FY21 में Byju’s का घाटा 19 गुना बढ़कर 4588 करोड़ हुआ, कहा- FY22 में रिवेन्यू 10,000 करोड़ पहुंचा

By yourstory हिन्दी
September 15, 2022, Updated on : Thu Sep 15 2022 07:30:51 GMT+0000
FY21 में Byju’s का घाटा 19 गुना बढ़कर 4588 करोड़ हुआ, कहा- FY22 में रिवेन्यू 10,000 करोड़ पहुंचा
कई मीडिया रिपोर्ट्स में बायजू की फंडिंग गायब होने का दावा किए जाने के बाद जुलाई में कांग्रेस सांसद कार्ति पी. चिदंबरम ने देश के फ्रॉड रेगुलेटर को पत्र लिखकर BYJU'S के फाइनेंसेस की जांच करने की मांग की थी.
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देश की दिग्गज एजुकेशनल-टेक्नोलॉजी (एडटेक) कंपनी बायजू BYJU'S ने आखिरकार कई महीने की देरी बाद अपना ऑडिटेड फाइनेंशियल अकाउंट जारी किया और यह कंपनी को हुए भारी नुकसान को दिखाता है. कंपनी का 31 मार्च, 2021 को समाप्त वित्त वर्ष का घाटा 19 गुना बढ़कर 4,588 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. कंपनी को वित्त वर्ष 2019-20 में 231.69 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था.


वहीं कंपनी का राजस्व भी वित्त वर्ष 2020-21 में एक प्रतिशत घटकर 2,428 करोड़ रुपये रह गया. इससे पिछले वित्त वर्ष में यह 2,511 करोड़ रुपये रहा था.


बायजू के को-फाउंडर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बायजू रविंद्रन ने बताया कि हालांकि, पिछले वित्त वर्ष 2021-22 में हमारा राजस्व चार गुना होकर 10,000 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है.


कंपनी ने कहा कि उसे सबसे अधिक नुकसान बच्चों के कोडिंग क्लास बिजनेस व्हाईटहैट से हुआ है. बायजू ने साल 2020 में उसका 300 मिलियन डॉलर में अधिग्रहण किया था.


बता दें कि, बायजू ने करीब 20 अधिग्रहण करने में 3 अरब डॉलर खर्च किए हैं. इसमें 1 अरब डॉलर में उसने पिछले साल आकाश एजुकेशनल सर्विस और 600 मिलियन डॉलर में ग्रेट लर्निंग का अधिग्रहण किया था. ये दोनों कंपनियां ऑनलाइन हाईअर और प्रोफेशनल एजुकेशनल का कारोबार करती हैं.


IPO टाला, 300 सेंटर्स खोलने और 10 हजार टीचरों की हायरिंग की योजना


रवींद्रन ने कहा कि वृहद आर्थिक माहौल में अनिश्चितता के चलते कंपनी आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को टालने पर भी विचार कर रही है. उन्होंने कहा कि हमारी अभी आईपीओ लाने की कोई योजना नहीं है. हमने इसे 2023 के अंत तक टाल दिया है.

बायजू ने कहा कि कंपनी कारोबार को बढ़ावा देने के लिए अपने ऑफलाइन केंद्रों का विस्तार कर रही है. कंपनी का दावा है कि पूरे भारत में उसके 200 से अधिक सक्रिय केंद्र हैं. इस साल के अंत तक इसे 500 केंद्रों तक बढ़ाने का लक्ष्य है.


बायजू की आने वाले वर्ष में कुल 10,000 और शिक्षकों को नियुक्त करने की योजना है. वर्तमान में कंपनी में लगभग 50,000 कर्मचारी कार्यरत हैं.


हमें जिस स्क्रूटनी से गुजरना पड़ा, वैसा सार्वजनिक कंपनियों के साथ भी नहीं होता


मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में रवींद्रन ने कहा कि पिछले 6 महीने वास्तव में मुश्किल भरे रहे हैं. इससे कठिन और कुछ नहीं हो सकता. और अगर यह हमें नहीं तोड़ सकता है, तो मैं आपको बता सकता हूं कि (इससे बुरा) और कुछ नहीं होगा.


उन्होंने कहा कि कंपनी के बारे में इतना कुछ कहने के बावजूद पिछले छह महीनों में किसी भी निवेशक ने हमारे शेयर नहीं बेचे हैं. इससे पता चलता है कि हम सही काम कर रहे हैं.


रवींद्रन ने आगे कहा कि कभी कोई धोखाधड़ी नहीं हुई. ऑडिटर्स ने भी कभी इस्तीफे की इच्छा नहीं जताई. एक प्राइवेट कंपनी होने के बावजूद हमें अति से गुजरना पड़ा. यहां तक कि सार्वजनिक कंपनियां भी इस स्तर की जांच से नहीं गुजरती हैं. हम फाइनेंस सेक्शन को मजबूत कर रहे हैं, जिसमें एक ग्लोबल चीफ फाइनेंस ऑफिसर की नियुक्ति करना शामिल है. हालांकि, रविंद्रन यह बता पाने में असफल रहे कि वे 2022 की ऑडिटेट फाइनेंशियल रिपोर्ट कब फाइल करेंगे.

विवादों में क्यों घिरी Byju’s:

देश की सबसे वैल्यूएबल स्टार्टअप BYJU'S की कुल वैल्यूएशन 22 अरब डॉलर (17.58 खरब रुपये) है. 17 मार्च को बायजू ने घोषणा की थी कि उसने सुमेरु वेंचर्स, वित्रुवियन पार्टनर्स और ब्लैकरॉक से 800 मिलियन डॉलर (6,401 करोड़ रुपये) जुटाए हैं. कंपनी के संस्थापक और सीईओ बायजू रवींद्रन ने इस फंडरेज में 40 करोड़ डॉलर (3,200 करोड़ रुपये) का निजी निवेश किया था.


हालांकि, कई मीडिया रिपोर्ट्स में बायजू की फंडिंग गायब होने का दावा किए जाने के बाद जुलाई में कांग्रेस सांसद कार्ति पी. चिदंबरम ने देश के फ्रॉड रेगुलेटर को पत्र लिखकर BYJU'S के फाइनेंसेस की जांच करने की मांग की थी.


चिदंबरम ने एक न्यूज रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वित्रुवियन पार्टनर्स को 571 करोड़ रुपये का सीरिज-एफ के प्रिफरेंशियल शेयर आवंटित किए गए थे. हालांकि, मार्च में फंडिंग की घोषणा के बाद सुमेरू वेंचर्स या ब्लैकरॉक द्वारा ऐसी कोई फाइलिंग नहीं की गई. उन्होंने कहा कि इससे कंपनी की फंडिंग में 2500 करोड़ रुपये गायब होने का सवाल उठता है.


इसके बाद कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) ने कंपनी से जवाब मांगा था कि उसने फाइनेंशियल ईयर 2020-21 के लिए अपनी ऑडिट रिपोर्ट अभी तक क्यों फाइल नहीं की है. वहीं, ऑडिट रिपोर्ट फाइलिंग में 17 महीने की देरी पर 27 अगस्त को कार्ति चिदंबरम ने सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) को एक दूसरा पत्र लिखकर जांच की मांग की थी.


Edited by Vishal Jaiswal