लोगों की ज़िंदगी रोचक बनाने की कहानी है 'लेंसब्रिक्स'

    एक महिला उद्यमी होने के नाते अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है - राजी कन्नान

    12th Jun 2015
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    इमेजिंग तकनीकि के प्रति उनके जुनून का अक्स तब दिख जाता था जब वह एनिमेशन के जरिए घर के खाली कोनों को भरने के बारे में विमर्श करती थीं। अपने काम के प्रति उनके उत्साह की तुलना उनकी खामोशी से ही हो सकती है। बच्चों की तरह मंद-मंद मुस्कान के साथ काम करने वाली लेंसब्रिक्स की फाउंडर व सीटीओ राजी कन्नान, इमेजिंग इंडस्ट्री का वह नाम हैं जिन्होंने अपने काम से तमाम लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

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    लंदन में इमेज सेंसर्स सम्मेलन में शामिल होकर भारत वापस आने के बाद से वह अपने सपने के साथ जी रही हैं। किसी की काम की शुरुआत में बड़ी उम्मीद स्वाभाविक नहीं है। लेकिन दिसंबर 2013 में उनकी सोच ने हकीकत की शक्ल ली जब राजी टांग टूटी होने के बावजूद अपना प्रोडक्ट लेकर निवेशकों के पास बंगलुरू से बॉस्टन तक का लंबा सफर तय करके गईं। इसमें केवल तीन दिन का वक्त लगा जबकि कंपनी मात्र दो महीनों में रजिस्टर्ड हो गई।

    पॉवर पैक्ड टीम

    विभिन्न आइडियाज के साथ एक साथ कई टीम मेंबर्स का मिलना लेन्सब्रिक्स के लिए अहम इत्तेफाक साबित हुआ। नोकिया से आए प्रणब मिश्रा लेन्सब्रिक्स के सह संस्थापक बने। उन्होंने कई रिस्की प्रोजेक्ट्स पर एक साथ काम किया। राजी कहती हैं कि जब मैंने अपनी टीम के साथ नोकिया में इमेज व वीडियो सर्विसेज पर काम करने की बात कही तो प्रणब हामी भरने वाले सबसे पहले शख्स थे। वह हमेशा से ही खतरों से खेलने वाले व स्पष्टवादी विचारधारा वाले रहे। मैंने और प्रणब ने एक साथ मिलकर तमाम प्रोडक्ट्स बाजार में उतारे जिनमें हमारी खूबियों का बखान भी था।

    राजी कन्नान

    राजी कन्नान


    कुछ वर्षों तक ये दोनों स्टार्टअप कॉन्सेप्ट पर बहस करते रहे लेकिन इसने हकीकत की शक्ल तब ली जब उनकी मुलाकात रमेश रासकर से हुई। वह एमआईटी मीडिया लैब के कैमरा कल्चर शोध समूह में कार्यरत थे। उनके खुद के 50 पेटेंट थे। राजी ने रासकर के लेन्स पर व्हाइटपेपर के आइडिया को प्रयोग मे लाया। अनुभव व दूरदृष्टि के मामले में रमेश राजी से कहीं आगे थे। वह कहती हैं कि उनकी टीम मेंबर्स के पास पीएचडी की डिग्री नहीं थी और इसका कोई खास मतलब भी नहीं था। प्रौद्योगिकी सलाहकार के रूप् में रासकर का टीम में होना बड़ी उपलब्धि थी।

    बिजनेस का नजरिया

    राजी कहती हैं कि हर एक कैमरा स्मार्ट कैमरा हो सकता है ठीक वैसे ही जैसे हर एक फोन स्मार्टफोन हो गया है। लेन्सब्रिक्स का उद्देश्य ग्राहकों की जिंदगी संवारना है। जो कि घरेलू बाजार में हार्डवेयर व सॉफ्टवेर निदान के मेल से संभव है। यह प्रामाणिक है कि एक इंसान 17 मिनट से ज्यादा किसी वीडियो पर ध्यान नहीं लगा सकता। इसलिए हमें कैमरों के इस्तेमाल के तरीके के विकल्प को चुनना होगा। लेन्सब्रिक्स ग्राहकों को यह सुविधा मुहैया कराता है।

    टेक ऑफ

    पीसीएच हार्डवेयर एसेलेटर प्रोग्राम को चुनना एक सही निर्णय साबित हुआ। निर्माण, वितरण, पैकेजिंग से लेकर डिजाइन की जरूरतों व पूंजी के लिहाज से किसी हार्डवेयर कंपनी के लिए बड़ी चुनौती रहती है। टीम ने अपने प्रोडक्ट्स को सही प्लेटफॉर्म पर प्रचार करने में कभी हिचक नहीं दिखाई। राजी कहती हैं कि आपकी लोगों में जितनी पहुंच होगी आप उतना ही बेहतर होंगे। हमारा आपसी सांमजस्य ही हमारी एकता का प्रतीक है। 2015 के अंत तक प्रोडक्ट पब्लिक लांच के लिए तैयार है

    एक महिला उद्यमी

    बीते कुछ महीनों से राजी अपनी आठ वर्षीय बेटी के साथ सैन फ्रांसिस्को में हैं। वह बच्ची को वक्त न दे पाने के लिए अफसोस जताती हैं। हालांकि, उन्हें इस बात की खुशी भी है कि उन्हें वहां अपने पति, माता-पिता का साथ मिल रहा है। कंपनी की शरुआत से पहले राजी के परिवार वालों को संदेह था लेकिन धीरे-धीरे उनका संदेह विश्वास में परिवर्तित हो गया। राजी कहती हैं कि एक महिला उद्यमी होने के नाते अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। वह महिलाओं को चिंतामुक्त होकर स्मार्टली काम करने की नसीहत देती हैं। वह अन्य उद्यमियों को सलाह देते हुए कहती हैं कि अगर हम सब यह यकीन कर लें कि बिजनेस को परोपकार से विस्तारित किया जा सकता है तो हम न सिर्फ बेहतर प्रोडक्ट्स के साथ बाजार में होगे बल्कि हम एक बेहतर समाज बनाने में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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