40 लाख वंचित भारतीयों को कैसे पैसे बचाने और निवेश करने में मदद कर रहा है फिनटेक स्टार्टअप Siply

By Tarutr Malhotra
April 07, 2022, Updated on : Wed Jul 06 2022 13:39:46 GMT+0000
40 लाख वंचित भारतीयों को कैसे पैसे बचाने और निवेश करने में मदद कर रहा है फिनटेक स्टार्टअप Siply
बेंगलुरू स्थित फिनटेक स्टार्टअप Siply एक माइक्रो-सेविंग ऐप है जिसका उद्देश्य बैंकिंग सेवा से वंचित भारत की एक बड़ी आबादी को बचत और निवेश करने में मदद करना है। पिछले आठ महीनों में इसके बिजनेस में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और इसके यूजर्स बेस में 24 गुना और राजस्व में 40 गुना की बढ़ोतरी हुई है।
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सौस्थव चक्रवर्ती 2010 में एक फर्म में मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में काम कर रहे थे, जो हाई नेट वर्थ इंडीविजुअल्स (HNI) को अपना पैसा निवेश करने में मदद करती थी। हालांकि, जब उनके पिता को दिल का दौरा पड़ा और उन्हें सर्जरी की जरूरत पड़ी, तो उन्हें मेडिकल बिल को भरने के लिए लोन देने वाले एक शोषणकारी व्यक्ति से पैसे उधार लेने पड़े।


योरस्टोरी के साथ बातचीत में सौस्थव ने बताया, "जब मेरे पिता का इलाज चल रहा था, तब मुझे एक साहूकार से लगभग 5 फीसदी प्रति माह ब्याज पर पैसा उधार लेना पड़ा। उन्हें एक ड्यूल चैंबर पेसमेकर इंप्लांट लगा था और सिर्फ पेसमेकर की कीमत 4.5 लाख रुपये थी।"


सौस्थव खुद को उस झंझट से बाहर निकालने में सक्षम थे, लेकिन फिर भी उन्हें उस पल की आर्थिक मजबूरी आज भी याद है, साथ ही उन्हें अपने बचपन से बड़े होने का दौर भी याद है। उन्होंने कहा कि उन्हें "हमारी पिछली पीढ़ियों को वित्तीय समर्थन या मार्गदर्शन देने वाला कोई नहीं मिला।"


अगस्त 2020 में सौस्थव और उनके सीरियल फाउंडिंग पार्टनर अनिल भट ने अपना चौथा वेंचर साथ में शुरू करने का फैसला किया और इसी के बाद Siply को "अगली पीढ़ी को वित्तीय मार्गदर्शन मुहैया कराने" के इरादे से शुरू किया गया।


सिप्ली एक माइक्रो-सेविंग ऐप है, जिसका उद्देश्य बैंकिंग सेवा से वंचित भारत की एक बड़ी आबादी को 1 रुपये तक के न्यूनतम बचत और निवेश करने में मदद करना है। फिनटेक स्टार्टअप "बचत को सूक्ष्म, लचीला और स्थानीय बना रहा है"।


सौस्थव के पास 18 सालों का बैंकिंग अनुभव हैं। इस दौरान उन्होंने सिटी बैंक और एचडीएफसी में काम किया हुआ है। वहीं अनिल के 16 साल का टेक इंडस्ट्री का अनुभव है, जिस दौरान उन्होंने याहू, मिंत्रा और क्योर.फिट की गई नौकरियां शामिल हैं। दोनों का मानना है कि वे एक ऐसी फिनटेक कंपनी खड़ी कर सकते हैं, 40 करोड़ भारतीयों के जीवन में अंतर ला सकता है।

जागरूकता की समस्या

सौस्थव के अनुसार, सिप्ली देश के सबसे गरीब भारतीयों को टारगेट नहीं कर रहा है, बल्कि यह उन मिडिल क्लास व्यक्तियों को लक्षित कर रहा है जिनके पास वित्तीय फुटप्रिंट बनाने के लिए मार्गदर्शन और उपकरण नहीं हैं।


