एडइम्पैक्ट के अनोखे डिजिटलीकरण अभियान से अब तक गांवों के 4000 बच्चे लाभान्वित

By जय प्रकाश जय
March 05, 2020, Updated on : Thu Mar 05 2020 04:01:31 GMT+0000
एडइम्पैक्ट के अनोखे डिजिटलीकरण अभियान से अब तक गांवों के 4000 बच्चे लाभान्वित
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भारत के अभावग्रस्त एवं संसाधनहीन गांवों के डिजिलीकरण के लिए एडइम्पैक्ट कंपनी का एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट झारखंड, बिहार, मेघालय और कर्नाटक तक पहुंच चुका है। एडइम्पैक्ट के इस सौरऊर्जा से संचालित मोबाइल कंप्यूटर प्रयोगशाला अभियान से अब तक देश के चार हज़ार से ज्यादा बच्चे लाभान्वित हो चुके हैं।


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मारुति वैन में डिजिटल स्कूल



डिजिटल इंडिया भारत सरकार की एक पहल है जिसके तहत सरकारी विभागों को देश की जनता से जोड़ना है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिना कागज के इस्तेमाल के सरकारी सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक रूप से जनता तक पहुंच सकें लेकिन इसकी सच्चाई कुछ और लगती है।


तभी तो आज भी देश के एक बड़े हिस्से में न तो टेक्नोलॉजी पहुंच पा रही है, न इंटरनेट सेवाएं, जबकि सरकार की ओर से विगत कुछ वर्षों में देश के सरकारी स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, सरकारी संस्थानों को डिजिटल तकनीकों से लैस करने का पूरा प्रयास किया गया है। इस असफलता के पीछे एक बड़ी वजह बिजली की अनुपलब्धता भी है।


इसी हालात का मुकाबला करने के लिए झारखंड की एडइम्पैक्ट कंपनी ने एक मोबाइल कंप्यूटर प्रयोगशाला विकसित की है, जो सौर्य ऊर्जा द्वारा संचालित है और इसे बिजली की कोई आवश्यकता ही नहीं है। मारुति ईको वैन को छत पर सौर पैनलों द्वारा संचालित एक केवीए इन्वर्टर और बैटरी के साथ फिर से डिजाइन किया गया है।


वाहन के अंदरूनी हिस्सों को पांच लैपटॉप और एक डेमो कंप्यूटर के लिए फिर से डिजाइन किया गया है और इसे वाई-फाई इंटरनेट से लैस किया गया है। इस वाहन में सात छात्र बैठ सकते हैं और कंप्यूटर सीख सकते हैं। सौर्य ऊर्जा उपलब्ध नहीं होने पर सिस्टम में छह घंटे का बैकअप होता है और सौर्य ऊर्जा रहने पर पर इनवर्टर चार्ज होता रहता है।


एडइम्पैक्ट कंपनी के एक्सपर्ट्स की टीम ने तीन चरणों में बच्चों के लिए ट्रेनिंग को डिज़ाइन किया है। सबसे पहले उन्हें कंप्यूटर की मूलभूत जानकारी दी जाती है। उन्हें कंप्यूटर चलाना और उसके बाद अलग-अलग सॉफ्टवेयर जैसे कि एमएसऑफिस आदि के बारे में सिखाया जाता है। इसके बाद इंटरनेट ब्राउज़िंग की ट्रेनिंग दी जाती है। बच्चों को एमएस वर्ड, एक्सेल शीट आदि के साथ-साथ यह भी बताया जाता है कि ईमेल कैसे लिखें और कैसे दूसरों को भेजें। सोशल मीडिया के बारे में उन्हें जागरूक किया जाता है। साथ ही, उन्हें ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करना भी सिखाया जाता है।


मात्र दो साल में उनका प्रोजेक्ट झारखंड, बिहार, मेघालय और कर्नाटक तक पहुँच गया है। उनके इस एक अभियान से अब तक 4 हज़ार से ज्यादा बच्चों को फायदा मिला है।


एडइम्पैक्ट अमेरिका और भारत में पंजीकृत एक शिक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी है, जो अद्वितीय शिक्षण कार्यक्रम तैयार करती है। कंपनी का उद्देश्य एक सरल और किफायती तरीके से ज्ञान प्रदान करके शिक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाना है। कंपनी भारत में कई राज्यों में अपनी परियोजनाएं चला रही है। प्रशिक्षकों की कमी, बिजली और दुर्गम इलाकों तक पहुंच की कठिनाई भी ग्रामीण भारत को डिजिटल साक्षरता एक बड़ा रोड़ा है।


मारुति वैन में डिजिटल स्कूल

मारुति वैन में डिजिटल स्कूल (फोटो क्रेडिट: सोशल मीडिया)

ग्रामीण युवाओं को डिजिटल साक्षरता पर उचित प्रशिक्षण की कमी के साथ भारत में डिजिटल विभाजन बढ़ रहा है जिसके परिणामस्वरूप इंटरनेट का अनुचित उपयोग होता है और व्यावहारिक रूप से ग्रामीण भारत में विकास प्रक्रिया में कंप्यूटर कार्यक्रमों और इंटरनेट का कोई उपयोग नहीं होता है।


कंपनी के सीनियर मैनेजर सुब्रता मंडल कहते हैं कि इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों के बच्चों को कंप्यूटर, इंटरनेट और अन्य तकनीकों का सही इस्तेमाल सिखाना है ताकि इनकी मदद से वह अपने आने वाले भविष्य की बेहतर नींव रख सकें। झारखंड से प्रोजेक्ट सूर्य किरण की शुरुआत की गई।


अब यह पूरे भारत में फ़ैल चुका है। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत मारुति इको वैन को एक मोबाइल कंप्यूटर लैब में रीडिज़ाइन किया है। हर एक वैन में बच्चों को पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षक रखे गए हैं।


एडइम्पैक्ट के निदेशक सैनविल श्रीवास्तव बताते हैं कि वाहन में एक ड्राइवर और प्रशिक्षित पेशेवर होता है, जो गांवों में जाकर ग्रामीण युवकों को कंप्यूटर की मूल बातें, इंटरनेट, ईमेल, साइबर सुरक्षा, उत्पादकता कार्यक्रम और नकद रहित लेनदेन के उपयोग करना सिखाता है। कंपनी बुनियादी सरकारी योजनाएं भी प्रदान करने वाली है। यूआईडी पंजीकरण, पैन पंजीकरण, प्रमाणपत्र, आवेदन और परिणाम प्रिंटिंग जैसे भविष्य में ग्रामीण नागरिकों को सेवाएं, ताकि उन्हें कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।


परियोजना सूर्य किरण के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए एडइम्पैक्ट ने डॉन बोस्को के साथ भी भागीदारी की है। डॉन बोस्को के फादर नोबल जॉर्ज का कहना है कि परियोजना सूर्य किरण वाहन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और व्यावहारिक ज्ञान के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करने में मदद करेगी।


डिजाइन और कार्यक्षमता में लचीलापन परियोजना सूर्य किरण वाहन को मोबाइल स्वास्थ्य केंद्र, साइबर कैफे, आईटी कक्षा के रूप में उपयोग करने और सामुदायिक प्रशिक्षण रखने में सक्षम बनाता है।


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