मिलें पर्यावरण के लिए खतरनाक अपशिष्ट घटाने वाले युवा वैज्ञानिक चंद्र एमआर वोला से

मिलें पर्यावरण के लिए खतरनाक अपशिष्ट घटाने वाले युवा वैज्ञानिक चंद्र एमआर वोला से

Monday October 28, 2019,

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पर्यावरण खतरे में हैं। मानव जाति, उद्योग और विज्ञान के हित में, पर्यावरण के लिए खतरनाक अपशिष्ट घटाने की दिशा में हमारे देश के, जो युवा वैज्ञानिक तरह-तरह के अनुसंधान कर रहे हैं, उन्ही में एक हैं, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मुंबई के रसायन विज्ञान विभाग में कार्यरत शोध-प्राध्यापक चंद्र एमआर वोला।   

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वैज्ञानिक चंद्र एमआर वोला (फोटो: सोशल मीडिया)

हमारी आंखों के सामने की दुनिया यानी जीवन-जगत में जो कुछ खराब (अवरोध) कम करने और बेहतरी (विकास) को गति देने के परिणाम नज़र आ रहे हैं, उनके पीछे ऐसे गंभीर अध्येताओं और जुनून की हद तक सक्रिय वैज्ञानिकों की तपस्या है, जिन्हे हम परिस्थिति वश कभी-कभी, किन्ही खास मौकों पर ही सार्वजनिक जीवन में देख-जान पाते हैं।


ऐसे ही एक युवा वैज्ञानिक हैं, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई के रसायन विज्ञान विभाग में प्राध्यापक चंद्र एमआर वोला। युवा वैज्ञानिक वोला ने दवाओं में एक अनिवार्य घटक के रूप में इस्तेमाल होने वाले क्विनोलिन पर शोध किया है।


जटिल वैज्ञानिक शब्दावली में कहें तो क्विनोलिन एक अणु-निर्माणी उत्प्रेरक घटक होता है। शोध में वोला की टीम ने एक ऐसी सरल विधि विकसित की है, जो दवा उद्योग में उनके एंटीवायरल और उत्तेजना विहीन गुणों के लिए तरह-तरह के अनुप्रयोग चाहती है। ये नई विधियाँ, रासायनिक प्रतिक्रियाओं के दौरान खतरनाक अपशिष्टों के उत्पादन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वोला के इस शोध से अब नव रसायन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण अवसर आसान हो सकेंगे।

फिलहाल, वोला शोध-शिक्षण तक ही सीमित हैं, जिसे वह भविष्य में और सार्थक परिणाम की दिशा में ले जाना चाहते हैं। वह बताते हैं कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई की प्रयोगशाला में गतिविधियों का मूल विषय उत्प्रेरण है। हम उन मुद्दों पर अनुसंधान करना चाहते हैं, जिन्हें लंबे समय से उत्प्रेरण के लिए हल नहीं किया जा रहा है। अपने भविष्योन्मुख अनुसंधान के अंतर्गत रासायनिक प्रतिक्रियाओं के अनुकूलन के लिए वह एक ऐसी विधि विकसित करना चाहते हैं, जो अनुप्रयोगों के चरण कम कर दे, क्योंकि प्रत्येक चरण में घातक अपशिष्ट भी उत्पन्न होते हैं।





परिणामी उत्पादों को प्रत्येक चरण में शुद्ध किया जाना चाहिए क्योंकि यह कचरा एक पर्यावरणीय खतरे के रूप में बढ़ता जा रहा है। अपने अनुसंधान में वह देखना चाहते हैं कि मानव जाति, उद्योग और विज्ञान के लिए फायदेमंद इन चरणों को कैसे कम किया जा सकता है।


युवा वैज्ञानिक वोला वोला अक्तूबर 2014 से आईआईटी बॉम्बे में कार्यरत हैं। उल्लेखनीय है कि  रासायनिक विज्ञान के क्षेत्र में अपने शोध के लिए वह भारत सरकार के राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी पुरस्कार से हाल ही में सम्मानित किए गए हैं। भारत के नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज का यह पुरस्कार विज्ञान-प्रौद्योगिकी में शोधरत युवा वैज्ञानिकों को दिया जाता है। विगत तेरह वर्षों में वोला जैसे 143 कुशल शोधार्थियों को इस पुरस्कार से प्रतिष्ठित किया जा चुका है।


वोला, हेट्रोसायक्लीक व्युत्पन्न (डेरिवेटिव्स) के संश्लेषण के लिए नए तरीकों का विकास करना चाहते हैं। हेटरोक्साइक एक ऐसा अणु होता है, जिसमें कार्बन और हाइड्रोजन के साथ और भी कई तत्व मिश्रित होते हैं। इनका औषधीय रसायन शास्त्र के क्षेत्र में उपयोग किया जाता है।