कोरोना योद्धा की ये हालत? दिल को झकझोर देगा दिल्ली पुलिस कांस्टेबल का ये वीडियो

By yourstory हिन्दी
April 22, 2020, Updated on : Wed Apr 22 2020 08:01:30 GMT+0000
कोरोना योद्धा की ये हालत? दिल को झकझोर देगा दिल्ली पुलिस कांस्टेबल का ये वीडियो
इस सेल्फ-मेड वीडियो में, कांस्टेबल यह भी दावा कर रहा है कि उसके परिवार के सदस्यों का अभी तक COVID-19 के लिए टेस्ट नहीं किया गया है।
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देश और दुनिया भर में कोरोनावायरस (कोविड-19) महामारी ने विकराल रुप लिया हुआ है। वहीं अब कोरोना योद्धा भी इसकी चपेट में है। और इन योद्धाओं को जब पुरी सुविधाएं नहीं मिलती तो आम आदमी के साथ क्या होता होगा? हाल ही में दिल्ली पुलिस के एक सिपाही, जिसने कोरोनावायरस के लिए सकारात्मक परीक्षण किया था, ने दिल्ली में चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान में सुविधाओं और चिकित्सा देखभाल की कमी के बारे में शिकायत की है, जहां उसे रखा गया है। एक सेल्फ-मेड वीडियो में, कांस्टेबल को अस्पताल में शौचालय, गर्म पानी, दवाओं जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के बारे में शिकायत करते हुए देखा गया है।


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वीडियो में कांस्टेबल कहते हैं,

"मैं एक कोरोनावायरस-संक्रमित कॉन्स्टेबल हूं। यहां लगभग 20 लोग हैं। और केवल एक बाथरूम। जब हम खांसी की दवा मांगते हैं, तो हमें दवा नहीं मिलती है। किसी को भी गर्म पानी नहीं मिलता है। केवल ठंडा पानी दिया जाता है। यहाँ बेडशीट भी नहीं बदला गया है।”

कांस्टेबल के अनुसार, वह तिलक नगर पुलिस थाने में तैनात था और कोरोनावायरस के लिए सकारात्मक परीक्षण किया गया था। "17 अप्रैल को मेरा टेस्ट किया गया था। मेरे बच्चे घर पर हैं, उनका अभी तक टेस्ट नहीं किया गया है। वे हमें बताते हैं कि सिटी लैब उन्हें 4500 रुपये में टेस्ट करवाएगी या फिर हम किट मिलने पर करेंगे।" वीडियो में वह कह रहा है।


वह अन्य कैदियों की ओर भी इशारा करता है और कहता है कि बार-बार मांग के बावजूद उन्हें पर्याप्त दवा नहीं दी गई है। कांस्टेबल वार्ड के भीतर तकिए और अन्य सुविधाओं की स्थिति भी दिखाता है जिसमें 20 कोरोनावायरस रोगी होते हैं।


इस मामले पर टिप्पणी करते हुए, डीसीपी, दिल्ली-वेस्ट ने कहा,

"हम अपने कर्मचारियों और उनके परिवार की भलाई का ध्यान रखेंगे। हम भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की प्रक्रियाओं और दिशानिर्देशों का पालन कर रहे हैं। हम अस्पताल प्रशासन के साथ संपर्क करेंगे ताकि और अधिक सुविधाएं प्रदान की जा सकें।”


Edited by रविकांत पारीक