अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में किया 1994 के बाद का सबसे बड़ा इजाफा

अमेरिकी फेड रेट्स में बढ़ोतरी किए जाने के बाद तेल की कीमतें बुधवार को 3 डॉलर से ज्यादा टूट गईं. इसकी वजह दरें बढ़ने के बाद मांग में गिरावट आने की आशंका है.

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में किया 1994 के बाद का सबसे बड़ा इजाफा

Thursday June 16, 2022,

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अमेरिका के केन्द्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) ने ब्याज दरों में 0.75 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की घोषणा की है. यह 1994 के बाद फेड की ब्याज दरों में हुआ सबसे बड़ा इजाफा है. अमेरिका में महंगाई दर (Inflation in USA) 40 साल के हाई पर पहुंच गई है. मई के महीने में यह 8.6 प्रतिशत थी. ऐसे में महंगाई पर काबू पाने के लिए फेडरल रिजर्व ने यह कदम उठाया है. अमेरिकी फेड की ब्याज दरें बढ़ने से भारतीय मुद्रा रुपये में और गिरावट आने की आशंका पैदा हो गई है.

विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में बुधवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 18 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ सर्वकालिक निचले स्तर 78.22 प्रति डॉलर पर बंद हुआ. घरेलू शेयर बाजारों में निराशाजनक कारोबार और विदेशी पूंजी की सतत निकासी के कारण निवेशकों की कारोबारी धारणा प्रभावित होने से यह गिरावट आई.

क्या तुरंत घट जाएगी महंगाई

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे इस साल ब्याज दरों में आक्रामक तेजी जारी रखेंगे. एक्सपर्ट्स का मानना है कि फेडरल रिजर्व की ओर से की गई इस बड़ी बढ़ोतरी से अमेरिका में उच्च महंगाई से तुरंत राहत नहीं मिलेगी. प्राइस प्रेशर को कम होने में वक्त लगेगा. यह भी कहा जा रहा है कि बेहद कड़ी मॉनेटरी पॉलिसी से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी का संकट छा सकता है. 

शेयर बाजार पर क्या दिखा असर

हालांकि फेड रिजर्व की ओर से पॉलिसी रेट में बढ़ोतरी के बाद अमेरिकी शेयर मार्केट में रैली देखी गई. डाउ जोन्स 500 पॉइंट से ज्यादा चढ़ गया. इसका असर यूरोपीय बाजारों के साथ-साथ भारत समेत अन्य एशियाई बाजारों पर भी दिखा. यूरोपीय बाजार हरे निशान में बंद हुए हैं और गुरुवार को ज्यादातर एशियाई बाजार बढ़त के साथ खुले. हालांकि हॉन्ग कॉन्ग के शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई. गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 477.52 अंकों की बढ़त के साथ 53,018.91 पर खुला.

तेल की कीमतों पर असर

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी फेड रेट्स में बढ़ोतरी किए जाने के बाद तेल की कीमतें बुधवार को 3 डॉलर से ज्यादा टूट गईं. इसकी वजह दरें बढ़ने के बाद मांग में गिरावट आने की आशंका है. अगर यह गिरावट आगे भी जारी रही तो फ्यूल के दाम नीचे आने की संभावना है.