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दुनिया का सबसे युवा देश भारत क्यों जूझ रहा है बाल मजदूरी की समस्या से?

आज बाल मजदूरी की वजह से न जाने कितने बच्चों का बचपना खत्म हो रहा है। यह समस्या धीरे-धीरे हमारे देश की नींव को खोखली कर रही है। गरीबी, लाचारी और माता-पिता की प्रताड़ना के चलते आज भी देश के कई ऐसे बच्चे हैं जो बाल मजदूरी के दलदल में फंसे हुए हैं।

दुनिया का सबसे युवा देश भारत क्यों जूझ रहा है बाल मजदूरी की समस्या से?

Tuesday June 20, 2017 , 5 min Read

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुमान के मुताबिक विश्व में 21 करोड़ 80 लाख बालश्रमिक हैं। अशिक्षा, गरीबी और रोजगार के अवसरों की कमी जैसे कई कारणों की वजह से भारत में अभी भी बाल श्रम पूरी तरह से खत्म नहीं हो पाया है। बाल श्रम निषेध के एक हफ्ता बीतने के बाद हम जानने की कोशिश करते हैं कि आज भी ये समस्या क्यों है। 

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हर साल 12 जून को बाल मजदूरी के प्रति विरोध और जगरूकता फैलाने के मकसद से बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। 2001 में भारत में बाल मजदूरों की संख्या लगभग सवा करोड़ के आस-पास थी। लेकिन आज भी भारत में यह संख्या 42 लाख के आसपास है।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुमान के मुताबिक विश्व में 21 करोड़ 80 लाख बालश्रमिक हैं। अशिक्षा, गरीबी और रोजगार के अवसरों की कमी जैसे कई कारणों की वजह से भारत में अभी भी बाल श्रम पूरी तरह से खत्म नहीं हो पाया है। बाल श्रम निषेध बीतने के बाद हम जानने की कोशिश करते हैं, कि आज भी ये समस्या क्यों है। 2020 में भारत दुनिया का सबसे युवा देश होगा। यानी सिर्फ 3 साल बाद हमारे देश में सबसे ज्यादा युवा आबादी होगी। लेकिन अगर बाल मजदूरी जैसी समस्या यूं ही बनी रही, तो युवा शक्ति किसी काम की नहीं रहेगी। 2016 मई में वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक हर पांच में से एक भारतीय गरीबी की मार से पीड़ित है। देश की 80 फीसदी ग्रामीण आबादी गरीबी का दंश झेल रही है।

बाल श्रम निषेध दिवस की शुरुआत 2002 में हुई थी। आज बाल मजदूरी की वजह से न जाने कितने बच्चों का बचपना खत्म हो रहा है। यह समस्या धीरे-धीरे हमारे देश की नींव को खोखली कर रही है। गरीबी, लाचारी और माता-पिता की प्रताड़ना के चलते आज भी देश के कई ऐसे बच्चे हैं जो बाल मजदूरी के दलदल में फंसे हुए हैं। इन बच्चों का समय स्कूल में कॉपी-किताबों और दोस्तों के बीच नहीं बल्कि होटलों, घरों, कंपनियों में बर्तन धोने और झाडू-पोछा करने में बीतता है। न जाने कितने ऐसे बच्चे हैं, जिनका बचपन बाल मजदूरी की बेड़ियों में जकड़ा हुआ है।

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भारत में हैं सबसे ज्यादा बाल मजदूर

देश में बाल मजदूरी के हालात में सुधार लाने के लिए सरकार ने साल 1986 में चाइल्ड लेबर ऐक्ट बनाया था जिसके तहत बाल मजदूरी को अपराध माना गया। इसके बावजूद देश के हर गली-मोहल्ले और चौराहे पर कई बाल मजदूर काम करते हुए नजर आ जाते हैं। आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में करीब 215 मिलियन ऐसे बच्चे हैं जिनकी उम्र 14 साल से भी कम है और वे बाल मजदूरी करने को मजबूर हैं। भारत की बात करें तो यहां हालात और भी बदतर होते जा रहे हैं क्योंकि दुनिया भर की तुलना में सबसे ज्यादा बाल मजदूर भारत में ही हैं।

