साहित्य वह है, जिसमें आम आदमी हो : चेतन भगत

By PTI Bhasha
October 17, 2016, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:17:15 GMT+0000
साहित्य वह है, जिसमें आम आदमी हो : चेतन भगत
साथ ही चेतन भगत का मानना है कि हमारे समाज में ‘नारीवाद’ को लेकर लोगों में काफी भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जिसे बड़े पैमाने पर दुरूपयोग करते हुए गलत तरीके से परिभाषित किया जाता है।
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कैंपस उपन्यास की श्रेणी को जन्म देने वाले जानेमाने लेखक चेतन भगत का कहना है कि साहित्य के क्षेत्र में वे संभ्रांत वर्ग की दादागिरी से संघर्ष कर रहे हैं।

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चेतन के मुताबिक उनकी किताबों को आमतौर पर कम गंभीर साहित्य बताकर खारिज कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अच्छा साहित्य क्या है, यह तय करने का हक विशेषाधिकार प्राप्त गिने-चुने लोगों को नहीं बल्कि समाज को है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा देश संभ्रांतवाद पर चलता है। जब उपनिवेश का दौर खत्म हुआ तो विशेषाधिकार प्राप्त लोगों ने अच्छी पसंद और संस्कृति के मुद्दों पर चर्चा को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की। वे नहीं चाहते कि छोटे शहर का कोई व्यक्ति आए और यह कहे, कि मैं वही फैसला लूंगा जो मुझे पसंद है। 

चेतन : वे कौन होते है तय करने वाले। साहित्य क्या है, यह समाज तय करेगा।

हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि उनकी किताबें ‘‘लोकप्रिय साहित्य’’ हैं, वे ‘‘अभिजात्य किस्म की किताबें’’ नहीं हैं।

चेतन भगत : साहित्य में संभ्रांत वर्ग की दादागिरी का सामना कर रहा हूं।

वे कहते हैं, ‘‘तुलना करने की जरूरत ही क्या है? यह तो ऐसा है कि आप ‘द कपिल शर्मा शो’ देखते हुए कह रहे हों कि ‘यह बीबीसी क्यों नहीं है?’’ छह किताबें लिख चुके चेतन की नई किताब ‘वन इंडियन गर्ल’ आई है। चेतन के मुताबिक साहित्य वह है जो समाज का आईना हो, जिसमें ना केवल सभ्रांत वर्ग हो बल्कि आम आदमी भी हो। बैंकर से लेखक बने चेतन भगत का कहना है कि यह समय नारीवाद पर विचार-विमर्श और इस बारे मे जागरूकता फैलाने के लिए उपयुक्त है। 

चेतन भगत के ताजा उपन्यास वन इंडियन गर्ल की कहानी एक लड़की के आसपास घूमती है। भगत ने कहा, ‘‘मैं खुशनसीब हूं। मुझे लगता है कि यह बिलकुल सही समय है। नारीवाद एक ऐसा मामला है, जिसका समय आ गया है। निर्भया कांड के बाद महिला अधिकारों का मामला जोर पकड़ गया है। भगत ने यह भी कहा, कि लोग इन मुद्दों को समझना चाहते है। पिंक और क्वीन जैसी फिल्में अच्छी चल रही हैं और मुझे लगता है कि इन मसलों पर बात करने का यह सही समय है। इस 42 वर्षीय लेखक का कहना है कि ‘नारीवाद’ को लेकर लोगों में काफी भ्रम की स्थिति बनी हुई है और इस शब्द का बड़े पैमाने पर दुरूपयोग और इसे गलत तरीके से परिभाषित किया जाता है।

चेतन का मानना है, कि "अब और समझ की जरूरत है ताकि इस नारीवाद शब्द को लेकर बना भ्रम दूर हो सके। नारीवादी की छवि ऐसी है कि एक ऐसा व्यक्ति जो पुरूषों के खिलाफ राय रखता हो। दरअसल इसका मतलब सिर्फ इतना सा है कि महिलाओं को भी पुरूषों की तरह अपने सपनों को हासिल करने का हक होना चाहिए।" 

चेतन : आप एक ऐसी पारंपरिक लड़की हो सकती हैं, जो चाहती है कि उसका पति उसे प्यार करे, उसका ब्वॉय फ्रेंड उसे फोन करे और फिर भी आप नारीवादी हो सकती है। नारीवादी होने के लिए कोई अन्य प्रजाति बनने की जरूरत नहीं है।

