा यूनीक ब्रीदिंग सेशन वाला एयरोफिट प्रो रीयल-टाइम लाइव गाइडेंस और ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म है. इस डिवाइस की एक और खासियत यह है कि यह सांस लेने और सांस छोड़ने वाली मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है.


कोविड के बाद जो भी मरीज़ एयरोफिट का इस्तेमाल कर रहे हैं उनके फेफड़े की क्षमता में लगातर सुधार देखने को मिला है और उनकी सांस भी अब ज्यादा देर तक बनी रहती है.


एयरोफिट से ट्रेनिंग करने वाले सीओपीडी, अस्थमा, एंफीसेमा, इंटरस्टीशियल फेफड़े की बीमारी, फेफड़ों के कैंसर, स्लीप एपनिया, टीबी, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया और कोविद 19 निमोनिया सहित कई सांस और फेफड़ों के बीमारियों के प्रभाव को कम या इन बीमारियों को होने से रोक सकते हैं. 


सांस की तकलीफ को दूर करने के लिए दिन में दो बार एयरोफिट के साथ ट्रेनिंग करने में केवल 5 से 10 मिनट लगते हैं.


सर्दियों मे प्रदूषण बढ़ने के कारण लोगों के फेफड़ों की हालत पहले से ही ख़राब है, इसलिए एयरोफिट प्रो को इस समय लॉन्च करना उपयुक्त समय है.


जो इसे पहली बार खरीदना चाहते है कंपनी उसे इस प्रोडक्ट को अपने प्रीमियम फीचर्स के साथ 30 दिनों के फ्री ट्रायल की सुविधा में देगी.


नवंबर 2022, नई दिल्ली: सांस से सम्बंधित स्वास्थ्य और फिटनेस के लिए देश का प्रमुख फ्यूचरिस्टिक मेडटेक सॉल्यूशन प्रोवाइडर एक्सप्लोर लाइफस्टाइल ने एयरोफिट प्रो नाम की यूनीक रेस्पिरेट्री मसल्स ट्रेनिंग (RMT) डिवाइस लांच की है. एडवांस मेडटेक और मॉडर्न रेस्पिरेट्री मेडिसिन वाला यह दुनिया का पहला पर्सनालाइज्ड डेटा-संचालित स्मार्ट रेस्पिरेटरी ट्रेनिंग सिस्टम है.


एयरोफिट को स्मार्टफोन के साथ भी लिंक किया जा सकता है. इसके अलावा एयरोफिट सांस लेने वाली मांशपेशियों को मज़बूत बना करके, तेज करके और ज्यादा प्रभावी बना करके व्यक्ति की ताकत के अनुसार ब्रीदिंग ट्रेनिंग अनुभव को पर्सनालाइज्ड कर सकता है. खास बात यह है कि डिवाइस सांस खींचने और सांस छोड़ने वाली दोनों मांसपेशियों को ट्रेन करता है जोकि इस डिवाइस का यूनीक फीचर है. इसके अलावा यह डिवाइस डायाफ्राम और अन्य सांस की मांसपेशियों को रेजिस्टेंस ट्रेनिंग के तहत मज़बूत बनाता है. चूंकि रेजिस्टेंस सांस लेने वाली मांसपेशियों में थकान पैदा करता है तो इसके आराम के लिए मांसपेशियों के ऊतकों को बढ़ाया जाता है जिससे सांस लेने वाली मांसपेशियां ज्यादा मजबूत हो जाती हैं. इस वजह से लंबी और गहरी सांस लेने मे सहूलियत होती है. 


इस डिवाइस की मदद से पर्सनालाइज्ड ट्रेनिंग में काफ़ी सुधार होगा. इसकी मदद से उम्र, साइज, लिंग, वरीयता, फेफड़ों की क्षमता और सांस लेने की मांसपेशियों की ताकत आदि की रीडिंग ली जा सकेगी और उसके अनुसार ट्रेनिंग की जा सकेगी. किसी भी ट्रेनिंग को शुरू करने के लिए इन सब चीजों को मापना ज़रूरी होता है. 17 से ज्यादा यूनीक ब्रीदिंग सेशन वाला एयरोफिट प्रो रीयल-टाइम लाइव गाइडेंस और ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म की सुविधा देता है. इसकी मदद से एक्सरसाइज करने वाले व्यक्ति की प्रक्रिया पर नजर रीयल टाइम डेटा के ज़रिए रखी जा सकती है. साधारण रेस्पिरेट्री मसल्स ट्रेनिंग (RMT) के अलावा यह डिवाइस सांस से सम्बंधित अन्य समस्याओं जैसे कि सांस लेने की ताकत, क्षमता, एयोरोबिक लिमिट, और रिलैक्सेशन का भी समाधान करती है.


