Brand Residency 2022: तीन सस्टेनेबल स्टार्टअप्स में निवेश करने वाली दिया मिर्जा ने कहा- पर्यावरण की जिम्मेदारी सरकार के साथ हमारी भी है

इस इवेंट में जाने-माने ब्रांड्स, स्टार्टअप्स, सरकार से जुड़े लोग शामिल हुए. इसमें एक बहुत ही अहम सेगमेंट सस्टनेबेलिटी रहा जहां पर न सिर्फ इकोफ्रेंडली प्रोडक्ट्स की बढ़ती जरूरतों पर जोर दिया गया बल्कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले प्रोडक्ट्स के प्रभाव पर भी चिंता जाहिर की गई.

Vishal Jaiswal

Prerna Bhardwaj

Brand Residency 2022: तीन सस्टेनेबल स्टार्टअप्स में निवेश करने वाली दिया मिर्जा ने कहा- पर्यावरण की जिम्मेदारी सरकार के साथ हमारी भी है

Friday September 09, 2022,

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नई दिल्ली में YourStory के मेगा इवेंट Brand Residency 2022 का आज आगाज हो गया. 9 और 10 सितंबर को तमाम दिग्गज ब्रांड्स को सेलिब्रेट करने के लिए यह ईवेंट आयोजित किया जा रहा है. यह इवेंट YourStory की 'Brands of New India' पहल का एक हिस्सा है, जो पिछले एक साल से देश भर में प्रोडक्ट्स और ब्रांड्स के बारे में जागरुकता फैला रही है. ईवेंट की शुरुआत YourStory की फाउंडर श्रद्धा शर्मा के उद्घाटन भाषण से हुई.

इस इवेंट में जाने-माने ब्रांड्स, स्टार्टअप्स, सरकार से जुड़े लोग शामिल हुए. इसमें एक बहुत ही अहम सेगमेंट सस्टनेबेलिटी रहा जहां पर न सिर्फ इकोफ्रेंडली प्रोडक्ट्स की बढ़ती जरूरतों पर जोर दिया गया बल्कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले प्रोडक्ट्स के प्रभाव पर भी चिंता जाहिर की गई.

इस सेशन में श्रद्धा शर्मा ने तीन सस्टेनेबल स्टार्टअप्स में निवेश करने वाली एक्टर दिया मिर्जा सहित तीनों स्टार्टअप के को-फाउंडरों के साथ चर्चा की. मिर्जा एक्टर होने के साथ ही प्रोड्यूसर, संयुक्त राष्ट्र एंवायरमेंट गुडविल एंबेसडर, संयुक्त राष्ट्र सेक्रेटरी जनरल एडवोकेट फॉर सस्टनेबेलिटी गोल्स, ग्लोबल एंबेसडर इंटरनेशनल फंड फॉर एनिमल वेलफेयर (IFAW) हैं.

ये तीन स्टार्टअप्स बेको (Beco), शुमी (Shumee) और ग्रीनडिगो ऑर्गेनिक क्लोदिंग (Greendigo Organic Clothing) हैं. बेको के को-फाउंडर आदित्य रूईया हैं, शुमी की को-फाउंडर मीता शर्मा गुप्ता हैं जबकि ग्रीनडिगो की को-फाउंडर बरखा भटनागर दास हैं.

सेशन की शुरुआत में मिर्जा ने अपनी बात शुरू करते हुए कहा कि हम अपनी धरती को जितना नुकसान पहुंचा रहे हैं कभी-कभी मुझे लगता है कि धरती इंसानों के बिना बेहतर होती. भले ही हमें लगता है कि धरती का इंसान के बिना क्या होगा लेकिन मुझे तो अब ऐसा लगने लगा है कि शायद इंसान धरती के लिए ज्यादा घातक हैं.

उन्होंने आगे कहा कि हमें धरती को नहीं बचाना है बल्कि हमें इंसानों को बचाना है और हमें एक-दूसरे को बचाना है. जब तक हम पर्यावरण के मुद्दों को बड़ा मुद्दा समझते रहेंगे तब तक हम पर्यावरण को लेकर गंभीर नहीं हो पाएंगे. इसलिए इसे हमें रोजमर्रा की आदतों में शामिल करना होगा. यही कारण है कि मैंने बेको में निवेश किया है जो कि घर के रोजमर्रा की जरूरतों वाले इको फ्रेंडली प्रोडक्ट्स का पूरा रेंज बनाता है.