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<h2>कैलाश सत्यार्थी</h2>

कैलाश सत्यार्थी


देश में कई एनजीओ बाल मजदूरी के खिलाफ अपनी मुहिम चला रहे हैं। भारत में कई संगठनों ने बाल मजदूरी की समस्या को दूर करने के तमाम सकारात्मक प्रयास किए हैं। कैलाश सत्यार्थी उनमें से एक ऐसे ही व्यक्ति हैं जिन्होंने अपने बचपन बचाओ आन्दोलन से दुनिया भर के 85,000 से अधिक बच्चों को बाल तस्करी और बाल मजदूरी के कुचक्र से आजादी दिलाई है।

कैलश सत्यार्थी को अपने काम के लिए नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। लेकिन इन प्रयासों के बाद भी बालश्रम को पूरी तरह से समाप्त नहीं किया जा सका है। इन संगठनों के मुताबिक 50.2 फीसदी ऐसे बच्चे हैं जो हफ्ते में सातों दिन काम करते हैं। 53.22 फीसदी बच्चे यौन प्रताड़ना के शिकार हो रहे हैं। जबकि 50 फीसदी बच्चे शारीरिक प्रताड़ना के शिकार हो रहे हैं। अभी देश के विभिन्न क्षेत्रों में छोटे स्तर पर होटल, घरों व फैक्ट्री में काम कर या अलग अलग व्यवसाय में मजदूरी कर हजारों बाल श्रमिक अपने बचपन को खत्म कर दे रहे हैं, जिन्हें न तो किसी कानून की जानकारी है और न ही रोजगार कमाने का कोई दूसरा तरीका। उद्योग धंधों में लड़कियां कार्यरत हैं बाकी सभी समस्याओं के साथ यौन उत्पीडन उनकी दिनचर्या का एक अंग बन जाता है।

कैसे खत्म होगी बाल मजदूरी

देश से बाल मजदूरी का खात्मा करने के लिए सबसे पहले देश से गरीबी को खत्म करना जरूरी है। इसके लिए सरकार को कुछ और कड़े कदम उठाने होंगे। लेकिन सिर्फ सरकार के कड़े कदम उठाने से इस समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके साथ ही हम सभी नागरिकों को भी अपना सहयोग देना होगा। हालांकि सरकार को भी नीतियों में बदलाव करना पड़ेगा। इसके लिए देश के हर नागरिक को बाल मजदूरी के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। इसे रोकने के लिए हम सभी को प्रयास करना पड़ेगा, हम सभी की जिम्मेदारी है कि बाल शोषण को समाज से खत्म करें और जहां भी बाल मजदूर दिखें उन्हें काम से रोककर समस्या को दूर करने का प्रयास करें या प्रशासन को सूचना दें। इसमें हमारी भागीदारी और नैतिक अधिकार है।

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बाल मजदूरी के लिए समाज का ऊंचा तबका भी कई बार जिम्मेदार होता है। गरीब बच्चों की विवशता के कारण हमारा समाज उनका शोषण करता है। फिर वे भूखे जूठन खाते, बुझे हुए सिगरेट बीडी के टुकड़ों से धुआं उड़ाते, कुपोषण के शिकार बनकर कभी-कभी अपराधी भी बन जाते हैं।

बाल मजदूरी की एक सबसे बड़ी वजह अशिक्षा भी है। इसके लिए बच्चों में सबसे पहले शिक्षा के स्तर को बढ़ाना होगा। जब तक बच्चे शिक्षित नहीं होंगे तब तक बाल श्रम जैसी समस्या खत्म नहीं होगी। देश के आर्थिक रूप से सक्षम नागरिक अगर ऐसे एक बच्चे की भी जिम्मेदारी उठाने को तैयार हो जाएं, तो देश का नजारा कुछ और ही होगा।

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