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दो भाइयों की मदद से 30,000 किसान अॉनलाइन बेच रहे हैं अपना प्रोडक्ट

विदेश में रह रहे पवितर पाल सिंह और हरजाप सिंह ने भारत लौटकर किसानों के लिए खड़ा किया एक ऐसा प्लेटफॉर्म, जिसकी मदद से किसान बिना किसी बिचौलिये के अपना प्रोडक्ट सफलतापूर्वक बेच पा रहे हैं और पहले की अपेक्षा ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं।

दो भाइयों की मदद से 30,000 किसान अॉनलाइन बेच रहे हैं अपना प्रोडक्ट

Friday May 26, 2017 , 5 min Read

देश में किसानों की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। हर साल न जाने कितने किसान गरीबी, लोन न चुका पाने या अच्छी फसल न होने से आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। वहीं दूसरी ओर मार्केट में सब्जी, फलों, दूध और अनाज के दाम आसमान छूते जा रहे हैं। शायद आपको न समझ में आए कि ऐसा क्यों होता है? लेकिन ये हकीकत है कि एक तरफ किसानों को औने-पौने दाम पर अपनी उपज बेचनी पड़ती है, वहीं दूसरी ओर लोगों को महंगे दाम पर खाने पीने की चीजें मिल रही हैं। दरअसल किसानों और ग्राहकों के बीच में बिचौलियों की एक खाई खड़ी हो गई है, जो किसानों से कम दाम पर उपज खरीदकर मनचाहे दाम पर मार्केट में बेचते हैं। लेकिन इस मुश्किल का हल पंजाब के दो भाईयों ने खोज लिया है।

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दो साल के भीतर ही 30,0000 से अधिक किसानों ने पवितर और हरजाप के पास रजिस्ट्रेशन करवाये और फिर 2016 की जुलाई में किसानों के लिए Farmer Friend नाम से एक वेबसाइट लॉन्च हुई। आज की तारीख में इस नेटवर्क में लगभग 350 रेस्टोरेंट और 2,500 से अधिक लोग रजिस्टर्ड हैं, जो किसानों से सीधे अनाज और दूध खरीदते हैं।

अमृतसर में रहने वाले सूबेदार मेजर बलकार सिंह आर्मी में 32 साल नौकरी करते रहे। 2008 में जब वे सेना से रिटायर हुए अपने घर अपने गांव की ओर वापस लौट गये। उनका सपना था, कि वे भी अपने पिता की ही तरह खेती करें और उन्होंने किया भी वही। उनका परिवार पहले से ही खेती किसानी करता था। उनके पास 40 एकड़ खेत है। लेकिन खेती शुरू करने के बाद बलकार को कई तरह की मुश्किलें देखने को मिलने लगीं। बीज, पानी, खाद के साथ-साथ सबसे बड़ी समस्या थी मार्केट की। उन्होंने देखा कि किसान पूरी मेहनत और लगन से फसल उगा रहा है, लेकिन उसे उसका पूरा दाम नहीं मिल रहा है। बिचौलिये और दलाल औने-पौने दाम पर उनसे उपज खरीद लेते हैं और उसे काफी ऊंचे दाम पर मार्केट में बेचते हैं। इसी वजह से कई सारे किसान अपना लोन नहीं चुका पा रहे थे और कुछ किसानों ने तो सुसाइड भी कर लिया।

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बलकार सिंह ने किसानों की मुश्किल देखते हुए आंदोलन शुरू कर दिया। वे किसानों के अधिकारों को लेकर गांव-गांव जागरूकता फैलाने लगे। इसी वजह से उन्हें अमृतसर और तरन तारन जिले का किसान संघर्ष समिति का अध्यक्ष भी चुन लिया गया।

बलकार सिंह का बेटा पवितर सिंह सॉफ्टवेयर इंजिनियर है और उस वक्त वह नीदरलैंड में रेस्टोरेंट का बिजनेस संभाल रहा था। अक्सर जब पवितर से बलकार सिंह की बात होती, तो वो उससे किसानों की मुश्किल के बारे में बताते। ऐसे ही 2014 में किसानों का आंदोलन चल रहा था, एक किसान ने रेल की पटरी पर आकर अपनी जान दे दी। जब पवितर को ये बात पता चली तो वे नीदरलैंड से वापस भारत आ गए। पवितर कहते हैं, 'मेरे पिता ने एक बार भी मुझे इंडिया वापस आने के लिए नहीं कहा, लेकिन मुझे लगा की किसानों की मदद करनी चाहिए, इसलिए मैं भारत आ गया।'

पवितर के चचेरे भाई हरजाप सिंह भी विदेश में रहते थे, पवितर का फैसला सुनकर वे भी वापस भारत आ गए। अब पवितर को भी एक साथ मिल गया था। दोनों ने लगभग डेढ़ साल तक भारत के चक्कर लगाए और किसानों से उनकी समस्याएं जानीं। 

अपनी पूरी रिसर्च के बाद आखिर में पवितर और हरजाप इस नतीजे पर पहुंचे, कि किसानों की सबसे बड़ी समस्या मार्केट की है। उनका उपभोक्ता से सीधा संपर्क नहीं है। वह अपनी ही फसल का दाम नहीं तय कर सकते। मजबूरी में उन्हें बिचौलियों को अपनी फसल बेचनी पड़ती है। वह चाहकर फसल को अपने घर पर नहीं रख सकते, क्योंकि भंडारण की भी समस्या है। इस मुश्किल को दूर करने के लिए पवितर और हरजाप ने एक वेबसाइट बनाई जहां से किसान सीधे रेस्टोरेंट और होटलों जैसी बड़ी जगह पर संपर्क करके अपनी फसल बेच सकते थे।

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दोनों भाइयों ने 20 लोगों की एक मजबूत टीम बनाई और उन्हें गांव-गांव किसानों को इस पहल के बारे में बताने के लिए भेज दिया। गांव की पंचायत ने भी उन्हें सहयोग किया। जब किसानों को ये बात पता चली तो उन्हें बड़ी खुशी हुई।

पवितर ने हरियाणा में भी दो किसान सेवा केंद्र स्थापित किए। जहां पर किसानों को इस नए इनीशिएटिव के बारे में जानकारी मिल सकती थी। पवितर और हरजाप की मेहनत रंग लाई और दो साल के अंदर ही 30,0000 से अधिक किसानों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया। इसके बाद 2016 की जुलाई में किसानों के लिए वेबसाइट लॉन्च हुई। अब इस नेटवर्क में लगभग 350 रेस्टोरेंट और 2,500 से अधिक लोग रजिस्टर हैं जो किसानों से सीधे अनाज और दूध खरीदते हैं। इससे एक और किसानों को तो फायदा हो ही रहा है, दूसरी ओर उपभोक्ताओं को भी शुद्ध खाद्य सामग्री कम दाम में मिल रही है।

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पवितर का कहना है, कि 'किसानों का लोन माफ कर देने से या उनकी उपज बढ़ाने के उपाय कर देने से उनकी गरीबी नहीं जाएगी। किसान लोन भर सकने में सक्षम हैं, बस उन्हें उनकी फसल का दाम सही मिलने लगे।' साथ ही वे ये भी कहते हैं, कि 'देश के आम आदमी को भी किसानों की मदद करने के लिए आगे आना पड़ेगा तब जाकर इस गैरबराबरी और गलत व्यवस्था को रोका जा सकेगा।'