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महज़ 22 साल की उम्र में इस लड़की ने खोला कैफ़े, 1 साल में 54 लाख रुपए का रेवेन्यू

22 साल की लड़की ने किया कमाल, 1 साल में कंपनी का रेवेन्यू किया 54 लाख रुपए...

महज़ 22 साल की उम्र में इस लड़की ने खोला कैफ़े, 1 साल में 54 लाख रुपए का रेवेन्यू

Wednesday May 02, 2018 , 6 min Read

 अश्विनी इंजीनियरिंग के ऐकेडमिक बैकग्राउंड से हैं और उन्होंने आईटी स्ट्रीम में बीटेक की डिग्री ली है। कैफ़े शुरू करने से पहले अश्विनी अपने दोस्त और मेंटर प्रणेश के साथ उनके ही स्टूडियो में काम करती थीं। प्रणेश चेन्नई में, स्टूडिया 31 नाम से एक वेडिंग फ़ोटोग्राफ़ी और वीडियो कंपनी चलाते हैं।

अश्विनी

अश्विनी


इतनी कम उम्र में बिना किसी पूर्व अनुभव के बिज़नेस करने के बावजूद सिर्फ़ एक साल में अश्विनी के कैफ़े का रेवेन्यू 54 लाख रुपए तक पहुंच गया और उनका ब्रैंड मुनाफ़े में आ गया। 

अगर किसी क्षेत्र विशेष में काम करने के लिए आपका पैशन गवाही देता है तो बिज़नेस शुरू करने के लिए न तो किसी कोर्स की ज़रूरत होती है और न ही बेशुमार अनुभव की। कुछ ऐसा ही उदाहरण साबित करती है, चेन्नई की अश्विनी श्रीनिवासन की कहानी। अश्विनी सिर्फ 22 साल की हैं और उन्होंने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर नवंबर 2016 में चेन्नई से एक कैफ़े की शुरूआत की थी।

इतनी कम उम्र में बिना किसी पूर्व अनुभव के बिज़नेस करने के बावजूद सिर्फ़ एक साल में अश्विनी के कैफ़े का रेवेन्यू 54 लाख रुपए तक पहुंच गया और उनका ब्रैंड मुनाफ़े में आ गया। अश्विनी ने ट्रैवल और फ़ूड सेक्टर्स में अपनी रुचि को सकारात्मक रूप से आगे बढ़ाया और उन्हें सफलता भी मिली। अश्विनी इंजीनियरिंग के ऐकेडमिक बैकग्राउंड से हैं और उन्होंने आईटी स्ट्रीम में बीटेक की डिग्री ली है। कैफ़े शुरू करने से पहले अश्विनी अपने दोस्त और मेंटर प्रणेश के साथ उनके ही स्टूडियो में काम करती थीं। प्रणेश चेन्नई में, स्टूडिया 31 नाम से एक वेडिंग फ़ोटोग्राफ़ी और वीडियो कंपनी चलाते हैं। इस दौरान ही अश्विनी को अहसास हुआ कि यह काम ही आगे चलकर उनके ऑन्त्रप्रन्योर बनने की कहानी की भूमिका बनेगा।

क्रिएटिव इंडस्ट्री की बारीकियां सीखने के दौरान प्रणेश को अश्विनी के अंदर कुछ ऐसी ख़ास बात दिखी कि उन्होंने अश्विनी को ख़ुद का वेंचर शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रणेश, अश्विनी की क्रिएटिविटी की क्षमता से परिचित थे और इसलिए ही उन्होंने अश्विनी को अपना ख़ुद का वेंचर शुरू करने की सलाह दी। दोनों की दोस्ती काफ़ी पुरानी थी और दोनों ने मिलकर ‘80 डिग्रीज़ ईस्ट’ नाम से एक कैफ़े शुरू करने का फ़ैसला लिया। दोनों ही को खाने-पीने का काफ़ी शौक था और वे अपने लिए एक फ़ूड ब्रैंड भी बनाना चाहते थे।

अश्विनी ने बताया कि कैफ़े का यह यूनीक नाम उनके पार्टनर प्रणेश की पत्नी कृति ने दिया था। अश्विनी कहती हैं, "किसी भी यात्रा की शुरूआत एक टाइमज़ोन से होती है। हमारी शुरूआत चेन्नई से हुई, जिसका लॉन्गीट्यूड 80.1901° ईस्ट है और इसलिए कैफ़े का नाम भी इसके आधार पर ही रखा गया।" कैफ़े खोलने से पहले स्टडी के दौरान अश्विनी को महसूस हुआ कि वेजिटेरियन और नॉन-वेजिटरियन दोनों ही तरह के फ़ूड को परोसने वाले कैफे में अक्सर वेजिटेरियन लोगों के लिए कम ही विकल्प होते हैं। अश्विनी ने इस कमी को पूरा करने का विचार बनाया। उन्होंने एक ऐसा वेज मेन्यू तैयार करने की जुगत शुरू की, जिसमें पर्याप्त वैराएटीज़ और विकल्प हों।