उदाहरण के लिए, सिप्ली के सबसे बड़े प्रोडक्ट में से एक प्रोडक्ट यह है कि कर्मचारियों को उनकी कंपनियों के साथ साझेदारी में माइक्रो-लोन दिया जाए। कंपनी ने अकेले फरवरी में 24 करोड़ के लोन आवंटित किए हैं। सौस्थव ने बताया कि लोन के लिए आवेदन करने वालों की औसत सैलरी सैलरी 18,000 प्रतिमाह है।


सौस्थव के लिए, उनका नजरिया एक साधारण वजह से मौजूदा समाधानों से अलग है। सिप्ली का लक्ष्य अपने संभावित ग्राहकों के सामने आने वाली समस्याओं का समाधान करने के लिए उत्पादों का निर्माण करना है।


सौस्थव कहते हैं, "सिप्ली की खासियत यह है कि हम मूल रूप से इन उत्पादों को बेहतर बनाते हैं और इन उत्पादों को इन लोगों के जरूरत के हिसाब से तैयार करते हैं,"


उन्होंने एक उदाहरण भी साझा, जो आर्थिक रूप से निरक्षर उन ग्राहकों के लिए एक वित्तीय उत्पाद बनाने की तकनीकी कठिनाइयां से जुड़ा था, जो अधिक अंग्रेजी नहीं जानते हैं और उन पुराने स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं जिनमें अब एंड्रॉयड का अपडेट भी नहीं आता है।


सौस्थव का कहना है कि सिप्ली को "ऐसे उत्पाद को डिलीवर करना है जो टेक्नोलॉजी के अनुकूल नहीं है, ऐसे लोगों को सेवा देनी है जो तकनीकी रूप से जानकार नहीं हैं, और ऐसे मंच पर सेवा देना है जो टेक्नोलॉजी के अनुकूल नहीं है।"


इसे समस्या को दूर करने के लिए, सिप्ली ने अपने टेक डिपार्टमेंट में बड़े पैमाने पर लोगों को काम पर रख रहा है क्योंकि उनका मानना है कि यह समस्या प्रोडक्ट या बाजार से जुड़ा न होकर, टेक्नोलॉजी से जुड़ा समस्या है। अगस्त 2021 में 40 लाख डॉलर जुटाने के बाद से पिछले आठ महीनों में इसने अपने कर्मचारियों की संख्या को दोगुना से अधिक कर दिया है, और आज सीनियर टेक लेवल पर "आक्रामक रूप से हायर" कर रहा है।


इसके अलावा, सिप्ली ने अंग्रेजी जानने वाले शुरुआती ग्राहकों को अलग करने की जगह, स्थानीय भाषाओं में प्रोडक्ट को बनाने का फैसला किया। आज की तारीख मे, इसने अभी तक 11 भाषाओं में उत्पाद और जागरूकता सामग्री तैयार कर ली है।

निवेश के नए रास्ते बनाना

सौस्थव के अनुसार, मार्च 2020 से भारतीय शेयर बाजार में आई उछाल को वित्तीय समावेशन के लिए एक सफलता के रूप में देखा गया है, लेकिन इसका लाभ उन लोगों तक सीमित है जिनके पास बाजार की पहुंच और समझ है।


सौस्थव का मानना है सिप्ली जिन 40 करोड़ लोगों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही है, उन्हें इस उछाल से कोई फर्क नहीं पड़ा है। वे कहते हैं, "वे 10 साल पहले भी संघर्ष कर रहे थे, वे आज भी संघर्ष कर रहे हैं और वे शायद अब से 10 साल बाद भी संघर्ष कर रहे होंगे।"


नियमित शिक्षा और इक्विटी विकल्पों के अलावा, सिप्ली के संभावित ग्राहकों को पेश किए जाने वाले पहले अनूठे उत्पादों में से एक निफ्टी पर 50 सबसे बड़ी कंपनियों में न्यूनतम 100 रुपये प्रति यूनिट के लिए एक स्मॉलकेस निवेश का विकल्प है