मिर्जा ने कहा कि इनका इरादा है कि उनके कस्टमर्स इकोफ्रेंडली जीवनशैली बिना ज्यादा मुश्किल के अपना सकें. मैं जब बड़ी हुई तब धीरे-धीरे मुझे समझ आने लगा कि कैसे हम अपनी चॉइसेस से इम्पैक्ट बनाते हैं. इसको जब मैंने पर्यावरण के मद्देनजर सोचना शुरू किया तब पर्यावरण की जिम्मेदारी सरकार के साथ-साथ हम लोगों की भी है.

उन्होंने आगे कहा कि वहीं, जब मेरा बच्चा हुआ तब उसको देखकर मैं सोचने लगी कि हमने उसके लिए कैसी दुनिया बना दी है. जहां पीने के लिए न तो साफ पानी है, न साफ हवा है और तो और उसके सबसे करीब रहने वाला सामाना खिलौना प्लास्टिक का है.

अपनी बात यहीं खत्म करते हुए यह कहते हुए दिया मिर्जा ने नॉन-टॉक्सिक लेकिन लुभावने और यूजफूल खिलौने बनाने वाले स्टार्टअप शुमी की फाउंडर मीता शर्मा गुप्ता से अपनी बात रखने के लिए कहा.

मीता ने बताया कि उनका यह सफर साल 2014 में शुरू हुआ जब वह अपने दो बेटों आरूष और ईशान के साथ भारत लौटीं. अपने बच्चों के लिए खिलौनों की खरीददारी करते समय उन्होंने देखा कि बच्चों के खिलौना सस्ते प्लास्टिक से बने हुए थे.

उन्होंने आगे कहा कि बस यहीं से मुझे ख्याल आया कि जब हम बच्चे थे तब खिलौने इतने टॉक्सिक नहीं होते थे. बस मैंने सोच लिया कि बच्चों की जिंदगी में नॉन-टॉक्सिक खिलौने होने चाहिए जो न सिर्फ बच्चे के स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहे बल्कि पर्यावरण के लिए सुरक्षित हो. कहीं न कहीं मैं अपने स्टार्टअप के जरिए भारत के परंपरागत लकड़ी, मिट्टी आदि के खिलौनों को वापस बाजार में ला रही हूं. जो कि बहुत ही आसानी से दूसरे जनरेशन के बच्चों के लिए भी सुरक्षित रहेंगे.

प्लास्टिक से सस्टेनेबिलिटी की तरफ बढ़ते कदम, प्रोडक्ट की वैल्यू को भी बढ़ाते हैं. मीता की इसी बात को बढ़ाते हुए पैनल की तीसरी सदस्य और ग्रीनडिगो ऑर्गेनिक क्लोदिंग (Greendigo Organic Clothing) की को-फाउंडर बरखा भटनागर दास ने कहा कि ऑर्गेनिक कॉटन की वैल्यू सिर्फ उनके ऑर्गेनिक होने के कारण नहीं होती है बल्कि इसलिए भी होती है क्योंकि वे केमिकली ट्रीटेट नहीं होते हैं और लॉन्ग लॉस्टिंग होते हैं.

बरखा ने आगे कहा कि मुझे इसकी जरूरत इसलिए भी लगी क्योंकि बाजार में बच्चों के ऑर्गेनिक कॉटन के कपड़ों का सेगमेंट नहीं है. हम बहुत ही थॉटफुली और इनोविटवली बच्चों के एडजस्टेबल साइज के कपड़े डिजाइन करते हैं क्योंकि बच्चे बहुत जल्दी बड़े हो जाते हैं और उनके कपड़े यूजफूल नहीं रह जाते हैं. एडजस्टेबल साइजेज के साथ हम वैल्यू जोड़ना चाहते थे ताकि इस बर्बादी को रोका जा सके.

अंत में पैनल में यह सहमति बनी कि सस्टनेबल चॉइसेस न केवल पर्यावरण के लिए सेफ होता है बल्कि लॉन्ग लास्टिंग होने के कारण वैल्यू भी एड करता है.