महिला दिवस पर इन 7 सुपर वुमेन्स ने संभाला पीएम मोदी का सोशल मीडिया अकाउंट

By कुमार रवि
March 10, 2020, Updated on : Thu Apr 08 2021 10:45:43 GMT+0000
महिला दिवस पर इन 7 सुपर वुमेन्स ने संभाला पीएम मोदी का सोशल मीडिया अकाउंट
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के दिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अनोखी पहल की। #SheInspiresUs पहल के तहत उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स बारी-बारी से 7 ऐसी महिलाओं को सौंपे जिनके कामों ने बाकी लोगों को प्रेरित किया है। इनमें कोई फूड बैंक चलाती हैं तो कोई जल संरक्षण के लिए काम कर रही हैं। किसी का हौसला दूसरों के लिए प्रेरणा है तो कोई अपनी विलुप्त होती कला के प्रचार-प्रसार में लगी हैं। यहां हम आपको उन सभी 7 महिलाओं के बारे में बता रहे हैं जिन्हें पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स सौंपे...


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फोटो क्रेडिट: twitter



1स्नेहा मोहन दास: गरीबों और बेघरों के लिए चलाती हैं फूड बैंक

स्नेहा मोहन दास 'फूड बैंक इंडिया' नाम से एक फूड बैंक चलाती हैं। उनका उद्देश्य देश में व्याप्त भुखमरी से लड़ना और देश को भुखमरी मुक्त बनाना है। स्नेहा ने चेन्नई बाढ़ से पहले साल 2015 में इस फूड बैंक की स्थापना की थी और लोगों से ऐसे ही फूड बैंक खोलने की अपील की। उनकी अपील का असर है कि आज देश में कुल 18 फूड बैंक संचालित हैं और एक फूड बैंक तो अफ्रीका में भी है। उनका लक्ष्य है कि देश में कोई भी व्यक्ति रात को भूखा ना सोए और अपने इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए वह दिन-रात लगी रहती हैं।


वह बताती हैं कि उन्हें फूड बैंक खोलने की प्रेरणा अपनी मां से मिली। वह लोगों से कहती हैं अपने घर में थोड़ा एक्स्ट्रा खाना पकाएं और बेघरों को दें। स्नेहा ने बताया कि वे अपनी सफलता का सारा क्रेडिट अपने वॉलिंटिअर्स को देती हैं जिनकी बदौलत आज उनके काम को पहचान मिली है।

2. मालविका अय्यर: बम धमाके में हाथ गंवाए लेकिन हौसला नहीं

स्नेहा मोहन दास के बाद पीएम ने मालविका अय्यर को अपना अकाउंट सौंपा। मालविका हौसले और जज्बे की जीती-जागती मिसाल हैं। राजस्थान के बीकानेर में हुए बम धमाकों में मालविका ने अपने दोनों हाथ गंवा दिए थे। उस वक्त वह महज 13 साल की थीं। हाथों के साथ-साथ उनके दोनों पैर भी बुरी तरह जख्मी हो गए थे। इस दर्दनाक हादसे के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। इन दिनों वह एक मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर जगह-जगह अपने अनुभव साझा करती हैं और दिव्यांगों के साथ होने वाले भेदभाव को दूर करने की दिशा में काम कर रही हैं। 


पीएम मोदी के अकाउंट पर एक विडियो साझा करते हुए वह लिखती हैं,

'स्वीकार करना वह सबसे बड़ा इनाम है जो हम खुद को दे सकते हैं। हम अपने जीवन को कंट्रोल नहीं कर सकते लेकिन हम निश्चित तौर पर जीवन के प्रति अपने नजरिए को नियंत्रित कर सकते हैं। अंत में आकर सिर्फ यही मायने रखता है कि हमने अपनी चुनौतियां का सामना किस तरह से किया है।'

3. आरिफा: वह महिला जो कश्मीर की पारंपरिक शिल्प कला के लिए बनीं 'संजीवनी'

