खिलौना बनाने वाली यूनिट्स को दिए गए लाइसेंस में से 97% मिले MSMEs को

1 जनवरी 2021 से खिलौनों की सुरक्षा अनिवार्य BIS सर्टिफिकेशन के तहत है.

खिलौना बनाने वाली यूनिट्स को दिए गए लाइसेंस में से 97% मिले MSMEs को

Thursday March 16, 2023,

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सरकार की ओर से खिलौना निर्माण इकाइयों को दिए गए कुल लाइसेंस में से करीब 97 प्रतिशत लाइसेंस सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को दिए गए हैं. वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की ओर से अब तक खिलौना निर्माण इकाइयों को 1,097 लाइसेंस दिए गए हैं. इनमें से 1,061 या 97 प्रतिशत लाइसेंस, एमएसएमई को दिए गए हैं.

उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी है. ऐसा, स्टार्टअप और महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए और घरेलू निर्माताओं, विशेष रूप से एमएसएमई की सुविधा के लिए भी किया गया है. उन्होंने कहा कि बीआईएस ने घरेलू निर्माताओं खासकर एमएसएमई की सुविधा के लिए कई कदम उठाए हैं. बीआईएस ने माइक्रो यूनिट्स, स्टार्टअप्स और महिला उद्यमियों को मार्किंग फीस में रियायत दी है.

माइक्रो स्केल यूनिट्स को यह रियायत

खिलौना उद्योग के अनुरोध पर, BIS ने एक वर्ष की अवधि के लिए इन-हाउस टेस्टिंग फैसिलिटी स्थापित करने पर जोर दिए बिना, खिलौनों का निर्माण करने वाली माइक्रो स्केल इकाइयों को लाइसेंस देने की अनुमति देने का निर्णय लिया था. सूत्रों का कहना है कि उद्योग ने कोविड-19 महामारी के प्रभावों का हवाला देते हुए और समय मांगा था, जिसके आधार पर इस छूट को तीन साल की अवधि के लिए बढ़ा दिया गया है. उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा जारी 'टॉयज (क्वालिटी कंट्रोल) ऑर्डर 2020' के अनुसार 1 जनवरी 2021 से खिलौनों की सुरक्षा अनिवार्य बीआईएस सर्टिफिकेशन के तहत है.

ECLGS के तहत MSME सेक्टर को 3.61 लाख करोड़ का लोन

इससे पहले सरकार की ओर से संसद में बताया गया कि इमर्जेन्सी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) के तहत MSME सेक्टर को, निर्धारित 5 लाख करोड़ रुपये में से अब तक 3.61 लाख करोड़ रुपये का लोन दिया जा चुका है. इस वक्त देश में 6.3 करोड़ MSME हैं और यह सेक्टर 11 करोड़ लोगों को रोजगार दिए हुए है. भारत की जीडीपी में MSMEs का योगदान एक तिहाई और एक्सपोर्ट में 48 प्रतिशत है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, ECLGS का फायदा लेने वाले कुल बॉरोअर्स में से 83 प्रतिशत, माइक्रो एंटरप्राइजेस हैं.

महामारी के बीच मई 2020 में आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) योजना के हिस्से के रूप में इस स्कीम की घोषणा की गई थी. महामारी की वजह से कई MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) बंद हो गए थे. कोविड19 के कारण उनकी आमदनी बुरी तरह प्रभावित हुई थी.

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Edited by Ritika Singh

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