1338 करोड़ के बाद, CCI ने अब क्यों लगाया Google पर 936.44 करोड़ रुपये का जुर्माना?

By रविकांत पारीक
October 25, 2022, Updated on : Tue Oct 25 2022 14:43:15 GMT+0000
1338 करोड़ के बाद, CCI ने अब क्यों लगाया Google पर 936.44 करोड़ रुपये का जुर्माना?
अक्टूबर महीने में ये दूसरी बार है जब आयोग ने गूगल पर जुर्माना लगाया गया है. 5 दिन पहले ही CCI ने करीब 1338 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था. इस तरह, गूगल पर एक महीने में करीब 2300 करोड़ रुपये का जुर्माना लग चुका है.
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भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India - CCI) ने सर्च इंजन गूगल (Google) पर एक बार फिर से बड़ा जुर्माना लगाया है. प्ले स्टोर नीतियों (Play Store Policies) में अपन दबदबे का दुरुपयोग करने पर यह कार्रवाई की गई है. गूगल पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने 936.44 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है.


CCI ने कहा कि Google को एक निर्धारित समय सीमा के तहत अपने व्यवहार को बदलने का भी निर्देश दिया गया है. इससे पहले भी CCI ने गूगल पर एंड्रायड मोबाइल डिवाइस इकोसिस्टम में अपने एकाधिकार का दुरुपयोग करने पर जुर्माना लगाया था. यह एक हफ्ते से भी कम समय में गूगल के खिलाफ CCI का दूसरा बड़ा एक्शन है.


अक्टूबर महीने में ये दूसरी बार है जब आयोग ने गूगल पर जुर्माना लगाया गया है. 5 दिन पहले ही CCI ने करीब 1338 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था. इस तरह, गूगल पर एक महीने में करीब 2300 करोड़ रुपये का जुर्माना लग चुका है.


आयोग ने गूगल पर 1337.76 करोड़ रुपये का भारी भरकम जुर्माना लगाया, क्योंकि कंपनी एंड्रॉयड मोबाइल उपकरण क्षेत्र में बाजार में अपनी मजबूती का दुरुपयोग कर रही थी. इसके साथ ही CCI ने प्रमुख इंटरनेट कंपनी को अनुचित कारोबारी गतिविधियों को रोकने का निर्देश दिया था. इस कार्रवाई के साथ ही गूगल को एक निर्धारित समय-सीमा में कामकाज के तरीके को संशोधित करने का निर्देश भी दिया गया है.


CCI द्वारा की गई पहली कार्रवाई पर सर्च इंजन गूगल की ओर से प्रतिक्रिया भी आई थी. कंपनी की ओर से कहा था, "CCI का निर्णय भारतीय के उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए एक बड़ा झटका है. एंड्रॉइड की सुरक्षा पर भरोसा करने वाले भारतीयों के लिए गंभीर सुरक्षा जोखिम के अवसर दे रहा है. यह फैसला मोबाइल उपकरणों की लागत बढ़ा रहा है." इसके साथ ही गूगल ने इस फैसले पर समीक्षा करने की बात कही थी.


CCI ने एंड्रॉइड मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम और गूगल के अलग-अलग मालिकाना हक वाले एप्लिकेशन जैसे Play Store, Google Search, Google Chrome, YouTube के लाइसेंस के संबंध में कंपनी की जांच की थी. CCI ने अपनी जांच में पाया कि गूगल का बिजनेस अपने प्लेटफॉर्म पर केवल यूजर्स को बढ़ाने के इरादे से चलता है. इससे कंपनी की कोशिश यूजर्स को अपने रेवेन्यू बढ़ाने वाले सर्विस से जोड़ने की रहती है.


कंपनी ऑनलाइन सर्च के जरिए यूजर्स को प्रभावित करती है जिसका सीधा असर कंपनी की ऑनलाइन एडवर्टाइजिंग सर्विस पर पड़ता है. CCI ने देखा कि Google द्वारा अलग-अलग रेवेन्यू डेटा पॉइंट्स को पेश करने में व्यापक डिस्क्लेमर थे. हालांकि, न्याय के हित में और जल्द से जल्द आवश्यक बाजार सुधार सुनिश्चित करने के इरादे से CCI ने गूगल द्वारा पेश किए डेटा के आधार पर प्रोविजनल मोनेटरी पॉलिसी की सीमा निर्धारित की.


CCI ने गूगल के एवरेज रेलेवेंट टर्नओवर के 7 फीसदी की दर से कंपटीशन एक्ट के सेक्शन 4 का उल्लंघन करने के लिए कंपनी पर प्रोविजनल आधार के रूप में 936.44 करोड़ का जुर्माना लगाया है. आवश्यक फाइनेंशियल डिटेल और सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट उपलब्ध कराने के लिए गूगल को 30 दिनों का समय दिया गया है.


CCI ने अप्रैल 2019 में देश में एंड्रॉइड आधारित स्मार्टफोन के उपभोक्ताओं की शिकायतों के बाद मामले की विस्तृत जांच का आदेश दिया था. गूगल पर एप्लिकेशन डिस्ट्रीब्यूशन एग्रीमेंट (MDA) और एंटी फ्रैगमेंटेशन एग्रीमेंट (AFA) जैसे दो समझौतों में गलत कारोबारी गतिविधियां अपनाने का आरोप लगाया गया था.