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मोदी के आदर्श गांव ने कोर्ट, कचहरी को कहा बाय-बाय, 'बापू पंचायत' के तहत होगा निपटारा

ashutosh singh
7th Feb 2016
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मोदी के आदर्श गांव जयापुर में लगती है बापू पंचायत....

आपसी समझौतों के आधार पर समस्याओं को हल करने की कोशिश...

गांव के बड़े बुजुर्गों की मौजूदगी में ग्राम प्रधान लेंगे फैसला...


वाराणसी का जयापुर गांव। शहर से लगभग बीस किमी दूर बसा ये गांव सुर्खियों में है। ये गांव अब किसी के लिए परिचय का मोहताज नहीं है। देश के पीएम नरेंद्र मोदी ने इस गांव को गोद लिया तो गांव की तस्वीर बदल गई। गांव की चमकती गलियां, बेहतर सुविधाओं से युक्त शानदार स्कूल, बैंक, पोस्ट ऑफिस, पीने के पानी की बेहतर व्यवस्था, जी हां, हर वो मूलभूत सुविधाएं जो एक गांव के लिए जरुरी है-आज यहां मौजूद है। यकीनन ये सब कुछ हुआ है पीएम मोदी की बदौलत। गांव में खुशियों ने दस्तक दी तो अब यहां के लोगों की सोच भी बदलने लगी है। जीने का अंदाज बदला तो समाज को देखने का नजरिया खुद ब खुद बदल गया। यही कारण है कि जयापुर को आदर्श गांव बनाने के लिए मोदी के साथ अब गांववाले भी शिद्दत के साथ जुट गए हैं।


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गांव में प्रेम और सौहार्द का ताना बाना बना रहे, इसके लिए गांव के लोगों ने एक अनोखी पहल की है। मकसद है आपसी टकराव का शोर जमाने को सुनाई ना पड़े। गांव के हर छोटे बड़े विवाद को अब गाँव के लोग ही सुलझाएंगे। इन अनूठी पहल को नाम दिया गया है बापू पंचायत। गाँव के प्रधान और बड़े बुजुर्गों की मौजूदगी में गाँव के लोगों के आपसी विवादों को सुलझाया जा रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ा मकसद यह सन्देश देना है कि पीएम मोदी का यह आदर्श गाँव उनके और राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के बताये रास्ते पर चल कर आपसी भाईचारा की मिसाल पेश कर रहा है। इस पंचायत के जरिये गाँव के लोगों के आपसी विवादों को गाँव में ही सुलझाया जायेगा। बड़े मामलों के निस्तारण के लिए आपसी सहमति बनने के बाद उस पर क़ानूनी मुहर भी लगवाई जाएगी।


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गांव के प्रधान श्रीनारायण पटेल ने योर स्टोरी को बताया 

"पीएम का आदर्श गांव होने के नाते हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि गांव का नाम पूरे देश में रोशन हो। पंचायत स्तर पर लोगों को जागरुक किया जा रहा है। गांव के छोटे-छोटे विवादों को आपसी सुलह समझौते के जरिए निबटाने की कोशिश की जा रही है। जो मुकदमे पहले से कोर्ट में हैं उन्हें भी समझौते की शक्ल देने की कोशिश हो रही है ताकि गांव को वाद-विवाद रहित किया जा सके।’’

गांव वालों की मदद के लिए सामाजिक संगठनों के साथ वरिष्ठ लोग भी आगे आ रहे हैं। सेंट्रल बार एसोशिएशन के पूर्व अध्यक्ष के अनुसार जयापुर को वाद-विवाद रहित गांव बनाने के क्रम में ग्रामीणों से बात हो रही है। पेंडिंग केस की लिस्ट अलग-अलग कोर्ट से इकट्ठा की जा रही है। जरुरत पड़ने पर जिला न्यायाधीश से बात कर जयापुर में ही लोक अदालत आयोजित कर सुलह समझौते के आधार पर मुकदमों का निस्तारण किया जाएगा।

बापू पंचायत के पहले दिन दो लोगों के बीच मवेशी विवाद को सुलझाया गया। बापू पंचायत में समाज के सभी वर्गों के पुरुषों और महिलाओं की भागीदारी हो रही है। पंचायत के प्रमुख ग्राम प्रधान होंगे। उनका निर्णय सर्वमान्य होगा। खुद जयापुर के लोगों का मानना है कि बापू पंचायत के जरिए अधिकतर विवाद आसानी से हल हो जाएंगे। दरअसल गाँव में ज्यादातर विवाद खेती की जमीन, आने जाने के रास्ते और रुपयों के लेनदेन को लेकर है। कोर्ट में काम सबूतों के आधार पर होता है। मगर मामला गाँव का होने के चलते सबूत और दस्तावेज का इंतजाम करना जल्दी संभव नहीं होता है और आम तौर पर लोगों का वैमनस्य खूनी रुप ले लेता है। गांव के लोग भी इस पहल का स्वागत कर रहे हैं.....


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गांव के निवासी विश्वनाथ ने बताया, 

"बापू पंचायत एक अच्छी पहल है। यहां बापू पंचायत लगी है अच्छी बात है। हर घर में बर्तन टकराते हैं। लेकिन हमारी कोशिश है कि इसका शोर दूसरे ना सुने। और अगर आपसी समझौते से मामला निबट जाएगा तो कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने से छुटकारा मिल जाएगा।"

सिर्फ गांव के लोग ही नहीं जिले के प्रशासनिक अधिकारी भी इस पहल की सराहना कर रहे हैं। जिलाधिकारी राजमणि यादव के मुताबिक गांव में पंचायतें पहले भी लगती रही हैं। ऐसे में अगर गांव के लोग आपस के मसले खुद सुलझा लेते हैं तो इससे बेहतर क्या हो सकता है। बशर्ते गांव के लोग पंचायत की कार्रवाई कानून का दायरे में करे। जयापुर के ग्राम प्रधान के अनुसार हर रविवार को ये पंचायत लगाई जाएगी। अगर जरुरी हुआ तो कानूनी परामर्श के लिए एक वकील भी पंचायत के दौरान मौजूद रहेगा।

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहते थे कि देश को बेहतर करने की शुरुआत की पहल सबसे पहले ग्राम पंचायत स्तर पर होनी चाहिए। इससे ग्राम पंचायत समृद्ध होगा और देश भी विकास करेगा। गांधी के आदर्शों को ध्यान में रखते हुए जयापुर गांव के लोगों की पहल वाकई सराहनीय है। यह सच भी है कि अगर हमारी पंचायतें गांव के लोगों की समस्याओं का समाधान तर्कसंगत तरीके से करने लगे तो अदालतों को बड़ी राहत मिल सकती है। ज़रूरी यही है कि इसकी निष्पक्षता और पारदर्शिता कायम रहे। वरना पंचायत के नाम पर होने वाले खौफनाक फरमान किसी से छुपा नहीं है। ऐसे में जयापुर गांव से उठी एक आवाज उम्मीद बनकर उभरी है।

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