कोविड-19 से कारोबार पर पड़ी मार, डिजिटाइज़ेशन बना बड़ा सहारा

कोविड-19 से कारोबार पर पड़ी मार, डिजिटाइज़ेशन बना बड़ा सहारा

Sunday June 14, 2020,

3 min Read

पूरी दुनिया ने पहले भी कई महामारियों को झेला है, लेकिन लोगों और अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचाने में कोविड-19 अब तक की सबसे ब़ड़ी त्रासदी बन चुका है।


k

सांकेतिक फोटो (साभार: ShutterStock)



सभी देशों की प्राथमिकता अपने शहरों को विकसित करते हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की थी। ऐसे किसी संकट के बारे में न किसी ने सोचा था और न ही इससे निपटने की योजना किसी देश के पास थी। बिना व्यक्तिगत रुप से मिले विक्रेता और उत्पादक कारोबार कर सकें इसकी भी योजना नहीं बनाई गई थी। यही वजह है कि कोविड के फैलने के साथ ही सभी देशों की अर्थव्यवस्थाएं बुरे हाल में पहुंच गयी हैं।

 

हालाँकि इस महामारी के दौरान बगैर व्यक्तिगत रूप से मिले व्यापार करने में डिजिटाइज़ेशन काफी मददगार साबित हुआ है। डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को व्यवस्थित करके व्यवसायों में इसका इस्तेमाल अधिक प्रभावी ढंग से किया जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी तकनीक आने के साथ ही दुनिया पहले से ही एक नए डिजिटल युग का उदय होता देख रही थी, कोविड-19 के फैलने के बाद इसमें और तेजी आयी है। 


डिजिटल इनोवेशन भारत के कृषि क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव ला सकता है। इस क्षेत्र में प्रभावी डिजिटल लिंकेज बना कर डिमांड और सप्लाई को सही रूप से संतुलित किया जा सकता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की मदद से किसान निर्माता संगठनों के विकास में 18 प्रतिशत प्रति वर्ष की बढ़त हुई है।

 

इस क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों में शामिल ट्रेडोलॉजी किसानों की कृषि से जुड़ी ज़रूरतों को पूरा करने और उन्हें बेहतर बाजार-मूल्य प्राप्त करवाना सुनिश्चित करती है। यह दुनिया का पहला ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है जहां पूछताछ से डिलीवरी तक सब एक ही जगह हो जाता है।



ट्रेडोलॉजी के सीईओ, जे के अरोड़ा के मुताबिक,

“ट्रेडोलॉजी वास्तविक खरीदारों और विक्रेताओं के बीच एक इंटरफ़ेस के रूप में काम करता है जोकि कमॉडिटीज़ के वैश्विक थोक और घरेलू व्यापार को सुविधाजनक बनाता है।”

 इस B2B मार्केटप्लेस पर चावल, मक्का, रॉ कॉटन, सब्जी जैसे कृषि उत्पादों के साथ साथ मेटल, कोयला और कंस्ट्रक्शन से जुड़े रॉ मैटेरियल का वैश्विक ट्रेड होता है। कोविड-19 के कारण किसानों को अपने खरीदारों तक पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में ट्रेडोलॉजी जैसा प्लेटफॉर्म उन्हें दुनिया भर के 40 हज़ार से भी ज्यादा खरीदारों तक पहुंचाने में बहुत मददगार साबित हो रहा है।


जे के अरोड़ा के मुताबिक,

“हमारे प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन रिवर्स बिडिंग सिस्टम के माध्यम से खरीदारों के लिए रियल टाइम प्राइस डिस्कवरी और खरीदार तथा विक्रेता के बीच सही मोलभाव सुनिश्चित होता है।”

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके कंपनी यह सुनिश्चित करती है कि वायरस के प्रसार को कम करने के लिए लॉकडाउन के दौरान भी सप्लाई चेन पर प्रभाव न पड़े। ट्रेडोलॉजी के प्लेटफॉर्म पर खरीदार और विक्रेता न सिर्फ ऑनलाइन मिलते हैं बल्कि कंपनी यह भी सुनिश्चित करती हैं कि कारोबार में किसी बिचौलिये की कोई भूमिका न रहे। इससे किसानों को सही दाम भी मिलता है और उनका प्रॉफिट मार्जिन भी बढ़ता है।