अन्य फिजिकल एक्टिविटी वाली डिवाइसों की तुलना मे इस डिवाइस को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसे इस्तेमाल करना बहुत ही आसान है. एयरोफिट से दिन में दो बार 5 से 10 मिनट की ट्रेनिंग की ज़रूरत पड़ती है, और फ़िर सांस की कमी की संभावना नगण्य हो जाती है. इस प्रोडक्ट को जो पहली बार खरीदेगा कंपनी उसे इस प्रोडक्ट को अपने प्रीमियम फीचर्स के साथ 30 दिनों के फ्री ट्रायल की सुविधा देगी.


एक्सप्लोर लाइफस्टाइल के सीईओ & फाउंडर श्री पंकज बलवानी ने कहा, "ऐसा देखा गया है कि हम सभी अपनी सेहत पर ध्यान देने के लिए शरीर के अंगों की ट्रेनिंग का ख़ास ख्याल रखते हैं लेकिन अपने सांस लेने वाले अंगो की ट्रेनिंग को हम सभी अक्सर नज़र अंदाज कर देते हैं. यह हम सभी जानते हैं कि किसी भी ट्रेनिंग के लिए सांस से सम्बंधित मांशपेशियों का मज़बूत होना बहुत जरूरी है. किसी भी एक्टिविटी को करने के लिए सांस बहुत महत्त्वपूर्ण होती है. सही ढंग से सांस लेना फेफड़े की बेहतर क्षमता के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है. हम जिम में जाकर केवल एब्स और डोले बनाने पर ही ध्यान देते हैं. जबकि हम अपने डायफ्राम और इंटरकोस्टल्स को ट्रेन करके उन्हे मज़बूत बना सकते हैं और अपने सांस से सम्बंधित अंगो जैसे की फेफड़े को भी ताकत प्रदान कर सकते हैं ताकि भविष्य मे कोई सांस से सम्बंधित बीमारी न हो. नियमित तौर पर होने वाली मांसपेशियों की ट्रेनिंग की तरह एयरोफिट प्रो हमारी सांस लेने वाली मांसपेशियों की ताकत और क्षमता को बढ़ाने के लिए रेजिस्टेंस ट्रेनिंग को अमल में लाता है. सरल शब्दों मे कहा जाए तो एयरोफिट का उपयोग करना एक तरह से हमारे डायफ्राम को जिम करवाना जैसा है."


बलवानी ने आगे बताते हुए कहा, "भारत बहुत ज्यादा प्रदूषण और सांस से सम्बंधित बीमारियों का बोझ झेल रहा है. भारत को न केवल बार-बार दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों मे गिना जाता है बल्कि यह दुनिया की लगभग 30 प्रतिशत सांस वाली बीमारियों घर भी है. दुनिया में फेफड़ों की बीमारी से जितनी भी मौतें होती है, उन कुल मौतों में 10 प्रतिशत मौतें हमारे देश में होती है. कोविड -19 के पहले सालो में महामारी की तुलना में अन्य सांस की बीमारियों जैसे निमोनिया, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. अब कोविड -19 और प्रदूषण के कारण मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है. एयरोफिट प्रो को इस समय लॉन्च करना बहुत ही उपयुक्त है. डिवाइस ने पहले ही कोविड के बाद सांस संबंधी परेशानियों के साथ-साथ सीओपीडी, फेफड़ों के कैंसर और स्लीप एपनिया जैसे अन्य सांस की बीमारियों के मरीजों मे असरदार रिजल्ट दिखाएं है. श्वसन संबंधी समस्याओं को दूर करने के अलावा एयरोफिट का उपयोग रोज ऊर्जा बढ़ाने, हृदय गति को कम करने, एनारोबिक लेवल को बेहतर और नींद में सुधार तथा सम्पूर्ण स्वास्थ्य में सुधार करने में भी किया जा सकता है."

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