इस दिवाली पर 15 हजार करोड़ का बिजनेस और 25 करोड़ का जुर्माना

इस दिवाली पर 15 हजार करोड़ का बिजनेस और 25 करोड़ का जुर्माना

Sunday October 27, 2019,

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दिवाली रंग नहीं, रोशनी, मिठाई, सोना, पटाखों का पर्व है। इस समय पूरे देश में बाजार दमक रहे हैं। कारोबार के पंडित बता रहे, इस बार 15 हजार करोड़ का बिजनेस हो रहा है। उधर, सर्वोच्च न्यायालय का आदेश है कि पटाखों से प्रदूषण फैलाने पर 10 करोड़ रुपए से 25 करोड़ रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

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कानून का डर सबसे अधिक आम आदमी को होता है। दिवाली पर पर्यावरण आपदा से जूझते हमारे देश में इस समय केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सभी राज्यों में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को अलर्ट कर दिया गया है। इस दीवाली पर सुप्रीम कोर्ट ने और सख्त रुख अपनाते हुए रॉकेट और बम जैसे पटाखों को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। कोर्ट ने सिर्फ अनार और फुलझड़ी ग्रीन पटाखे चलाने को मंजूरी दी है। सर्वोच्च न्यायालय के इस फरमान की अनदेखी करने पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत 10 करोड़ तक का जुर्माना हो सकता है। अगर कोई कंपनी प्रदूषण फैलाती है, तो एनजीटी उस पर 25 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगा सकता है।


ग्रीन पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों पर खरा उतर पाना दिल्ली ही नहीं, बल्कि देशभर के पटाखा कारोबारियों के लिए मुश्किल हो रहा है। इस बीच राष्ट्रीय पर्यावरण तकनीकी संस्थान (नीरी), वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने चार प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर परंपरागत पटाखों अनार, फुलझड़ी, हंटर, सुतली बम और चकरी राकेट का इको फ्रेंडली वर्जन और नए पटाखों की श्रृंखला जारी की है। बेरियम नाइट्रेट रहित ये पटाखे क्यूआर कोड और ग्रीन लोगो से लैस हैं। कोर्ट ने केवल दो घंटे ही इको फ्रेंडली पटाखेबाजी की अनुमति दी है। 


ग्रीन पटाखों में 30 प्रतिशत कम धुआं और 20 प्रतिशत कम सल्फर ऑक्साइड है। पटाखों में शोर को 35 से 40 डेसीबल तक तथा लेड, क्रोमियम, बेरियम, पारा, एल्युमिनियम जैसी धातुओं के इस्तेमाल को सीमित कर दिया गया है। पटाखा कारोबार मंदी के दबाव में भी है। बाजार में दिवाली से पहले ही पटाखे और आतिशबाजी की कई सामग्रियां खत्म हो गई हैं। बाजार का रुख और हालात भांप कर ज्यादातर कारोबारियों ने इस बार माल कम बुक कराया है। उधर, शिवकाशी के पटाखा निर्माता बता चुके हैं कि वे ऐसे पटाखे नहीं बना रहे।





इस समय धनतेरस और दीपावली पर ज्वैलरी, कपड़े, लाइटिंग, मिठाई, पटाखा, रियल एस्टेट, गिफ्ट, बर्तन, ऑटो आदि सभी सेक्टर्स में भारी डिमांड चल रही है। कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के मुताबिक, इस दिवाली पर छह लाख करोड़ रुपए के कारोबार का अनुमान है, जबकि बाजार के जानकार बता रहे हैं कि इस दिवाली पर करीब सात से नौ टन सोने के सिक्के और 30 टन ज्वैलरी की बिक्री से करीब 15 हजार करोड़ रुपए तक का बिजनेस हो रहा है। 


पर्यावरण के प्रहरी कह रहे हैं कि इस बार दिवाली पर ईको-फ्रेंडली विकल्प अपनाएं। चीनी झालरों के चलते बीते कई सालों से लोग सिर्फ रस्मी तौर पर दिवाली पर मिट्टी के दीये जलाते आ रहे हैं। मिट्टी के दीयों से घरों को रौशन किया जाए। प्लास्टिक डेकोरेशन से पिंड छुड़ा लें। घर की साज-सज्जा के लिए फूलों का इस्तेमाल करें। बांस के बने लालटेन बाजार में आ गए हैं। इनसे ही खास सजावट और रोशनी कर घर की रौनक बढ़ाएं। इसके अलावा पहनने के लिए हाथ से बनी साड़ियां, थाली के रूप में केले के पत्तों का इस्तेमाल करें, जिससे प्लास्टिक पर बैन कारगर हो सके। 


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