चेतन भगत की वन इंडियन गर्ल अपने आप में काफी बोल्ड किताब है। इसमें एक ऐसी लड़की की कहानी है जो भारतीय समाज की आदर्श लड़की वाली परिकल्पना को तोड़ती है।

वन इंडियन गर्ल की नायिका राधिका मेहता का किरदार लिखने से पहले चेतन भगत ऐसी सैकड़ो महिलाओं से मिले जो घर और दफ्तर के कामों के बीच सामंजस्य बिठाती हैं।

चेतन भगत का मानना है कि उनके उपन्यास बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी पढ़े जाते हैं, इसलिए पाठकों को जोड़ने की सबसे ज्यादा जरूरत थी। लेखक की पिछली किताब हाफ गर्लफ्रेंड पर एक फिल्म भी बन रही है, जिसमें अर्जुन कपूर और श्रद्धा कपूर मुख्य भूमिका में हैं। इससे पहले भी चेतन भगत की किताब 2 स्टेट्स: द स्टोरी ऑफ माय मैरिज पर भी फिल्म बन चुकी है।

चेतन ने ‘फाइव प्वांइट समवन’, द थ्री मिस्टेक्स ऑफ माइ लाइफ’ सहित कई अन्य किताबें भी लिखी है।

इस उपन्यास में चेतन भगत पहली बार एक महिला के परिपेक्ष्य से लिख रहे हैं। लेखक का मानना है कि यह काम काफी चुनौतीपूर्ण था और उन्होंने इस कहानी को लिखने के बारे में सात साल पहले सोचा था, लेकिन उस समय वह इसे लिखने का साहस नहीं जुटा पाए क्योंकि ऐसा करने के लिए अनुभव का होना बहुत जरूरी था।

साथ ही बेस्टसेलर किताबों के लेखक चेतन भगत को लगता है कि सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर दबंगों का श्मशान है। 

सोशल मीडिया में अक्सर चेतन भगत पर निशाना साधा जाता है। उन्होंने सेलिब्रिटीज के खिलाफ लामबंद गिरोह ट्विटराटी पर हमला बोलते हुये कहा कि उनकी कार्रवाई भीड़ से उपजी मानसिकता को प्रदर्शित करती हैं। भगत के शब्दों में यह दबंगों का श्मशान बन गया है। टिप्पणियों के कारण ट्विटर एक नकारात्मक चीज हो गयी है। सेलिब्रिटी लोगों ने इसीलिए सोशल मंच पर ज्यादा बातचीत करना बंद कर दिया है। 

चेतन के अनुसार अब सेलिब्रिटीज़ नकारात्मकता से बचने के लिए बहुत तेजी से इंस्टाग्राम जैसे अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म की ओर बढ़ रहे हैं। 

चेतन भगत : ट्विटर अब अपने आखिरी दौर में पहुंच गया है।

चेतन के अनुसार, "ट्विटर समाप्त होने वाला है और अगले पांच साल में यह ऑरकुट और माईस्पेस की तरह ही पूरी तरह से बंद हो जाएगा, क्योंकि अब लोग इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया की ओर जा रहे हैं।" 

ट्विटर पर करीब 90 लाख फॉलोवरों का आंकड़ा छूने वाले चेतन ने कहा, "यहां केवल लेखक और मीडियाकर्मी ही हैं। सभी अभिनेता और सेलिब्रिटी पहले ही जा चुके हैं और अब वह इंस्टाग्राम पर सक्रिय हैं।" हालांकि भगत अपनी किताबों के प्रोत्साहन और अपने स्वयं के प्रचार के लिए ट्विटर पर सक्रिय बने रहेंगे। और आखिर में वह कहते हैं, कि जब मेरी किताब छप जाएगी, तब जान-बूझकर मैं ट्विटर पर आउंगा। हालांकि मुझे पता है कि यह एक सुरंग जैसा माध्यम है और यह केवल नकारात्मक ही होगा। जब लोग नकारात्मक लिखने और मजाक अथवा ध्यान खींचने के लिए मेरा नाम इस्तेमाल करते हैं, तब मैं भी अपने प्रचार के लिए इस मंच का इस्तेमाल करूंगा।