यह उत्पाद यूजर्स के लिए क्रांतिकारी था क्योंकि इसने उन कंपनियों के नामों का लाभ उठाया जिनके बारे में बहुत से लोगों ने सुना है, साथ ही उसने इसमें निवेश के लिए पैसे की जरूरत भी काफी कम कर दिया है।


इस कदम और रेफरल कार्यक्रम से सिप्ली को पिछले छह महीनों में अपना यूजर्स बेस तेजी से बढ़ाने में मदद मिली है। हालांकि इस कदम के बावजूद सौस्थव का कहना है कि इसके मंथली यूजर्स में से केवल एक-छठा हिस्सा ही इन निवेश विकल्पों का लाभ उठाता है।


बाकी करीब पांच-छठे यूजर्स को अपने प्रोडक्ट को अंधाधुंध तरीके से प्रचार कर अपनाने के लिए मजबूर करने की जगह, सिप्ली उनके लिए निवेश के नए रास्ते बनाने का प्रयास कर रहा है जिसमें उनकी रुचि हो सकती है। जनवरी में उसने न्यूनतम 250 रुपये प्रति माह निवेश वाला एक डिजिटल चिट फंड लॉन्च किया। जबकि अप्रैल में वह फ्री-टू-ओपन नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) खाता लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है।


सिप्ली ने अब तक साठ लाख लोगों को या तो कुल 103 करोड़ रुपये के माइक्रो-लोन लेने या 175 करोड़ रुपये से अधिक का टोटल निवेश करने की सुविधा प्रदान की है।

 

2.5 करोड़ डॉलर जुटाने के साथ कंपनी ने अपना सीरीज ए राउंड पूरा कर लिया है, जिसमें 1 करोड़ डॉलर क्यूआई वेंचर्स ने निवेश किया है। सौस्थव अब इस फंडिंग से अब तक की सफल रणनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। वह सिप्ली को एक नियोबैंक कहने से इनकार करते हैं। हालांकि वह सिप्ली को एक नियोबैंक कहने से इनकार करता है, वह इसकी एक झलक जरूर बताते हैं कि वह कंपनी को कैसा बनता हुए देखना चाहते हैं।


सीईओ कंपनी को भविष्य को "एक वास्तविक मंच के रूप में देखना चाहते हैं, जहां लोग पैसे बचाने और बेहतर वित्तीय भविष्य के लिए आते हैं।"


सौस्थव के जुनून को उनके फिनटेक स्टार्टअप को फल भी मिला है और यह तेजी से बढ़ रहा है। सौस्थव के अनुसार, सिप्ली का यूजरबेस आठ महीनों में 250,000 लोगों से बढ़कर 60 लाख तक पहुंच गया है, और इसी अवधि में लोन और निवेश दोनों को लेकर इसके राजस्व में 40 गुना की बढ़ोतरी हुई है।


हालांकि इस तेज ग्रोथ के बावजूद, सौस्थव अभी भी जब सिप्ली के यूजर्स के बारे में बात करते हैं तो उनके अंदर एक सच्ची सहानुभूति दिखाई देती है।


वे कहते हैं "मैं चाहता हूं कि लोग न केवल संपन्न वर्ग में, बल्कि आकांक्षी वर्ग में भी अधिक रुचि लें। हम उन्हें आकांक्षी वर्ग कहते हैं, संघर्षरत वर्ग नहीं, क्योंकि वे लोग आकांक्षी हैं।”


सौस्थव, अनिल और सिप्ली यह तय करने के लिए एक मिशन पर हैं कि किसी को भी अपने माता-पिता को जीवित रखने के लिए 5 प्रतिशत मासिक ब्याज पर लोन नहीं लेना पड़े। इसकी तेज ग्रोथ से पता चलता है कि सिप्ला बिल्कुल सही रास्ते पर आगे जा रहा है।


Edited by Ranjana Tripathi

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