अश्विनी बताती हैं कि उनके कैफ़े में वेजिटेरियन लोगों के लिए कुल 85 आइटम्स के विकल्प हैं। साथ ही, कैफ़े डेली स्पेशल डिशेज़ और कॉम्बोज़ भी ऑफ़र करता है। ये ऑफ़र्स टाइमिंग और सीज़न के आधार पर मिलते हैं। अश्विनी ने जानकारी दी कि खाना बनाने की प्रक्रिया को किफ़ायती बनाने और प्रदूषण से बचने के लिए उनके कैफ़े में सारे उपकरण बिजली से चलते हैं और उन्हीं पर खाना तैयार होता है। अश्विनी और प्रणेश के कैफ़े से जुड़ी एक और ख़ास बात यह है कि यहां पर जितने भी शेफ्स हैं, उन्हें तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों से लाया गया है और अपनी प्रतिभा को साबित करने का प्लेटफ़ॉर्म मुहैया कराया जा रहा है।

अश्विनी ने 8 महीनों तक 38 लोकेशन्स पर विचार किया और पाया कि पिछले तीन से चार दशकों में इन जगहों पर सिर्फ़ परंपरागत साउथ इंडियन और नॉर्थ इंडियन रेस्तरां ही खुले थे। लंबे विचार के बाद अश्विनी इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि बिज़नेस के इस मौके ही उन्हें भुनाना है। आपको बता दें कि लॉन्च होने के एक साल के भीतर ही कैफ़े ने 54 लाख रुपए का रेवेन्यू पैदा किया। अश्विनी मानती हैं कि ट्रैवलिंग करने से मज़ेदार और अच्छे खाने से ज़्यादा संतोषजनक कोई चीज़ नहीं होती। इन दोनों ही फ़ैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए अश्विनी ने अपने रेस्ट्रॉन्ट को ट्रैवल थीम पर डिज़ाइन करवाया। कैफ़े की दीवारों को अलग-अलग देशों के नाम दिए गए हैं और उन देशों के टाइमज़ोन्स के हिसाब से चलने वाली घड़ियां लगाई गई हैं। दीवारों को ट्रैवल और फ़ूड से संबंधित कोट्स से डेकोरेट करवाया गया है।

अश्विनी बताती हैं कि स्कूली बच्चे, परिवार और कॉलेज के लड़के-लड़कियां अक्सर पिकनिक वगैरह के लिए उनके कैफ़े में आते रहते हैं। कैफ़े के मेन्यू में बर्गर, नाचोज़, पीत्ज़ा और देसी फ़्राइज़ के साथ-साथ ईस्ट और वेस्ट की फ़्यूज़न डिशेज़ को भी जगह दी गई है। अश्विनी बताती हैं कि उनके मेन्यू की कुछ ख़ास डिशेज़ में से एक है भेल पास्ता, जो भेलपूरी और पास्ता का फ़्यूज़न है। इसके अलावा बीसे बेले पास्ता भी काफ़ी लोकप्रिय है, जो एक साउथ इंडियन डिश और पास्ता का फ़्यूज़न है। मेन्यू में मैगी और डोसे की भी कई यूनीक वैराएटीज़ उपलब्ध हैं। कैफ़े में दो लोगों के मील की औसत क़ीमत 400-500 रुपए तक आती है।

शुरूआती एक साल की चुनौतियों का ज़िक्र करते हुए अश्विनी बताती हैं कि उनकी टाइमिंग को लेकर घरवाले कई बार ऐतराज़ जताते थे। इसके अलावा, 22 साल की उम्र में बिज़नेस डील करने वाली लड़की को भी लोग कई बार गंभीरता से नहीं लेते थे। अश्विनी कहती हैं कि यह काम उनके लिए बेहद मज़े से भरा हुआ है। अश्विनी बताती हैं कि वह जब भी अपने परिवार या दोस्तों के साथ किसी कैफ़े या रेस्तरां में जाती हैं तो मालिक और शेफ़ के साथ ख़ूब बातें करती हैं और कुछ नया सीखने की कोशिश करती हैं। अश्विनी मानती हैं कि इस तरह की मुलाक़ात से उन्हें बिज़नेस मॉडल्स और इंडस्ट्री के बारे में काफ़ी कुछ सीखने को मिला है।

अश्विनी का कैफे

अश्विनी का कैफे


अश्विनी मानती हैं कि काम करते हुए उन्होंने न जाने कितनी बार ग़लतियां कीं और उनसे सबक लेकर आगे बढ़ीं। उनका यह भी कहना है कि जितना कुछ उन्होंने अभी तक प्रैक्टिकल एक्सपीरिएंस से सीखा है, उतना शायद वह मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के बाद भी नहीं सीख पातीं। अश्विनी के कैफ़े की ग्रोथ पूरी तरह से ऑर्गेनिक है और माउथ पब्लिकसिटी और लगातार मेन्यू में होते बदलावों की बदौलत उनके कैफ़े को लगातार लोकप्रियता और ऑडियंस मिल रहे हैं।

मार्केट रिसर्च के बाद कैफ़े की योजना है कि फ़्रैंचाइज़ मॉडल के ज़रिए बिज़नेस को बढ़ाया जाए। अभी तक कंपनी पूरी तरह से बूटस्ट्रैप्ड है और लगातार बाहरी निवेशकों की तलाश में है। अश्विनी कहती हैं, “कैफ़े बिज़नेस ने मुझे ऐसी बहुत सी चीज़े सिखाई हैं, जो मैं एक आईटी जॉब में कभी नहीं सीख पाती। इस बिज़नेस ने मेरे अंदर के आत्मविश्वास को बढ़ाया है और मुझे सिखाया है कि नेटवर्किंग कितनी महत्वपूर्ण चीज़ होती है।”

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