चाहे दोपहर के 12 बजे हों या रात के, सड़क पर टहलने के लिए पु‍लिस आप पर जुर्माना नहीं लगा सकती

बंगलुरू में एक कपल से दो पुलिस वालों ने रात में 12 बजे सड़क पर टहलने के लिए वसूला 1000 रुपए जुर्माना. दोनों हो गए सस्‍पेंड.

चाहे दोपहर के 12 बजे हों या रात के, सड़क पर टहलने के लिए पु‍लिस आप पर जुर्माना नहीं लगा सकती

Monday December 12, 2022,

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जिस पुलिस का काम लोगों को प्रोटेक्‍ट करना और लॉ एंड ऑर्डर बनाकर रखना है, वही पुलिस वाले लॉ एंड ऑर्डर का मजाक उड़ाते रहते हैं. बेंगलुरू में कुछ ऐसा ही हुआ, जब लोगों को खबर बनने से रोकने की जिम्‍मेदारी उठा रहे दो पुलिस वाले खुद ही खबर बन गए.

 कार्तिक नाम के एक यूजर ने ट्विटर पर अपनी कहानी शेयर की है. कार्तिक लिखते हैं-

मैं अपने साथ हुई एक तकलीफदेह घटना साझा करना चाहता हूं. यह घटना मेरे और मेरी पत्नी के साथ एक रात पहले घटी. रात के करीब 12:30 बजे थे. मैं और मेरी पत्नी एक दोस्त के घर बर्थडे केक काटने के बाद घर वापस आ रहे थे. हम मान्यता टेक पार्क के पीछे रहते हैं. हम अपने मेन गेट से बस कुछ ही मीटर की दूरी पर थे कि एक गुलाबी होयसला गश्ती वैन हमारे पास आकर रुकी. पुलिस की वर्दी में दो लोगों ने हमसे हमारा आईडी कार्ड दिखाने को कहा. हम दंग रह गए. एक सामान्य दिन में सड़क पर चलने वाले एक वयस्क जोड़े को अपना पहचान पत्र दिखाने के लिए क्यों कहा जाना चाहिए. वैसे भी हमारे पास अपने मोबाइल फोन और केक के डिब्बे के अलावा कुछ भी नहीं था. किस्‍मत से हमारे पास हमारे आधार कार्ड की फोटो थी. हमने तुरंत उन्हें दिखाया.

लेकिन हमें आश्चर्य तब हुआ, जब उन्होंने हमसे हमारे फोन ले लिए और हमसे हमारी रिलेशनशिप, वर्कप्‍लेस, माता-पिता आदि के ब्‍यौरे पूछने लगे. हालांकि हम थोड़ा डर गए थे, लेकिन हमने बहुत विनम्रता से उनके सारे सवालों का जवाब दिया.

इसी समय उनमें से एक ने चालान बुक जैसी दिखने वाली एक चीज निकाली और हमारे नाम और आधार नंबर नोट करना शुरू कर दिया. परेशानी को भांपते हुए हमने पूछा कि हमारा चालान क्यों काटा जा रहा है. उनमें से एक ने जवाब दिया, "आपको रात 11 बजे के बाद सड़क पर घूमने की अनुमति नहीं है."

कार्तिक और उनकी पत्‍नी को पता था कि ऐसा कोई नियम नहीं है. उन्‍होंने पुलिस वाले से तर्क करने की कोशिश की कि ऐसा कोई नियम नहीं है और है भी तो उन्‍हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. इस पर पुलिस वालों का कहना था कि आप जैसे पढ़े-लिखे लोगों को तो पता होना चाहिए नियमों के बारे में.  

उन्‍होंने ने नेपुलिस वालों से माफी मांगी और कहा कि वे उन्‍हें जाने दें. कार्तिक लिखते हैं कि लेकिन शायद वे इसी का इंतजार कर रहे थे. उन्‍होंने हमें रोका और 3000 रुपए फाइन भरने को कहा. इतना ही नहीं, उन्‍होंने हमें गिरफ्तार करने की भी धमकी दी. मेरी पत्नी रो रही थीं. फिर हमने उनसे 1000 रुपए देने गुजारिश की. मैंने पेटीएम से उन्‍हें पैसे दिए. पुलिस वाले हमें ये धमकी देकर चले गए कि आगे से रात में न टहलें. ये कहकर उसने उनका 1000 रुपए का चालान काट दिया.

ये चालान बिलकुल गलत और गैरकानूनी ढंग से काटा गया था. भारत में ऐसा कोई नियम नहीं है जो लोगों को एक खास समय के बाद सार्वजनिक जगहों पर घूमने, घरों से निकलने या सड़क पर वॉक टहलने से प्रतिबंधित करता हो.

आमतौर पर लोग निश्चित समय के बाद घर से निकलने या सार्वजनिक जगहों पर घूमने में सावधानी बरतते हैं. लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस जगह हैं. यदि आप मुंबई, पुणे, गोआ, पांडिचेरी जैसे शहरों या कोवलम में हैं तो आप तीन बजे भी अकेले घूम सकते हैं कि क्‍योंकि वो जगहें सुरक्षित हैं. लेकिन यही काम आप पटना, मोतिहारी, जोधपुर या बोरूंदा में नहीं कर सकते. कानून आपको कहीं भी ऐसा करने से नहीं रोक सकता.

उन दोनों पुलिस वालों को ऐसा करने की कीमत भी चुकानी पड़ी है. यह खबर सार्वजनिक होने के बाद दोनों पुलिस वालों को नौकरी से बर्खास्‍त कर दिया गया है.


Edited by Manisha Pandey