पीएम मोदी की #SheInspiresUs पहल में कुछ देर के लिए कश्मीर की आरिफा ने भी पीएम के अकाउंट को संभाला। वह कश्मीर की पारंपरिक शिल्प कला को पुनर्जीवित करने में लगी हैं। उन्होंने नमदा नामक कश्मीरी पारंपरिक गलीचा को दोबारा से जीवित करने के लिए तीन मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों की स्थापना की। 33 साल की आरिफा ने श्रीनगर के क्राफ्ट डेवेलपमेंट इंस्टीट्यूट (सीडीआई) से पीजी करने के बाद नमदा रिवाइवल परियोजना के लिए काम किया। वह 'नारी शक्ति पुरस्कार' से भी सम्मानित हो चुकी हैं। 


उन्होंने नमदा गलीचों को अलग पहचान दी। इन गलीचों का इस्तेमाल खासतौर पर सर्दियों में होता है। वह कहती हैं कि जब परंपरा के साथ आधुनिकता मिलती है तो चमत्कार होता है। पीएम मोदी का अकाउंट संभालने को लेकर वह कहती हैं कि इससे मेरा मनोबल बढ़ा है। उनकी इस पहल का ही असर है कि उनके साथ की महिला कारीगरों की जीवनशैली भी बदली है। उन्हें अच्छा वेतन मिलने लगा है।

4. कल्पना रमेश: 'जल ही जीवन है' की तर्ज पर जल संरक्षण में सालों से जुटीं 

तीसरे नंबर पर पीएम मोदी ने कल्पना रमेश को अपना अकाउंट सौंपा। वह पिछले 8 सालों से जल संरक्षण की दिशा में काम कर रही हैं। कल्पना पेशे से एक आर्किटेक्ट हैं और एक दशक पहले वह अमेरिका से हैदराबाद शिफ्ट हुईं। शहर में पानी के लिए लोगों की बोतलों पर निर्भरता देख वह काफी चिंतित हुईं। वहां से उन्हें आइडिया आया और उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर घर की छत पर ही बारिश का जल संचय (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) करना शुरू कर दिया। फिर उन्होंने घर के सिंक और बेसिन में वेस्ट होने वाले पानी को पौधों को सींचने के काम में लेना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उनकी इस पहल को सरकार का समर्थन मिलना शुरू हुआ।


पीएम मोदी के अकाउंट से ट्वीट कर उन्होंने बताया,

'एक योद्धा बनें लेकिन अलग तरह के। एक वॉटर वॉरियर (पानी के लिए योद्धा) बनें। क्या आपने कभी पानी की कमी के बारे में सोचा है? हम सभी साथ मिलकर अपनी आने वाली पीड़ी के भविष्य के लिए जल संरक्षण के लिए काम कर सकते हैं। यहां मैं अपना किरदार अदा कर रही हूं।'

5. विजया पवार: बंजारा हस्तकला को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में लगीं  

पीएम मोदी की नई पहल की कड़ी में नंबर आया महाराष्ट्र की विजय पवार का, विजया ने बंजारा हस्तकला के क्षेत्र में अलग ही पहचान बनाई है। विजया ने बताया कि उन्होंने अपने पति से यह कला सीखी थी। साल 2000 में उनकी शादी हुई। बाद में रूचि बढ़ने के कारण विजया ने इस क्षेत्र में काम करना शुरू किया। यह महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों के बंजारा समुदाय की हस्तशिल्प कला है। इस कला के उत्थान के लिए वह पिछले 20 सालों से काम कर रही हैं और उनके साथ हजारों महिलाएं जुड़ चुकी हैं।


वह बताती हैं कि साल 2000 से 2004 तक उन्होंने पारंपरिक चीजों का डुप्लिकेट बनाया। बाद में साल 2004 में एक एनजीओ के तौर पर पंजीकरण कराया। विजया आगे कहती हैं कि केंद्र सरकार की अंबेडकर हस्तशिल्प योजना के तहत उनके एनजीओ से 682 से अधिक महिलाओं ने 5 सालों तक ट्रेनिंग ली है। पीएम मोदी के अकाउंट से ट्वीट कर विजया ने कहा,

'गोरमाटी कला को बढावा देने के लिए पंतप्रधान नरेंद्र मोदी जी ने न केवल हमें प्रोत्साहित किया बल्कि हमारी आर्थिक सहायता भी की। ये हमारे लिए गौरव की बात है। इस कला के संरक्षण के लिए मैं पूरी तरह से समर्पित हूं और महिला दिवस के अवसर पर गौरवान्वित महसूस कर रही हूं।'

6. कलावती देवी: खुले में शौच से मुक्त करने के लिए अपने दम पर बनवा दिए 4000 शौचालय 

फिर नंबर आया कानपुर की कलावती देवी का जो पिछले 32 सालों से खुले में शौच के खिलाफ मुहिम चला रही हैं। अपनी पहल के दम पर 58 साल की कलावती अब तक 4000 से अधिक शौचलय बनवा चुकी हैं। वह सीतापुर जिले में रहती थीं फिर 13 साल की उम्र में शादी के बाद वह अपने पति जयराज सिंह के साथ राजपुरवा की मलिन बस्ती में आ गईं। उन्होंने पढ़ाई भले ही नहीं की हो लेकिन उन्होंने अपने दिमाग में कुछ करने की ठान रखी थी। जिस मलिन बस्ती में वह रहती थीं, वह गंदगी के ढेर पर था। 500 से अधिक लोगों की आबादी वाली इस बस्ती में एक भी शौचालय नहीं था। हर कोई खुले में शौच को जाता था।


वह लिखती हैं,

'मैं जिस जगह पे रहती थी, वहां हर तरफ गंदगी ही गंदगी थी। लेकिन दृढ़ विश्वास था कि स्वच्छता के जरिए हम इस स्थिति को बदल सकते हैं। लोगों को समझाने का फैसला किया। शौचालय बनाने के लिए घूम-घूमकर एक-एक पैसा इकट्ठा किया। आखिरकार सफलता हाथ लगी।'


इसे बदलने के लिए वह एक लोकल एनजीओ से जुड़ीं। फिर वहां पर सामुदायिक शौचालय के निर्माण में लगीं। उन्होंने मलिन बस्ती का पहला सामुदायिक शौचालय बनाया। इसके बाद उन्होंने बाकी बस्तियों के लोगों से बात की और कई अन्य जगहों पर शौचालयों की नींव रखी। इसके लिए उन्होंने लोगों को समझाया। भारत सरकार भी देश को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए कई प्रयास कर रही है। सरकार के अलावा कलावती जैसी शख्सियतों के कारण ही भारत का खुले में शौच से मुक्त होने का सपना पूरा हो सकेगा।

7. वीणा देवी: पलंग के नीचे की मशरूम की खेती, सीएम से हो चुकीं सम्मानित  

पीएम मोदी के सोशल मीडिया अकाउंट संभालने में आखिरी नंबर बिहार की वीणा देवी का रहा। बिहार के मुंगेर की रहने वालीं वीणा देवी मशरूम की खेती कर फेमस हुई हैं। पीएम मोदी के अकाउंट से ट्वीट कर वीणा देवी ने बताया, 'जहां चाह वहां राह। इच्छाशक्ति से सब कुछ हासिल किया जा सकता है। मेरी वास्तविक पहचान पलंग के नीचे एक किलो मशरूम की खेती से शुरू हुई थी लेकिन इस खेती ने मुझे न केवल आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाकर एक नया जीवन दिया।'


वह बताती हैं कि कैसे महिलाएं खेती में अपना नाम कर रही हैं। वीणा देवी साल 2013 से मशरूम की खेती कर रही हैं। शुरुआत में उन्होंने अपने पैसों से मशरूम के 1 किलो बीज खरीदे। उनके पास जगह की कमी थी तो वह जिस पलंग पर सोती थीं, उसी के नीचे मशरूम की खेती करने लगीं। वह बताती हैं कि जब खेती की बात आसपास में फैली तो लोग मेरी फोटो खींचने लगे। उनके काम से खुश होकर उन्हें मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया और गांव का मुखिया भी चुना गया। अभी तक वह 20 से अधिक गांवों में जाकर महिलाओं को मशरूम की खेती के बारे में ट्रेनिंग दे चुकी हैं। 


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